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होटल की आग में फंसे 6 पीड़ितों की कहानी:पवन बोले- कमरे में धुआं भरा था, कामिनी को लग रहा था कि अब नहीं बचेंगी

लखनऊ3 महीने पहले

लखनऊ के लेवाना होटल में सोमवार सुबह 7 बजे आग लग गई। उस वक्त सब सो रहे थे। उठे तो धुएं से पूरा कमरा भरा मिला। दम घुटने लगा। लगा कि मर जाएंगे। कोई खिड़की पकड़कर चिल्ला रहा था, तो कोई दरवाजा पीट रहा था। जिंदा रहने के लिए जो किया जा सकता था, वह किया।

दैनिक भास्कर के 4 रिपोर्टर सुबह 7 बजे से ही होटल के बाहर और सिविल अस्पताल में मौजूद रहे। पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। पीड़ितों से उनका दर्द जाना। आइए आपको भी बताते हैं होटल के अंदर फंसे लोगों की पीड़ा।

  • सुबह 7 से 8 बजे : आग लगने के वक्त होटल में 35 से ज्यादा लोग मौजूद थे...

पवन बोले- पाइप पकड़कर नीचे उतरा तब बची जान

पवन त्यागी बताते हैं कि अगर फायर अलार्म बजा होता तो लोग बाहर निकल जाते।
पवन त्यागी बताते हैं कि अगर फायर अलार्म बजा होता तो लोग बाहर निकल जाते।

नोएडा के पवन त्यागी, अक्षय त्यागी और ड्राइवर रिंकू 315 नंबर कमरे में थे। पवन ने बताया, "साढ़े सात बजे कमरे का दरवाजा खोला तो धुएं के कारण कुछ दिख ही नहीं रहा था। किस्मत अच्छी थी कि मेरे कमरे में खिड़की थी। हम तीनों ही उस सीढ़ी से उतर कर किसी तरह से नीचे आए। जब नीचे उतरे तो उसके 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी आई।"

लोगों को निकालने पहुंचे श्रवण कुमार खुद बेहोश होकर गिरे

होटल में काम करने वाले श्रवण कुमार 5 लोगों को बचाने के बाद खुद बेहोश हो गए।
होटल में काम करने वाले श्रवण कुमार 5 लोगों को बचाने के बाद खुद बेहोश हो गए।

बाराबंकी के श्रवण कुमार होटल में काम करते हैं। आग लगी तो लोगों को बचाने के लिए भागे। 5 लोगों को बाहर निकाला। लेकिन, दूसरे फ्लोर पर पहुंचे तो धुंआ इतना ज्यादा था कि खुद ही बेहोश होकर गिर गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल में होश आया। अभी वह कुछ बोलने के बजाय हाथों के इशारे से चीजें बता रहे हैं।

कामिनी बोलीं- दरवाजा खोला तो लगा अब नहीं बचूंगी

आग लगने के बाद कामिनी को बचने की कोई उम्मीद नहीं थी।
आग लगने के बाद कामिनी को बचने की कोई उम्मीद नहीं थी।

दिल्ली की कामिनी रविवार की रात होटल के कमरा नंबर 301 में रुकी थीं। आग लगने के बाद लोगों ने चिल्लाना शुरू किया तो उठीं और दरवाजा खोला। कामिनी बताती हैं, "धुएं के कारण कुछ भी दिख ही नहीं रहा था। लगा कि अब नहीं बचूंगी। बचने के लिए इधर-उधर देखा फिर धुएं के बीच सीढ़ी से नीचे भागी। किसी तरह से जान बची।"

खिड़की से उतरे तब जाकर जान बची

अंश को फायर ब्रिगेड के लोगों ने खिड़की तोड़कर होटल से बाहर निकाला।
अंश को फायर ब्रिगेड के लोगों ने खिड़की तोड़कर होटल से बाहर निकाला।

नोएडा के अंश कौशिक यूनाइटेड लिकर्स कंपनी के अधिकारी हैं। रविवार रात 12 बजे होटल के कमरा नंबर 303 में रुके थे। सुबह पूरे कमरे में धुंआ भर गया। अंश कहते हैं, ''लगा कि अब जिंदा नहीं बचूंगा। अभी मौत हो जाएगी। धुएं के बीच किसी तरह से एक खिड़की के पास पहुंचा। बचाने के लिए आवाज लगाई। फायर ब्रिगेड के लोगों ने खिड़की तोड़कर किसी तरह से निकाला।''

