योगी को नेता बनाने वाली 2 घटनाएं:दुकानदार से झगड़े के बाद राजनीति में आए, 6 दिन में 2 बड़े नेताओं को पछाड़कर सीएम बने

6 महीने पहलेलेखक: रक्षा सिंह

24 दिन बाद यूपी का 22वां CM चुना जाएगा। अब तक के 21 CM में से एक ऐसे सीएम हैं, जिनकी राजनीति में एंट्री और CM बनने के पीछे 2 दिलचस्प घटनाएं हैं। आइए एक-एक करके जानते हैं।

पहली घटना: 27 साल पहले कपड़े की दुकान पर एक झगड़ा हुआ था
मार्च 1994 गोरखपुर का गोलघर बाजार, गोरखनाथ मंदिर ट्रस्ट के एमपी इंटर कॉलेज के कुछ स्टूडेंट्स कपड़े की दुकान पर मोल-भाव कर रहे थे। पैसे पर बात नहीं बनी। झगड़ा हो गया। विवाद इतना बड़ा कि दुकानदार ने रिवाल्वर निकाल कर 2 राउंड फायरिंग कर दी।

लड़के भाग गए। अगले दिन पुलिस स्टूडेंट्स को पकड़ने गोरखनाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रताप हॉस्टल पहुंच गई, पर वो नहीं मिले। पुलिस दोबारा आने की धमकी देकर वहां से चली गई। डरे हुए छात्र अगली सुबह 10 बजे गोरखनाथ ट्रस्ट पहुंचे। अपनी बात बताई। ट्रस्ट ने बच्चों को परेशानी से निकालने का जिम्मा एक 22 साल के संन्यासी को दे दिया।

अगले दिन युवा संन्यासी की लीडरशिप में 50 से ज्यादा लड़कों ने पूरे गोरखपुर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। मांग थी, ‘उस दुकानदार को गिरफ्तार किया जाए।’ प्रदर्शन करते-करते छात्र गोरखपुर SSP आवास के पास पहुंंचे। वहां पुलिस ने उन्हें खदेड़ने की कोशिश की तभी एक भगवाधारी SSP आवास की दीवार पर चढ़ गया। ऊपर से जोर-जोर से चीखने लगा।

उस युवा संन्यासी की हिम्मत देखकर लोग दंग थे। उसका नाम पूछ रहे थे। किसी ने बताया, ‘योगी आदित्यनाथ’। उसी दिन के बाद से ऐसी किसी परेशानी में आए युवा मदद मांगने योगी आदित्यनाथ के पास आने लगे।

जब योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के संन्यासी थे।
जब योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के संन्यासी थे।

तत्काल एक्शन के लिए योगी मशहूर हुए, जनता ने सांसद बनाया
छात्रों की मदद करते-करते योगी इतने मशहूर हो गए कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के छात्र नेता उनसे मिलने जुलने लगे। वह पहले से ही गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी थे। मंदिर और जनता दोनों जगहों पर उनकी पैठ बढ़ती गई। चार साल बाद, साल 1998 में महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया।

असल में अवैद्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद थे। उनके राजनीति से बाहर होते ही BJP ने उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ को उसी सीट से टिकट दे दिया और 26 साल के योगी, 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद बने। पहला चुनाव वह 26 हजार वोटों से जीते थे। इसके बाद 1999, 2004, 2009 और 2014 में योगी चुनाव जीतते रहे।

आइए अब योगी के यूपी के CM बनने की कहानी की ओर ले चलते हैं...

दूसरी घटना: यूपी के 2 बड़े नेता, 1 केंद्र की मंत्री लगी थीं, लेकिन योगी ने पासा पलट दिया
इस कहानी के 4 किरदार हैं। पहले, तब के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या, दूसरे गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा, तीसरी तब की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और चौथे गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ। इसकी शुरुआत होती है दिसंबर 2016 से। दिल्ली की सर्दी में उत्तर प्रदेश सदन के एक कमरे में यूपी BJP अध्यक्ष केशव मौर्या को एक फोन आया। सामने वाले शख्श ने एक सर्वे के बारे में बताया, किसी TV चैनल का था। उसमें था कि अगर यूपी में BJP की सरकार बनी तो किन नेताओं को जनता CM देखना चाहेगी।

सर्वे में 36% वोट के साथ केशव दूसरे नंबर पर थे। उन्हें समझ नहीं आया, उनसे आगे कौन निकल गया? थोड़े समय बाद पता चला कि पहले नंबर पर 48% वोट के साथ गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ हैं। जो उनके समझ से परे था, योगी तो कहीं सीन में हैं नहीं, उनका नाम क्यों सर्वे में रखा गया।

सर्वे में 11% वोट के साथ तीसरे नंबर पर राजनाथ सिंह और 4% वोट के साथ चौथे नंबर पर मनोज सिन्हा थे। अगली सुबह केशव BJP दफ्तर पहुंचे और तब के गृह मंत्री राजनाथ सिंह मीडिया के सामने आए। बोले कि वो यूपी के CM नहीं बनेंगे।

