नवरात्रि के अवसर पर चमत्कारी माताजी के दर्शन:​​​​​​​धमोत्तर और प्रतापगढ़ की सीमा पर स्थित है अंबामाता का मंदिर, 350 साल पुराना है अंबामाता मंदिर, राज्य सहित मध्यप्रदेश, गुजरात से मन्नत मांगने आते हैं श्रद्धालु

प्रतापगढ़11 दिन पहले
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अंबामाताजी की शृंगारित प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
अंबामाताजी की शृंगारित प्रतिमा।

देशभर में नवरात्र का त्योहार गुरुवार से मनाया जाएगा। नवरात्र पर मां दुर्गा की घर-घर में घट स्थापना की जाएगी। ऐसे में भास्कर आपको जिले के उन माता मंदिरों के बारे में अवगत करा रहा है, जिनकी जिला सहित राज्य और राज्य के बाहर लोगों में श्रद्धा है। जिला मुख्यालय से करीब 6 किमी दूर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अंबामाता का मंदिर है। धमोत्तर ठिकाने का यह मंदिर करीब 350 साल पुराना है।

यह मंदिर धमोत्तर और प्रतापगढ़ की सीमा पर स्थित है। मंदिर के पीछे की ओर नाला जा रहा है। दक्षिण में प्रतापगढ़ तो उत्तर में धमोत्तर है। चार पीढ़ी पूर्व ठाकुर केसरी सिंह यहां गद्दी पर विराजमान थे। मंदिर से जुड़े धमोत्तर निवासी ब्रजराज सिंह ने बताया कि एक रात ठाकुर केसरी सिंह को सपना आया कि कोई विपदा आ गई है, जिसमें उनके चोट लग गई है। इस पर वे अगले दिन अलसुबह अंबा माता मंदिर आए तो देखा कि अंबामाता का एक हाथ खंडित हो गया है। इस पर उन्होंने खंडित हाथ पर पट्टी लगाई और नई मूर्ति की व्यवस्था में जुट गए।

इस काम में उन्हें करीब 7 दिन लगे। इन सात दिनों में उन्होंने अन्न जल ग्रहण नहीं किया। नई मूर्ति आने के बाद उसकी प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। इस मंदिर की स्थापना दीपावली के दो दिन बाद दोज के दिन मानी जाती है।

अष्टमी पर होता है हवन

इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत शीघ्र पूरी होती है। यही कारण है कि यहां न केवल जिला बल्कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात तक के श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर माता को श्रद्धानुसार भेंट चढ़ाते हैं। नवरात्र और दीपावली के मौके पर यहां सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है।

माता की पूजा और आराधना के लिए तो यह मंदिर खास है। इसके साथ ही नया वाहन खरीदने के बाद लोग माता के दरबार में वाहन की पूजा कराने आते हैं। नवरात्र के दौरान दूर-दूर से बच्चे और बुजुर्ग मौसम की मार की परवाह नहीं करते हुए नंगे पैर माता के दरबार में धाेक लगाने आते हैं। अष्टमी पर धमोत्तर ठिकानेदार की ओर से मंदिर में हवन पूजन का कार्यक्रम किया जाता है। इस कार्यक्रम में सैकड़ाें लोग शामिल होते हैं।

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