जब सोनिया ने कहा- सत्ता जहर है:कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने पर सोनिया कमरे में आकर रोईं; सिंधिया बोले थे- देश राहुल को चाहता है

5 महीने पहलेलेखक: राजेश साहू

राहुल गांधी इस वक्त दो वजहों से चर्चा में हैं। पहला, नेशनल हेराल्ड मामले में ED उनसे पूछताछ कर रही है। दूसरा, 19 जून को उनका बर्थडे है। ऐसी ही एक कहानी है जब वे कांग्रेस उपाध्यक्ष बने थे और उनकी मां सोनिया ने रोते हुए कहा था, 'सत्ता जहर है'। दूसरी कहानी उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस है, जिसके बाद स्थिति पलट गई।

पहले उपाध्यक्ष बनने की बात...

2013 में कांग्रेस के नेता नंबर दो बने राहुल गांधी
19 जनवरी 2013 को राजस्थान के जयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर लगा था। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में पहले दिन एके एंटनी खड़े हुए और कहा, 'मैं एक प्रस्ताव रखना चाहता हूं।' सभी ने सहमति जताई तो कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जनार्दन द्विवेदी ने उस प्रस्ताव को पढ़ना शुरू किया। उसमें लिखा था, 'जनता की आकांक्षाओं को देखते हुए राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया जाए।'

6 साल तक कांग्रेस महासचिव रहने के बाद राहुल गांधी को 2013 में उपाध्यक्ष बनाया गया था।
6 साल तक कांग्रेस महासचिव रहने के बाद राहुल गांधी को 2013 में उपाध्यक्ष बनाया गया था।

सामने बैठे पार्टी के नेताओं ने मेज थपथपाकर सहमति जता दी। सोनिया गांधी ने हामी भर दी। राहुल मुस्कुरा दिए। तत्कालीन PM मनमोहन सिंह उठे और राहुल को एक गुलदस्ता देकर बधाई दी। इस तरह राहुल कांग्रेस के 10 महासचिवों के बीच से निकलकर पार्टी के उपाध्यक्ष बन गए।

ज्योतिरादित्य ने कहा था- यह युवाओं के लिए जरूरी कदम
राहुल के उपाध्यक्ष बनाए जाने के ऐलान के बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी, 'देश का नेता कैसा हो, राहुल गांधी जैसा हो। हमारा नेता राहुल गांधी।' उस वक्त के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया लोगों के बीच गए और कहा, 'राहुल गांधी पहले भी बड़े-बड़े फैसले करते आ रहे थे। शिविर में 60% युवाओं की भागीदारी भी उन्हीं का नतीजा है। देश यही चाहता है।' इसके बाद उन्होंने भी राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए। हालांकि, बाद में सिंधिया खुद ही BJP में चले गए।

रात में रोते हुए राहुल के पास पहुंचीं सोनिया गांधी
राहुल गांधी मंच पर बोलने के लिए खड़े हुए। सामने बैठी उनकी मां सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गए। राहुल ने कहा, 'कल रात मेरे कमरे में मां आई थी। पास बैठीं और रोने लगी। वह इसलिए रोई थीं, क्योंकि जो ताकत बहुत सारे लोग पाना चाहते हैं, वो जहर है।'

राहुल के उपाध्यक्ष बनने के बाद कहा जाने लगा था कि वे 2014 में PM पद के दावेदार होंगे।
राहुल के उपाध्यक्ष बनने के बाद कहा जाने लगा था कि वे 2014 में PM पद के दावेदार होंगे।

राहुल ने आगे कहा, 'मैं आज सुबह 4 बजे ही उठ गया। बाहर अंधेरा था और ठंड भी। बालकनी में गया और सोचा कि मेरे कंधे पर अब बड़ी जिम्मेदारी है। मैं अब वो नहीं कहूंगा, जो लोग सुनना चाहते हैं। अब मैं वो कहूंगा जो मैं महसूस करता हूं। सत्ता की ताकत का अच्छा और बुरा दोनों असर पड़ता है। हमें बुरे को नहीं सुनना है। अच्छा साथ रखना है।'