भाजपा ने प्रचार किया कि चुनाव के बाद CM तय होगा, लेकिन मार्च 2017 में जब BJP का मेनिफेस्टो आया तो योगी की फोटो नहीं लगाई गई। फ्रंट पेज पर राजनाथ सिंह और केशव मौर्या रखे गए। योगी साइलेंटली इन चीजों को देख रहे थे।

तभी एक फोन आया और सीन में सुषमा स्वराज कूदीं
25 फरवरी 2017 की सुबह योगी फील्ड में प्रचार के लिए निकलने की तैयारी में थे। तभी एक फोन आया, उस तरफ से तब की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बोल रही थीं, “योगी जी आपको पार्लियामेंट्री डेलीगेशन का पार्ट बनकर विदेश जाना है।” योगी ने जवाब दिया, “6 मार्च तक यूपी में चुनाव प्रचार करना है। अभी नहीं जा सकता।” सुषमा ने फिर कहा, “6 मार्च के बाद ही जाना है।”

योगी मान गए। 8 मार्च 2017 को वे दिल्ली पहुंचे। उनका पासपोर्ट पहले ही पहुंच चुका था, लेकिन 10 मार्च को पासपोर्ट उन्हें वापस कर दिया गया। अब उन्हें बाहर नहीं जाना था। वजह किसी को पता नहीं चली। 11 मार्च 2017 को यूपी विधानसभा चुनाव का नतीजा आया। भाजपा ने 312 सीटें जीत ली थीं। NDA 325 पर पहुंचा गया था। पार्टी ने 15 साल बाद यूपी में वापसी कर ली।

कहते हैं मनोज सिन्हा के समर्थकों ने मिठाइयां बांट दी थीं
दिल्ली और लखनऊ की भागमभाग शुरू हुई। इसी भागमभाग में किसी ने मनोज सिन्हा के समर्थकों से कह दिया कि पंडितजी को हरी झंडी मिल गई है। समर्थकों ने मारे खुशी के मिठाइयां बांट दीं।

दिल्ली से विदेश जाने के बजाए योगी गोरखपुर लौट गए
16 मार्च की पार्लियामेंट्री बैठक में शामिल हुए। इसके बाद गोरखपुर लौट गए। बताते हैं कि 18 मार्च को उन्हें स्पेशल चार्टर प्लेन भिजवा कर दिल्ली बुलाया गया।

CM के 2 उम्मीदवार, दो अलग तरह से स्वागत
18 मार्च की सुबह, दिल्ली एयरपोर्ट पर भाजपा के CM पद के दो उम्मीदवार उड़ान भरने को तैयार थे। पहले, केशव मौर्या, उनके साथ प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और संगठन मंत्री सुनील बंसल थे।

दूसरे थे योगी आदित्यनाथ। उनके पास चार्टर्ड प्लेन था। साथ में बस एक सहयोगी। योगी और केशव की मुलाकात हुई। योगी ने सभी नेताओं को चार्टर्ड प्लेन से साथ चलने को कहा। सब लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच गए।

केशव जब एयरपोर्ट से बाहर आए तो उनके लिए करीब 1000 कार्यकर्ताओं की भीड़ लग गई। ‘पूरा यूपी डोला था, केशव-केशव बोला था’ के नारे लगने लगे। दूसरी तरफ योगी अपने 6-7 समर्थकों के साथ चुपचाप गाड़ी में बैठकर VVIP गेस्ट हाउस निकल गए।

फैसले की वो शाम…
18 मार्च की शाम करीब 5:30 बजे। विधायक दल की बैठक के लिए मंच सजा। NDA के 325 विधायक समेत सभी बड़े नेता लोकभवन पहुंचे। केशव मौर्या भी। सबसे आखिर में एंट्री लिए, योगी आदित्यनाथ। विधायकों के बीच एक सांसद का होना कुछ लोगों को चौंका रहा था। मीटिंग खत्म हुई। दिसंबर 2016 में केशव ने जो सर्वे देखा था, वो सच हो गया। उन्हें नंबर 2 पर रखा गया। योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बन गए। 19 मार्च को उन्होंने उत्तर प्रदेश के CM पद की शपथ ली।

1985 के बाद कोई CM दोबारा कुर्सी पर नहीं बैठा...इस बार…
उस दिन तो योगी ने बाजी मार ली। अब 5 साल बीत गए हैं। फिर वही मंच सजा है, लेकिन एक फैक्ट है, यूपी में 1985 के बाद से कोई भी मुख्यमंत्री अगला चुनाव जीतकर तुरंत कुर्सी पर नहीं बैठ पाया है।

योगी से पहले सिर्फ भाजपा के 3 CM कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह में से कल्याण सिंह ऐसे हैं जो दो बार सीएम बने, लेकिन लगातार नहीं। क्या योगी इस इतिहास को बदल देंगे। देखते हैं, 10 मार्च 2022 को।

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