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UP के 6 शहरों से LIVE रिपोर्ट:वाराणसी में सड़कों पर दम तोड़ रहे मरीज, गोरखपुर में दिन-रात जल रहीं चिताएं; लखनऊ में हर पल सांसों के लिए जंग

लखनऊ3 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे। जिन्हें मिल रहे हैं वे ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं। बनारस, गोरखपुर और लखनऊ से लेकर राज्य के लगभग हर अस्पताल में बड़ी संख्या में वेंटिलेटर का संकट है। हम आपको प्रदेश के 6 शहरों का LIVE रिपोर्ट देने जा रहे हैं...

1. वाराणसी: सड़कों पर दम तोड़ रहे मरीज
वाराणसी में हालात ये हैं कि सभी अस्पताल कोरोना मरीजों से भर गए हैं। अब नए मरीजों को आसानी से बेड मिलना मुश्किल हो गया है। अस्पतालों में बेड के साथ वेंटिलेटर और ऑक्सीजन का संकट भी गहराता जा रहा है।

लोग दवाइयों के लिए भी भटक रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में यहां कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या हर दिन 10 से 20 होती है, लेकिन इससे उलट श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लाशों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। घाट पर अंतिम संस्कार कराने के लिए वेटिंग लिस्ट तैयार हो रही है। शहर के अंदर के कब्रिस्तान भी फुल हो चुके हैं। अब लोग शहर के बाहरी इलाकों में शवों को दफन कर रहे हैं।

2. गोरखपुर: अस्पताल की चौखटों पर ही दम तोड़ रहे मरीज
गोरखपुर में हर दिन अस्पतालों की चौखटों पर बेड मिलने के इंतजार में मरीज दम तोड़ रहे हैं। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कुल 1,500 बेड हैं, जिनमें से रोजाना करीब 15 बेड खाली होते हैं। जबकि, भर्ती होने वालों की लिस्ट लंबी होती है। इनमें से करीब 10% मरीजों को वेंटिलेटर वाले बेड की भी जरूरत है, लेकिन वह भी नहीं मिलते। सरकारी आंकड़ों में भले ही मरने वालों की संख्या कम होती है, लेकिन श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में दिन-रात अंतिम संस्कार चल रहे हैं।

3. लखनऊ : 10 दिनों में 1,500 से ज्यादा अंतिम संस्कार
राजधानी लखनऊ में भले ही नए मरीजों की संख्या कम होने लगी है, लेकिन अस्पतालों और श्मशान घाटों का नजारा पहले की तरह बना हुआ है। यहां घाटों पर आज भी शवों की लंबी कतारें लग रहीं हैं। दिन-रात अंतिम संस्कार हो रहा। जब इसके वीडियो वायरल हुए तो सरकार ने घाटों पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर ही रोक लगा दी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया।

4. कानपुर : एक महीने बाद भी कतारें कम नहीं हुईं
कानपुर में भी हालात बेहद खराब हैं। यहां सुबह 7 बजे भैरवघाट श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित सीआई त्रिपाठी का शव लेकर उनके बेटे अमितेश पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वे सुबह जल्दी आए फिर भी लाइन लगानी पड़ी। वे लगभग 2 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर पाए। उनके पिता का कोरोना से निधन हो गया था।

सुबह कोई टोकन सिस्टम तो नही था, क्योंकि नगर निगम का कार्यालय 10 बजे के बाद खुलता है। घाट में शव लेकर पहुचे लोगों ने खुद ही शवों की लाइन तय कर ली। 10 बजे या उसके बाद आए कोरोना संक्रमित शवों को और भी ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। शवों को 10 बजे के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को टोकन लेना होता है।

5. झांसी : हर घंटे एक मौत हो रही
झांसी में भी मौतों के आंकड़ों में हेर-फेर का सरकारी सिस्टम जारी है। यहां हर दिन 5-8 लोगों की मौतें बताई जा रहीं हैं, लेकिन श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में एक साथ इससे कहीं ज्यादा शव पहुंच रहे हैं। मतलब हर एक घंटे एक की मौत हो रही है। अंतिम संस्कार के लिए जगह तक नहीं बची है। नंदनपुरा और बड़ागांव गेट बाहर श्मशान घाट में तो रोज 22 -30 शव पहुंच रहे हैं। यहां पर रात में भी अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं।

6. मेरठ : कब्रिस्तानों में कम पड़ गई जगहें
यहां कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन ने शहर के मुख्य श्मशान घाट सूरजकुंड और कब्रिस्तानों को लेकर भी सख्ती कर दी है। यहां भीड़ नहीं जुटने दी जा रही है। एक शव के साथ सीमित लोगों को ही अंदर जाने दिया जा रहा है। चिता जलाने के लिए जब प्लेटफार्म कम पड़ गए तो पार्किंग स्थल में भी अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सूरजकुंड श्मशान घाट के मुख्य पंडित का कहना है कि प्रत्येक दिन 50 से 55 शव यहां आ रहे हैं जिनमें कोरोना से मरने वाले शव 25 से 30 आ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में यही स्थिति चल रही है। इसी तरह कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ गई है। लोग शहर के बाहर शवों को दफन कर रहे हैं।

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