जिला अस्पताल में नहीं हो रहा कार्ड टेस्ट:कोरोना के बाद अब डेंगू का कहर, प्रतिदिन आ रहे पांच रोगी, सितंबर में सर्वाधिक 100 मरीज

प्रतापगढ़2 महीने पहले
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  • खून से प्लेटलेट्स अलग कर चढ़ाने की मशीन भी नहीं

कोरोना के बाद अब डेंगू जिले में पांव पसार रहा है। जिला चिकित्सालय में प्रतिदन औसतन 4 से 5 मरीज डेंगू पॉजिटिव आ रहे हैं। वहीं जिला चिकित्सालय की स्थिति यह है कि यहां मरीजों का मात्र एलाइजा टेस्ट ही किया जा रहा है। कार्ड टेस्ट की सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों की जांच रिपोर्ट के लिए अगले दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरी ओर जिला चिकित्सालय में जहां प्रतिदिन 4 से 5 मरीज डेंगू के मिल रहे हैं वहीं निजी चिकित्सालयों में भी डेंगू के रोगियों की भरमार है।

दो माह से जिले में डेंगू रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। चिकित्सा विभाग के मुताबिक अकेले सितंबर माह में अब तक 100 मरीज सामने आ चुके हैं। बड़ी बात यह है कि जो रोगी सामने आ रहे हैं उनमें निजी चिकित्सालय के मरीज शामिल नहीं है। यदि निजी चिकित्सालय में डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या शामिल की जाए तो करीब 10 से 12 मरीज प्रतिदिन डेंगू पॉजिटिव मिल रहे हैं। इसके बावजूद जिला चिकित्सालय में प्लेटलेटस चढ़ाने के लिए मशीन तक उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद की ओर से शहर में डेंगू के प्रकोप के बावजूद अब तक फोगिंग नहीं करवाई जा रही है, जिससे डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिला चिकित्सालय में ओपीडी का आंकड़ा जो दो माह पूर्व जो 400 के आसपास था, वह भी बढ़कर 650 के पार हो गया है।

दूरदराज डेंगू की चपेट में आए मरीज जिला चिकित्सालय पहुंचते हैं। लोगों को यहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है। ऐसे में यहां आने पर भी उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिला चिकित्सालय में प्लेटलेटस चढ़ाने के लिए एफेरेसिस मशीन तक का अभाव है। डेंगू के मरीज को केवल प्लेटलेटस चढ़ाकर इलाज किया जाता है। मशीन नहीं होने के चलते मरीजों को पूरा ब्लड ही चढ़ाना पड़ रहा है। मशीन नहीं होने के चलते कई मरीज उदयपुर, जयपुर या पड़ौसी राज्य मध्यप्रदेश जाने को मजबूर हैं।
जिम्मेदार चिकित्सा विभाग और नगर परिषद उदासीन

इन दिनों डेंगू का संक्रमण फैलने के बावजूद चिकित्सा विभाग व नगर परिषद द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। शहर में इन दिनों डेंगू का संक्रमण तेजी से फैलने के बावजूद रोकथाम के लिए न तो चिकित्सा विभाग और न ही नगर परिषद की ओर से कोई कार्रवाई की जा रही है। मौसमी बीमारियों का शहर में प्रकोप न बढ़े, इसके लिए घर-घर सर्वे कर संदिग्ध रोगियों की जांच की जानी चाहिए। मौसमी बीमारियां फैलने पर शहर में नगर परिषद की ओर से एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता है। इस बार अब तक एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं किया गया है। बारिश से नाले ओवरफ्लो होने के कारण कॉलोनियों में जगह जगह गंदा पानी जमा है। नई आबादी, मालवा कॉलोनी, महावीर कॉलोनी आदि में नालियां भी गंदगी से अटी हुई हैं। ऐसे में मच्छर पनपने के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

शहर के खाली प्लॉटों में जमा पानी बीमारियों की जड़

चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं कि बारिश के बाद अब वायरल के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। इनमें डेंगू के मरीज भी शामिल हैं। इसका कारण है कि शहर सहित कई खाली प्लॉटों में बारिश का पानी जमा है। जगह-जगह जमा बदबूदार पानी मलेरिया व डेंगू का न्यौता दे रहा है। शहर की कई कॉलोनियों के खाली प्लॉटों में बारिश व नालियों का पानी भरा है। इनमें मच्छर पनप रहे हैं।

आज सैंपल दिया तो कल मिल रही रिपोर्ट

जिला चिकित्सालय में ऑपरेटर होने के बावजूद मरीजों का पंजीयन समय पर नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि सैंपल देने के अगले दिन ही मरीज की जांच रिपोर्ट मिल रही है। 250 मरीजों की करीब 2000 जांचे रोजाना होने लगी हैं। ऐसे में रोजाना रक्त व अन्य नमूने लेकर उन्हें निर्धारित समय पर रिपोर्ट देने में पसीने छूट रहे हैं।

केवल इमरजेंसी के लिए होता है कार्ड टेस्ट

विशेषज्ञों के अनुसार कार्ड टेस्ट केवल इमरजेंसी के लिए है। देर शाम मरीज आया और उसको डेंगू या स्क्रब टाइफस के लक्षण हैं तो उसका इलाज आरंभ करने के लिए चिकित्सक कार्ड टेस्ट करवाते हैं, ताकि उसका इलाज प्रारंभ किया जा सके।

डेंगू के प्रमुख लक्षण तेज बुखार, सिर में दर्द, गले में खराश, जोड़ाें में दर्द, कुछ मरीजों में इनके अलावा पेट में दर्द उल्टी होना, उल्टी में खून आना जैसे लक्षण भी होते हैं।

प्लेटलेटस चढ़ाने के लिए मशीन भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की जाती है। जिला चिकित्सालय में अभी इस मशीन की स्वीकृति नहीं है। डेंगू जांच के लिए एलाइजा टेस्ट की ही वेलिडिटी है। जांच रिपोर्ट यदि अगले दिन मिल रही है तो इसके संबंध में व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।
-डॉ. ओपी दायमा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, प्रतापगढ़।​​​​​​​





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