जीवन भर नहीं भूल पाऊंगी यह हादसा

मोना कहती हैं, ये हादसा इतना ज्यादा भयानक था कि जीवन भर इसे नहीं भूल पाऊंगी।
मोना कहती हैं, ये हादसा इतना ज्यादा भयानक था कि जीवन भर इसे नहीं भूल पाऊंगी।

मोना चौधरी कहती हैं, ''आग लगने के बाद होटल से बाहर निकलने में जो 20 मिनट लगे, वह जीवन भर नहीं भूल पाऊंगी। हर मिनट लगता था कि मौत सामने घूम रही है। सांस लेना मुश्किल हो गया था।''

घटना के ठीक 3 घंटे बाद 10 बजे दो और लाशें निकाली गईं। इस तरह से मरने वालों की संख्या 4 हो गई। दहशत के ये 180 मिनट अभी भी अस्पताल में भर्ती पीड़ितों की आंखों में नजर आ रहा है। कमरे में धुंआ घुसा तो इन्हें लग गया था कि अब नहीं बच पाएंगे।

  • 8 बजे से 9 बजे तक: होटल के अंदर फंसे लोगों को खिड़की से बाहर निकालने की शुरुआत हुई...

राजू ने आग सबसे पहले देखी

होटल के पड़ोस में रहने वाले आरडी शुक्ला ने ही गार्ड को आग लगने की जानकारी दी।
होटल के पड़ोस में रहने वाले आरडी शुक्ला ने ही गार्ड को आग लगने की जानकारी दी।

लेवाना होटल के बगल में आरडी शुक्ला का फ्लैट है। घर के स्वीपर राजू ने सबसे पहले आग देखी, तो आरडी शुक्ला को बताया। आरडी दौड़कर होटल पहुंचे और गार्ड को बताया कि तीसरे फ्लोर से धुंआ निकल रहा है। तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। आरडी शुक्ला ने पीछे सीढ़ी लगाई और ग्रिल तोड़कर 2 लोगों को बाहर निकाल लिया।

लोगों के निकालते वक्त फायर फाइटर चंद्रेश गिर पड़े

फायर ब्रिगेड के साथ आए चंद्रेश 4 लोगों को रेस्क्यू कर, धुंए से बेहोश हो गए।
फायर ब्रिगेड के साथ आए चंद्रेश 4 लोगों को रेस्क्यू कर, धुंए से बेहोश हो गए।

फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी के साथ चंद्रेश यादव होटल लेवाना पहुंचे। तीसरी मंजिल पर फंसे 4 लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद और अंदर गए तो धुएं के कारण खुद बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां होश आया।

फायर ब्रिगेड तीसरे फ्लोर पर पहुंचा तो दो लाशें मिली

फायर ब्रिगेड के कर्मी सबसे पहले फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर गए, यहां फंसे लोगों को निकाला गया।
फायर ब्रिगेड के कर्मी सबसे पहले फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर गए, यहां फंसे लोगों को निकाला गया।

सूचना के करीब 30 मिनट बाद 7 बज कर 50 मिनट पर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचा और 8 बजे लोगों को निकालने में जुट गए। आग तीसरे फ्लोर पर लगी थी इसलिए सबसे पहले वहां पहुंचे। तीसरे फ्लोर की गैलरी में दो लाशें मिलीं। ये लाशें लखनऊ के गुरनूर आनंद और साहिबा कौर की थीं। दोनों मंगेतर थे और गणेशगंज के सराय फाटक के पास रहते थे।

आग इतनी भयानक की 24 दमकल की गाड़ियां लगानी पड़ीं
फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी जब पहुंची, तभी अधिकारियों को आग की भयावहता पता चल गई। 10 मिनट के अंदर दूसरी गाड़ी आ गई। इसके अगले 30 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की 4 और गाड़ियां आ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन जब 12 बजे खत्म हुआ तब तक फायर ब्रिगेड की 24 गाड़ियां घटनास्थल पर आकर जा चुकी थीं।

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