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चुनाव से पहले जनता के गुस्से का लिटमस टेस्ट:कोरोना काल में सरकार के खिलाफ पनपे आक्रोश को शांत करने यूपी में घर-घर जाएंगे भाजपा नेता, लोगों को बताएंगे सरकार क्या-क्या कर रही

लखनऊ3 महीने पहले
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मिशन 2022 में जुटी बीजेपी ने उत्तर-प्रदेश में सेवा पॉलिटिक्स शुरु कर दी है। दरअसल, बीजेपी ने उत्तर-प्रदेश में " सेवा ही संगठन" अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत यूपी में बीजेपी लोगों की सहायता और उनकी मदद के किए खुद लोगों तक पहुंचेगी। पार्टी और संगठन के पदाधिकारी उत्तर-प्रदेश के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर क्षेत्रीय स्तर पर बैठकें आयोजित कर सेवा कार्यो को गति देने के लिए योजना बनाएगी। दरअसल, बीजेपी की चिंता सरकार के लिए पनपे गुस्से को कम करने की है। कोरोना काल में सरकार की छवि खराब हुई है। जिन्होंने अपनों को खोया है, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन के लिए दर दर ठोकरें खाई है। उनकी नाराजगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। पार्टी को लगता है कि आम जनता के गुस्से के गुबार में कही सरकार और बीजेपी न फंस जाये। इसीलिए पार्टी के नीति नियंताओं ने खास रणनीति तैयार की है।

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान अपनों को खो चुके लोगों के गुस्से से बचाने और पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने के लिए बीजेपी ने तीन सूत्रीय रणनीति तैयार की है। बीजेपी की पहली रणनीति सेवा कार्य के जरीए आम जनता तक पहुंचने की है। इसके बाद सरकार के जनप्रतिनिधि, विधायक से लेकर मंत्री तक अपने क्षेत्रों में सरकारी राहत लोगों तक पहुंचाएंगे। बीजेपी की तीसरी रणनीति भी बेहद खास है। बताया जा रहा कि सरकार की योजनाओं औऱ राहत को जनता तक पहुचाने के लिए अधिकारियों की आंकड़ेबाजी को रोका जाएगा।

जनसंपर्क और सेवा से दूर होगा सत्तविरोधी गुस्सा

बीजेपी की पहली रणनीति जनता के गुस्से को कम करने की है। पार्टी जानती है कि जनता गुस्से में है लिहाजा पार्टी और संगठन के पदाधिकारी उसी गुस्से के तापमान को कम करने के लिए लोगों के बीच जायेंगे। इस महामारी में अपनो को खो चुके परिजनों के घर जायेंगे, संवेदना जतायेगें और इस कोरोना काल में सरकार की आम जनता के लिए बनाई गई योजनाओं के बारे में बतायेगें। पार्टी ने इस रणनीति पर काम करना शुरु भी कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने अलग-अलग जिलों के दौरे भी शुरू कर दिये है। प्रदेश अध्यक्ष कल हरदोई, शाहजहांपुर और बरेली के दौरे पर थे, आज वो मेरठ में होगे , वही सुनील बंसल कानपुर दौरे के बाद आज गोरखपुर में है और इसके बाद पश्चिमी यूपी के दौरे पर जायेंगे। इस दौरान ये नेता कोरोना महामारी मे अपनों को खो चुके परिवारों से मुलाकात कर संवेदना जतायेंगे। जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सेवा ही संगठन अभियान के जरीए लोगों से जुड़ने का मंत्र भी देगे। पार्टी ने यह तय किया है कि इस अभियान के बाद ही सरकार के मंत्री और बड़े नेता सीधे जनता के बीच जायेंगे। माना जा रहा है कि जनता गुस्से में है और संभव है कि बड़े मंत्रियों या नेताओं पर गुस्सा निकल सकता है इसीलिए सेवा कार्य के जरीए पहले संगठन औऱ पार्टी के कार्यकर्ता जनता से कनेक्ट होंगे।

जनप्रतिनिधियों के लिए सेट किया गया टारगेट

बीजेपी की दूसरी रणनीति के तहत जनप्रतिनिधियों को हर परिवार तक राहत और घोषित लाभ पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी होगी और पार्टी स्तर पर इसकी समीक्षा की जायेगी। यह देखा जायेगा की पार्टी, सरकार और जनप्रतिनिधियों को लेकर आम जनता की सोच में कितना बदलाव आया है। नेता जनता के बीच में जायेंगे और उनकी समस्याओं के समुचित उपाय भी करेंगे। जनता को यह भरोसा दिलाना होगा कि सरकार ने इस महामारी में आम जनता की जिंदगी और रोजगार बचाने के लिए बड़े कदम उठाए है। लोगों के जरिए और सोच को बदलने के लिए उन्हें भरोसा दिलाना होगा कि केंद्र की मोदी व सूबे की योगी सरकार ने लाखों जिंदगियां बचाई है। सरकार की दूरदर्शिता और त्वरित लिए गये फैसलों की वजह से जल्द ही इस महामारी को रोकने में सफलता मिली है। विधायक और मंत्रियों को अपने व्यवहार में संतुलन और जनता के प्रति बेहद संवेदनशील होने के लिए भी कहा गया है।

अधिकारियों पर कसी जाएगी लगाम

अधिकारियों की लापरवाही बड़बोलेपन, आंकड़ेबाजी ने सरकार की मुसीबत कई गुना बढ़ा दी है। तिसरी रणनीति के तहत राहत पहुंचाने के मामले में अधिकारियों के आंकडेबाजी को राह में ना आने देने के पूरा प्लान है। राहत पहुंचाने के काम अधिकारियों को रोड़ा बनने से रोका जायेगा। जनप्रतिनिधि सीधे लोगों तक कार्यकर्तांओ के जरीए ही सरकारी योजनाओं का लाभ और राहत पहुचायेंगे। सब जानते है कि कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत में अधिकारियों की कितनी बड़ी लापरवाही रही। आरोप है कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री तक को आंकड़ेबाजी में उलझा कर जमीनी हाकीकत से दूर रखा। इसीलिए कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आते ही खुद मुख्यमंत्री जमीन पर उतरे, दौरे शुरु किए और जमीनी हकीकत को समझते हुए फैसले किए।अब इसका असर भी दिखने लगा है।

साफ है कि बीजेपी इस तीन सूत्रीय रणनीति के बदौलत एक बार फिर 2017 के चुनावी इतिहास को दोहराना चाहती है। पीछले कुछ दिनों से यूपी का सियासी पारा जिस तरीके से चढ़ा हुआ है, पार्टी जमीन पर उतर कर उसे मापना चाहती है। लखनऊ पार्टी दफ्तर में लगातार हुई बैठकों से निकल कर पदाधिकारियों ने अब आम जनता के बीच जाना शुरु कर दिया है। जाहिर है एक तरफ जहां सेवा ही संगठन अभियान को गति दी जा रही है वही दुसरी तरफ यूपी में होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर भी उन जिलों में रणनीति तैयार हो रही है जहां प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और सुनील बंसल दौरा कर रहे है। माना जा रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष यह चुनाव 2022 का लिटमस टेस्ट होगा।

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