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गोरखपुर में योगी को टक्कर:पंचायत चुनाव की 68 सीटों में अखिलेश-योगी के बीच रहा ट्वेंटी-ट्वेंटी, 21 सीटों पर निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य जीते

गोरखपुर2 महीने पहले
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पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का विकास को लेकर पूर्वांचल पर सबसे अधिक फोकस रहा है। लेकिन BJP पिछड़ती नजर आ रही है।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का विकास को लेकर पूर्वांचल पर सबसे अधिक फोकस रहा है। लेकिन BJP पिछड़ती नजर आ रही है।- फाइल फोटो

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और BJP का गढ़ कहे जाने वाले गोरखपुर में पंचायत चुनाव के नतीजों ने यह साबित कर दिया कि भाजपा की तैयारियां इस बार काफी कमजोर रहीं। जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 68 सीटों पर हुए चुनाव में यहां BJP के खाते में 20 सीटें आने का दावा किया जा रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी 20 सीटें झटक ली है। जबकि 21 सीटों पर यहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने कब्जा कर लिया। इसके अलावा बसपा ने 2, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और निषाद पार्टी के हिस्से एक-एक सीटें आईं है।

महामारी में लापरवाही भी बनी हार की वजह
गोरखपुर समेत पूर्वांचल के इलाकों में लंबे अरसे से BJP का दबदबा चला आ रहा था। लेकिन इस बार पंचायत चुनाव में उन्हीं क्षेत्रों में मिली करारी हार और BJP की सीटों का कम होने के पीछे सबसे बड़ी वजह कोरोना में सरकार की अव्यवस्था रही है। मतदाताओं में सबसे बड़ा रोष इस बात का रहा है कि इस महामारी में ऑक्सीजन, बेड और अस्पताल के अभाव में लोग बेमौत मारे जा रहे हैं। सरकारी अमला सिर्फ आकड़ों की बाजीगीरी करने में जुटा रहा।

तमाम मांगों के बीच भी न तो पंचायत चुनाव निरस्त किए गए और न ही हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी प्रदेश में लॉकडाउन लगाया गया। लिहाजा प्रदेश की राजधानी से लेकर गोरखपुर में तक स्थिति बद से बदतर होती चली गई और अभी भी दवा व इलाज के अभाव में रोजाना लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

चुनाव के लिए लॉकडाउन न लगाना
सरकारी कर्मचारियों से लेकर आम आदमी तक यह मांग करता रहा कि किसी भी हाल में पंचायत चुनाव निरस्त कर दिया जाए और तत्काल लॉकडाउन लगा दिया जाए। ताकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। लेकिन शासन स्तर से उस वक्त इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। लेकिन चुनाव खत्म होते ही लॉकडाउन बढ़ता कहीं न कहीं आम जनता में सरकार के प्रति एक गलत धारणा को जन्म देने पर मजबूर कर दिया।

BJP का विकल्प बनी सपा
राजनीतिक जानकारों की मानें तो BJP के गढ़ में सपा की बढ़त या बराबर की टक्कर कहीं न कहीं इस ओर भी इशारा कर रहीं कि इस बार BJP से नाराज मतदाताओं ने विकल्प के रूप में सपा को चुनना बेहतर समझा। हालांकि, अधिकांश इलाकों में दोनों पार्टियों की सीटों में तो कोई खास अंतर नहीं है, लेकिन योगी के गढ़ में सपा के यह प्रदर्शन इस बात की ओर जरूर इशारा कर रहा कि अब मतदाताओं में भाजपा के प्रति विश्वास कम हो रहा है।

वाराणसी में BJP को बड़ा झटका
पीएम के गढ़ वाराणसी में BJP को बड़ा झटका लगा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। जिला पंचायत की 40 सीटों में से BJP के खाते में आए महज 8 सीटें आईं हैं। वहीं 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जीते हैं। वहीं बसपा ने 5,अपना दल एस को 3 सुभासपा और आम आदमी पार्टी को 1 सीट मिली है। वहीं 3 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव जीते हैं।

पूर्वांचल व अन्य जिलों में सपा का दबदबा

  • बस्ती की 43 जिला पंचायत सीटों के नतीजे आ गए हैं। इसमें सपा 20 पर, 9 पर बीजेपी, बसपा और कांग्रेस ने 1-1 सीट पर जीत हासिल की। हर जिले की तरह निर्दलीय यहां भी भूमिका में है और 10 सीटों पर जीत दर्ज की।
  • संतकबीर नगर की 30 सीटों में से 11 पर सपा, निर्दलीय ने 10, बसपा ने 4 सीटों जबकि बीजेपी मात्र 4 सीटों पर जीत दर्ज की है।
  • वाराणसी की 40 सीटों में से सपा ने 14, बीजेपी ने 8, बसपा ने 5 सीटें जीतीं। अपना दल -3, आम आदमी पार्टी और सुभासपा को 1-1, जबकि निर्दलीय 3 पर जीते।
  • आजमगढ़ की 84 सीटों में से 45 सपा, 15 बीजेपी, 15 बसपा, 8 पर अन्य और 1 पर कांग्रेस जीती।
  • अवध की श्रावस्ती की 20 जिला पंचायत सीटों में से 8 पर सपा, 4 पर बीजेपी और आप को 3 सीटें।
  • अयोध्या की 40 सीटों में से 24 पर सपा, 2 पर बीजेपी, 5 पर बसपा, 5 पर अन्य।
  • रायबरेली की 51 सीटों में से 27 पर निर्दलीय, सपा-9, बीजेपी-8, कांग्रेस-7 सीटें जीती।
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