कंगना बोलीं- 1947 में भीख मिली, आजादी 2014 में मिली:भड़के वरुण बोले- इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?; मांझी ने कहा- पद्मश्री वापस लेना चाहिए

पीलीभीत8 महीने पहले
भाजपा सांसद वरुण गांधी ने हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री कंगना रनौट पर निशाना साधा है।

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री कंगना रनोट पर निशाना साधा है। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कंगना रनोट ने 1947 में देश को मिली आजादी को भीख बताया था। उन्होंने कहा था कि देश को आजादी 2014 में मिली है। कंगना के इसी बयान पर वरुण गांधी ने ट्वीट किया है।

वरुण ने लिखा, 'कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?'

उधर, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने मांग की है कि कंगना से पद्मश्री सम्मान वापस लेना चाहिए। बता दें कि मांझी बिहार में एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं।

जीतनराम मांझी ने मीडिया चैनल से भी कंगना को बैन करने की अपील की है।
जीतनराम मांझी ने मीडिया चैनल से भी कंगना को बैन करने की अपील की है।

जीतनराम मांझी ने राष्ट्रपति को टैग करते हुए किया ट्वीट
जीतनराम मांझी ने राष्ट्रपति को टैग करते हुए ट्वीट किया। उसमें लिखा- महामहिम...अविलंब कंगना रनोट से पद्मश्री सम्मान वापस लेना चाहिए। नहीं तो दुनिया ये समझेगी कि गांधी, नेहरू, भगत सिंह, सरदार पटेल, कलाम, मुखर्जी, वीर सावरकर ने भीख मांगी तो आजादी मिली। उन्होंने ये भी मांग की है कि कंगना इस बयान के लिए माफी मांगे। जीतनराम मांझी ने चैनलों से भी कंगना को बैन करने की अपील की है। बता दें कि कंगना को हाल ही में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

सांसद वरुण गांधी द्वारा किया गया ट्वीट।
सांसद वरुण गांधी द्वारा किया गया ट्वीट।

कंगना ने देश को मिली आजादी को भीख बताया था
एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कंगना रनोट ने कहा था कि, 'आजादी अगर भीख में मिले, तो क्या वो आजादी हो सकती है? सावरकर, रानी लक्ष्मीबाई, नेताजी सुभाषचंद्र बोस इन लोगों की बात करूं तो ये लोग जानते थे कि खून बहेगा, लेकिन ये भी याद रहे कि हिंदुस्तानी-हिंदुस्तानी का खून न बहाए। उन्होंने आजादी की कीमत चुकाई, यकीनन पर वो आजादी नहीं थी, वो भीख थी। जो आजादी मिली है वो 2014 में मिली है।'

किसानों के समर्थन में भी खड़े हो चुके हैं वरुण
ऐसा पहली बार नहीं है कि जब पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ खड़े हुए हैं। उन्होंने अभी हाल ही में किसानों के समर्थन में कई ट्वीट किए थे। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उनकी समस्याओं को जाना था। समस्याओं के निस्तारण के लिए सीएम योगी को पत्र लिखा था। इसके बाद वरुण ने मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत का वीडियो साझा करते हुए किसानों के दर्द को सरकार के समक्ष रखने का प्रयास किया था।

धान खरीद को लेकर वरुण गांधी ने किया था ट्वीट।
धान खरीद को लेकर वरुण गांधी ने किया था ट्वीट।

लखीमपुर हिंसा पर भी मुखर रहे
वरुण गांधी ने 7 अक्टूबर को लखीमपुर हिंसा से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट कर लिखा था कि, 'यह वीडियो बिल्कुल साफ है। प्रदर्शनकारियों को हत्या से चुप नहीं कराया जा सकता। मासूम किसानों का जो खून बहा है उसकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए और न्याय मिलना ही चाहिए। किसानों के सामने ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि हम क्रूर हैं।'

किसानों के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी की कविता को ट्वीट किया था।
किसानों के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी की कविता को ट्वीट किया था।

मां-बेटे को राष्ट्रीय कार्यसमिति से किया गया बाहर
लखीमपुर घटना में वरुण गांधी ने सीबीआई जांच और मृतकों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग भी की थी। इसके बाद भाजपा द्वारा जारी की गई राष्ट्रीय कार्यसमिति में वरुण और उनकी मां मेनका को शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कहीं न कहीं ये वरुण के बागी तेवरों का नतीजा है।

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