ये कैसे शब्द बोल रहे हैं नेताजी:'तमंचावादी पार्टी' से 'चिलमजीवी' तक, आजकल जाने कौन सी डिक्‍शनरी पढ़के आ रहे हैं यूपी के नेता

लखनऊ5 महीने पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

'चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण...ता ऊपर सुल्तान है, मत चूके चौहान' ... कवि चंदबरदाई के इन शब्दों के सहारे पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को हरा दिया। स्कूल में हमें ये पढ़ाया गया था। अब जाकर इसकी मीनिंग समझ आई। लड़ाई तलवार से पहले शब्दों से लड़ी जाती है।

यूपी विधानसभा चुनाव में यही हो रहा है। एक्सीडेंटल हिंदू, तमंचावादी पार्टी और टोपी पॉलिटिक्स जैसे शब्द सोशल मीडिया पर बवाल काटे हुए हैं। आइए आपको उन शब्दों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने इस इलेक्शन का माहौल इलेक्ट्रिक बना दिया है...

शब्द 1- एक्सीडेंटल हिंदू
कब बोला गयाः 3 जनवरी 2022 को कई दिनों बाद हल्की धूप निकली थी। भाजपा की जनविश्वास यात्रा अमेठी पहुंची थी। जगदीशपुर में हजारों लोगों की भीड़ के बीच सीएम योगी ने बोलना शुरू किया, 'जिनके खानदान और पूर्वज खुद को एक्सीडेंटल हिंदू कहते थे, वो खुद को हिंदू कैसे बोल सकते। ये उनकी मजबूरी है कि वह आज आपके आस्था के सामने नतमस्तक हो गए हैं। उन्होंने दुर्भाग्य से भारत में जन्म लिया है।'

3 जनवरी 2022 को अमेठी में जनविश्वास यात्रा में सीएम योगी ने कांग्रेस सरकार पर इस शब्द से साधा था निशाना।
3 जनवरी 2022 को अमेठी में जनविश्वास यात्रा में सीएम योगी ने कांग्रेस सरकार पर इस शब्द से साधा था निशाना।

क्यों बोला गयाः लोकसभा चुनाव में अमेठी ने राहुल के बजाय स्मृति ईरानी को चुना था। इस बार प्रियंका ने पूरा जोर लगा दिया है। ऐसे में योगी कतई नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस की वापसी हो इसलिए सोच-समझकर इस शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

असल मतलब: सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में कहा था कि हिंदुत्व एक जीवन शैली है। हिंदू शब्द की कोई परिभाषा नहीं है। ऐसा शख्स भी हिंदू हो सकता है, जो धर्म से तो हिंदू हो, लेकिन मंदिर जाकर पूजा न करता हो। यहां एक्सीडेंटल हिंदू का मतलब है कि कोई व्यक्ति जन्म से हिंदू न रहा हो, लेकिन किसी विशेष कारण के लिए उसने हिंदुत्व को अपना लिया हो।

कहां से आयाः ये सब बीजेपी आईटी सेल अमित मालवीय और संबित पात्रा का किया कराया है। इन्हीं लोगों ने फैलाया है कि जवाहर लाल नेहरू ने खुद को एक्सीडेंटल हिन्दू कहा था। असल में 25 फरवरी 2018 को 'पोस्‍टकार्ड न्‍यूज' नाम की एक वेबसाइट पर एक खबर छपी।

इसमें नेहरू का एक कोट था, 'मैं शिक्षा से ईसाई, संस्‍कृति से मुस्लिम और दुर्भाग्‍य से हिंदू हूं!' हो-हल्ला मचा तो फैक्ट चेकर वेबसाइट Alt News ने इसकी जांच शुरू की। जांच कर बताई ये 100% झूठ है।

जांच में पता चला कि हिंदू महासभा के नेता एनबी खरे ने एक लेख लिखा था। हेड‌िंग थी, 'द एंग्री एरिस्टोक्रेट'। चूंकि खरे जवाहरलाल नेहरू के कट्टर आलोचक थे। इसलिए उन्होंने ये वाक्य नेहरू की आलोचना के लिए लिखा था। बाद में यही लेख रफीक जकारिया की किताब 'ए स्‍टडी ऑफ नेहरू' में छपा। कहीं से मालवीय और पात्रा के हाथ ये किताब लगी। बस आलू डाल के सोना निकलवा दिए।

शब्द 2- च‌िलमजीवी
कब बोला गयाः
सितंबर 2021 यूपी में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट। सीएम योगी ने पूर्वांचल एक्प्रेस-वे का उद्घाटन किया। अखिलेश यादव भड़क गए, ' बीजेपी के चिलमजीवी यूपी में खुशहाली नहीं ला सकते हैं।'

क्यों बोला गयाः पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दौरान का एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें पीएम मोदी कार में थे और सीएम योगी कार के पीछे पैदल चल रहे थे। इसपर अखिलेश ने उन्हें चिलमजीवी कहा था।

आखिलेश ने गाजीपुर में इस रैली में बोला था चिलमजीवी शब्द।
आखिलेश ने गाजीपुर में इस रैली में बोला था चिलमजीवी शब्द।

असल मतलबः वैसे तो सीधे-सीधे इसका कोई मतलब नहीं है। मतलब निकालना पड़ेगा। आपने वो आंदोलनजीवी सुना होगा। किसी शब्द के सामने जीवी लगा दें तो मतलब होता है जिससे उसकी ‌जिंदगी चले। आंदोलनजीवी यानी जिसकी जिंदगी आंदोलन से चलती है। अब चिलमजीवी तो आप समझ ही जाएंगी। वैसे ये बता दें कि चिलम गांजा पीने की एक पकी मिट्टी से बना खास पात्र है।