फोतेदार ने लिखा राहुल में नेता बनने की प्रेरणा नहीं
राहुल उपाध्यक्ष बने तो सियासत में उनके कद का आकलन शुरू हो गया। कांग्रेस परिवार के वफादार रहे माखन लाल फोतेदार ने 'द चिनार लीव्स' में लिखा, 'राहुल गांधी में नेता बनने के लिए कोई मोटिवेशन नजर नहीं आता। सोनिया गांधी बिना किसी तैयारी के उन्हें आगे बढ़ाना चाहती हैं। इसी कारण पार्टी में दिक्कत शुरू हुई है।'

कांग्रेस नेता नटवर लाल ने अपनी आत्मकथा में सोनिया गांधी को कठोर महिला कहा। उनकी आलोचना की। राहुल गांधी के बारे में तल्ख टिप्पणी नहीं की। नटवर लाल ने लिखा, 'राहुल गांधी महान नेता जरूर नहीं हैं लेकिन वह एक अच्छे इंसान हैं।'

नटवर सिंह सोनिया की आलोचना करते थे और कहते थे उन्हें साइड लाइन सोनिया ने ही किया।
नटवर सिंह सोनिया की आलोचना करते थे और कहते थे उन्हें साइड लाइन सोनिया ने ही किया।

यहां तक तो हमने राहुल गांधी के उपाध्यक्ष पद पर जाने की बात की। अब सवाल है कि क्या राहुल सच में कमजोर नेता हैं? इसे लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात करते हैं।

16 जुलाई 2021 को राहुल गांधी कांग्रेस की सोशल मीडिया सेल के लोगों को संबोधित कर रहे थे। उनका रुख बदला हुआ था। उन्होंने कहा, 'जिन्हें कांग्रेस में डर लग रहा है वो पार्टी से जा सकते हैं। कई ऐसे लोग हैं जो निडर हैं, लेकिन कांग्रेस में नहीं हैं, उन्हें आना चाहिए। हमें ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है जो RSS की विचारधारा और सोच पर विश्वास रखते हैं। हमें निडर लोगों की जरूरत है। ये हमारी विचारधारा है।'

राहुल गांधी ने जैसे यह बातें पार्टी के ही नेताओं को टारगेट करके कही हों। इसके कई असर अगले कुछ दिन में ही दिख गए।

  • पंजाब के CM अमरिंदर सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया।
  • चरणजीत सिंह चन्नी को CM बनाया गया।
  • राजस्थान में पायलट-गहलोत विवाद पर चुप्पी।
  • गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी पार्टी में शामिल।
  • CPI नेता कन्हैया कुमार पार्टी में शामिल।
  • छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदलाव पर चुप्पी।

इस परिवर्तन पर पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं कि राहुल पार्टी में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी में अध्यक्ष नहीं होते हुए भी लोगों को पता है कि फैसला कहां से हो रहा है। कांग्रेस में दो तरह के नेताओं की संख्या अधिक है, एक जो वफादारी की दुहाई देते हैं, वो राजनीति में बहुत कामयाब नहीं हैं। दूसरे वह जो जमीन पर काम बहुत करते हैं, लेकिन उन्हें पद नहीं मिल रहा।

राहुल को लेकर सीनियर जर्नलिस्ट स्मिता गुप्ता लिखती हैं- राहुल पार्टी में बदलाव चाहते हैं। सीनियर लीडर्स को बाहर करके नए लोगों को सामने लाना चाहते हैं। बाकी राहुल को हम आइडियलिस्टिक कह सकते हैं, लेकिन आइडियोलॉजिकली वे इतने क्लियर नहीं हैं।

रशीद किदवई कहते हैं कि राहुल चुनौतियों के बीच से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं।
रशीद किदवई कहते हैं कि राहुल चुनौतियों के बीच से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं।

जब कोई युवराज राजनीति में उतरे तो पार्टी का सत्ता में होना जरूरी
रशीद किदवई कहते हैं कि जब कोई युवराज की भूमिका से निकल कर पार्टी के पद संभालता है, तो उसकी पार्टी का सत्ता में होना जरूरी होता है। संजय गांधी को जब पद दिया गया, तब इंदिरा गांधी सत्ता में थीं। राजीव के समय भी वह सत्ता में थीं। राहुल के समय ऐसी स्थिति नहीं थी। राहुल चुनौतियों के बीच से निकल कर यहां तक पहुंचे हैं।