पालतू कुत्ते के हैं शौकीन तो यह खबर आपके लिए...:वाराणसी शहर के 60% कुत्तों के अंदर पार्वो संक्रमण का खतरा, डॉक्टरों ने कहा- टीकाकरण ही केवल बचाव

वाराणसी5 महीने पहलेलेखक: अनुभव शुक्ला
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वाराणसी जनपद में पार्वो का संक्रमण इतना तेज फैल रहा है कि हर चिकित्सालय में प्रतिदिन 40 से 45 कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिन पीड़ित कुत्तों में संक्रमण कम होता है उन्हें तो तत्काल उपचार कर इससे बचाया जा रहा है, लेकिन अधिक संक्रमित कुत्ते की जान बचा पना संभव नहीं हो पा रहा है। - Dainik Bhaskar
वाराणसी जनपद में पार्वो का संक्रमण इतना तेज फैल रहा है कि हर चिकित्सालय में प्रतिदिन 40 से 45 कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिन पीड़ित कुत्तों में संक्रमण कम होता है उन्हें तो तत्काल उपचार कर इससे बचाया जा रहा है, लेकिन अधिक संक्रमित कुत्ते की जान बचा पना संभव नहीं हो पा रहा है।

अगर आप जानवर खासकर कुत्ता पालने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि जहां कोरोना का संक्रमण इंसानों की जिंदगी तबाह कर रहा है। वहीं कुत्तों में की जान का दुश्मन पार्वो नाम का संक्रमण है, जो आपके कुत्ते की जान भी ले सकता है। वाराणसी जनपद में पार्वो का संक्रमण इतना तेज फैल रहा है कि हर चिकित्सालय में प्रतिदिन 40 से 45 कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि जिन पीड़ित कुत्तों में संक्रमण कम होता है उन्हें तो तत्काल उपचार कर इससे बचाया जा रहा है, लेकिन अधिक संक्रमित कुत्ते की जान बचा पना संभव नहीं हो पा रहा है। इसमें पीड़ित कुत्तों की मौजूदा हालात को देखते हुए टीकाकरण किया जाता है। इसलिए लोगों को पालतू कुत्तों का जल्द टीकाकरण कराने का सुझाव दिया जा रहा है।

संक्रमण के शुरुआती लक्षण में ही केवल इसका उपचार
पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अजय सिंह ने बताया कि जनपद में पार्वो का संक्रमण इतना अधिक है कि हर चिकित्सालय में प्रतिदिन 40 से 45 कुत्ते इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। संक्रमण के शुरुआती लक्षण में ही केवल इसका उपचार कर कुत्तों को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुत्तों की मौजूदा हालात को देखते हुए टीकाकरण किया जाता है।

वाराणसी के 60 फीसदी से अधिक कुत्ते इसकी चपेट में
देश में जहां एक तरफ कोरोना के मामले फिर से बढ़ते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुत्तों में पार्वो वायरस का संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। हालात यह है कि जिले 60 फीसदी से अधिक कुत्ते इस वायरस के चपेट में आ चुके हैं। इस खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए पशु चिकित्सक हर संभव प्रयास कर रहे हैं। बीमारी के चलते जिले के सभी पशु चिकित्सालयों में पीड़ित कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह बीमारी किसी भी जानवर को हो सकती है। लेकिन अधिकतर इसका संक्रमण पालतू कुत्तों में ही देखने को मिल रहा है।

संक्रमण ठंड हो जाता है आक्रामक
चिकित्सकों की मानें तो इस वायरस का संक्रमण बरसात के मौसम की शुरुआत से लेकर ठंड तक आक्रामक स्वरूप में रहता है। कुत्तों में होने वाली बीमारियों में पार्वो वायरस बेहद घातक है। इस वायरस से पीड़ित कुत्ते के व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता है। ये एक वायरल बीमारी है और समय पर उपचार न मिलने से जानवरों की मौत तक हो जाती है। पार्वो वायरस से प्रभावित कुत्ता खांसने लगता है, छींक आती है, कुत्ता भोजन नहीं करता, पानी नहीं पीता और उसकी नाक में सूखापन आ जाता है। इसके अलावा कुत्तों के मल में खून आना झागदार और बदबूदार उल्टी होना समेत डायरिया के लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

डॉक्टर ने कहा: संक्रमण से मृत्यु दर 95 फीसदी
कुत्ते के बच्चों के लिए तो यह वायरस इतना घातक है कि डेढ़ से दो माह के है पपी (पिल्लों) की मौत तक हो जा रही है। वाराणसी के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अजय प्रताप सिंह ने बताया कि इस जानलेवा बीमारी से कुत्तों को बचाने का जो एक मात्र उपाय है वो है टीकाकरण उन्होंने बताया कि पार्वो वायरस से संक्रमित कुत्ते की आंत में गंभीर संक्रमण हो जाता है। जिसके सुधर मे लंबा समय लगता है। यदि समय रहते इलाज शुरु कर दिया जाये तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। हालांकी इस वायरस से संक्रमण इतना गहरा होता है कि जान बचने कि उम्मीद कम होती है। डॉ. सिंह के अनुसार इस बीमारी में मृत्यु दर 95 फीसदी है।