कहां से आयाः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 8 फरवरी 2021 को राज्यसभा में अभिभाषण दिया। इसको लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नए शब्द 'आंदोलनजीवी' का जिक्र किया। वहीं से अखिलेश ने चिलमजीवी शब्द बनाया होगा।

शब्द 3- नर्तकी
कब बोला गयाः 24 दिसंबर 2021. भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कहा, 'पहले तो साधु और संत ही आशीर्वाद या श्राप देते थे, लेकिन अब नर्तकी भी श्राप देने लगी है, यही कलयुग का असली स्वरूप है।' उन्होंने नाम तो नहीं लिया। पर वो जया बच्चन के बारे में बात कर रहे थे। जया ने 4 दिन पहले ही बीजेपी को श्राप दिया था।

24 दिसंबर 2021 को सुरेंद्र सिंह ने जया बच्चन को लेकर कहा था ये शब्द।
24 दिसंबर 2021 को सुरेंद्र सिंह ने जया बच्चन को लेकर कहा था ये शब्द।

क्यों बोला गयाः 20 दिसंबर 2021. सपा सांसद जया बच्चन नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थ (संशोधन) विधेयक 2021 पर बोल रही थी। चुटकी लेते हुए किसी सांसद ने माइक पर ऐश्वर्या कह दिया। ये सुनकर जया तिलमिला गईं। बोलीं, 'मैं आपको श्राप देती हूं, आपके बुरे दिन आने वाले हैं।' नर्तकी श्राप दे रही है। इसी के बाद कहा गया था।

असल मतलब: नर्तकी शब्द का मतलब होता है ऐसी महिला जो अपनी डांसिंग के लिए मशहूर हो। जैसे कटरीना कैफ, नोरा फतेही, श्रद्धा कपूर और दीपिका पादुकोण को उनके डांस के लिए भी जाना जाता है।

कहां से आयाः हमारे यहां शाही परंपरा रही है। यानी राजा खा-पीकर मनोरंजन के लिए बैठ जाते थे। तब महिलाओं को नाचने के लिए बुलाते थे। वो शहर में अलग ही बसती थीं। उनके चर्चे दूर-तलक होते थे।

शब्द 4- टोपी पॉलिटिक्स
कब बोला गयाः
चुनाव से पहले लाल टोपी, काली टोपी, जालीदार टोपी, जैसे शब्दों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। टोपी के रंग को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने जब एक-दूसरे को घेरा, तो सोशल मीडिया पर टोपी पॉलिटिक्स शब्द ट्रेंड कर गया।

क्यों बोला गयाः 7 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में लाल टोपी वालों को यूपी के लिए खतरे की घंटी बताया था। उन्होंने यूपी की पूर्व सपा सरकार पर तंज कसते हुए यह बात कही थी। उसी दिन आप वाले संजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी की काली टोपी पहने फोटो शेयर की थी। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा था कि मोदी जी काली टोपी वालों का दिल और दिमाग दोनों काला होता है।

20 दिसंबर को केशव प्रसाद मौर्य ने कहा क‍ि सपा के गुंडे जालीदार टोपी जेब में रख लाल टोपी पहन लिए हैं, लेकिन उन्‍हें प्रदेश सरकार बख्शने वाली नहीं है।

असल मतलब: टोपी पॉलिटिक्स का मतलब है टोपी को लेकर राजनीति करना।

कहां से आयाः राजनीति से। जवाहरलाल नेहरू से लेकर चौधरी चरण सिंह और वीपी सिंह को उनकी टोपी के कारण दूर से ही लोग पहचान लेते थे। अब इसे नेगेटिव रूप में देखा जा रहा है।

शब्द 5- तमंचावादी पार्टी
कब बोला गयाः 23 जनवरी 2022 को सीएम योगी ने ट्वीट किया, 'दोपहर 12 बजे सोकर उठने के बाद आंखें मलते हुए 'तमंचावादी पार्टी' के वायदे-आजम का अगला वायदा...'जुगाड़ लगाकर' यूपी के हर बच्चे को 'उच्च शिक्षा' के लिए उनके किसी 'अंकल' के साथ ऑस्ट्रेलिया भेजा जाएगा...।

क्यों बोला गयाः 19 जनवरी को योगी आदित्यनाथ ने वीडियो ट्वीट किया। इसमें बोले, 'समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस, ये सभी दल आपराधिक मानसिकता, तमंचावादी मानसिकता और माफियावादी मानसिकता से उबर नहीं पाए हैं। यानी इतने ही शब्द में पूरे विपक्ष को धराशायी कर दिया।

असल मतलब: इसका कोई असल मतलब नहीं है। फिल्मों में ऐसे लाखों सीन होंगे, जहां बदमाशों को तमंचे के बल पर लोगों को डराते हुए देखा गया है। वैसे सीएम योगी यह कह चुके हैं कि अब वह ज्यादा फिल्म नहीं देखते, लेकिन उनकी ये बात साबित करती है कि उन्होंने बचपन में खूब एक्शन फिल्में देखी हैं।

कहां से आयाः अखिलेश सपा अध्यक्ष हैं और उनकी पार्टी का पूरा नाम समाजवादी पार्टी है। योगीजी ने राइमिंग से अच्छा खेला है। तमंचावादी शब्द को समाजवादी शब्द से जोड़ा है।

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