गोमती में शवों की राख:सोने की लालच में मृतकों की चिता की राख बहा रहे हैं नदी में, छान छान कर ढूंढ रहे गहने

लखनऊ5 महीने पहले
गोमती नदी की सफाई को लेकर कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिम्मेदारों को चेताया और जुर्माना भी ठोंका, लेकिन हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ।

राजधानी लखनऊ की लाइफ लाइन कही जाने वाली गोमती नदी नगर निगम कर्मियों की वजह से खतरे में हैं। बीते दिनों मरे लोगों की एक के बाद एक चिताएं बैकुंठ धाम में जल रही थी। अब जब चिताओं की संख्या कम हुई है तो नगर निगम इन चिताओं की राख को समेटने में लगा है। लेकिन नगर निगम कर्मी राख को सीधे गोमती नदी में डाल रहे हैं। ऐसे में गोमती नदी दूषित हो रही है।

सरकारी नगर निगम कर्मी राख में ढूंढ रहे हैं गहने

बैकुंठ धाम को साफ करने में लगाए गए कर्मचारी लाशों की राख को सीधे नहीं फेंक रहे हैं। बल्कि, उस राख को पूरी खंगाल भी रहे हैं। वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि इन कर्मचारियों को इन राखों के ढेर से गहने भी मिल जा रहे हैं। नाम ना छापने की शर्त पर नगर निगम के ही एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले छह दिनों से सफाई अभियान चल रहा है। जिसमें करीब पांच कर्मचारी लगे हैं। रोज कर्मचारियों को कुछ ना कुछ गहने जरूर मिल रहे हैं।

पहले से ही खराब है गोमती के हालात

योगी सरकार के लाख दावों के बावजूद गोमती नदी में शहर के कुल 33 नाले गिर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार इन 33 नालों में से 14 ऐसे हैं जिनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे हुए हैं। जबकि, 12 में ये प्लांट तो हैं लेकिन वे काम नहीं कर रहे हैं। वहीं छह नाले सीधे गोमती को प्रदूषित कर रहे हैं।

करीब 2000 मीट्रिक टन घरेलू कचरा और 35 लीटर गंदा पानी गोमती को बना रहे जहरीला

साल 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ की आबादी तब साढ़े 27 लाख थी। जो आज की तारीख में बढ़कर करीब 35 लाख हो चुकी है। इन आबादी से प्रतिदिन निकलने वाला करीब दो हजार मीट्रिक टन कूड़ा और करीब 35 लाख लीटर गंदा पानी गोमती नदी को और जहरीली बना रहे हैं। गोमती नदी को साफ बनाने के लिए सरकार ने अब तक दो हजार रूपए से ज्यादा खर्च कर दिए हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गोमती नदी लखनऊ के पहले तक काफी साफ है। जैसे ही इसका प्रवेश लखनऊ में होता है, गंदगी शुरू हो जाती है।

कार्रवाईयों का कोई नतीजा नहीं निकला

गोमती नदी की सफाई को लेकर कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिम्मेदारों को चेताया और जुर्माना भी ठोंका, लेकिन हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ। पिछली फरवरी में ही बोर्ड ने नगर निगम और जल निगम पर कार्रवाई की थी। उस समय एसटीपी के रखरखाव में कई खामियां मिली थीं। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छह लाख रूपए का जुर्माना लगाया था। बोर्ड ने चेतावनी दी थी कि कोई भी गोमती को प्रदूषित करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारीयों ने दिया रटा रटाया जवाब

इस मामले में नगर निगम लखनऊ आयुक्त अजय द्विवेदी का कहना है कि इसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।