UPPCS में संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की 2 कहानियां:किसान की बेटी ने ऑनलाइन तैयारी की, टीचर ने नौकरी के 12 साल बाद किया क्रैक

पट्टीएक महीने पहले

यूपी पीसीएस 2021 के नतीजे बुधवार को घोषित कर दिए गए हैं। कुल 627 कैंडिडेट का चयन हुआ है। प्रतापगढ़ से 25 किमी दूर पट्‌टी की रहने वाली श्वेता मिश्रा को 30वीं रैंक मिली है। वहीं, जौनपुर के टीचर आरएस चौहान को नौकरी के 12 साल बाद सफलता मिली है।

पढ़िए श्वेता के पिता का संघर्ष-श्वेता की मेहनत
श्वेता के पिता सुशील कुमार मिश्रा बताते हैं, "जब मैंने अपना परिवार चलाना शुरू किया तो बहुत खेती बाड़ी नहीं थी। मेरा सपना था कि मेरे बच्चे खेतों में अपना पसीना न बहाएं। वह कुछ ऐसा मुकाम हासिल करे जिससे लोग उनकी मिसाले दें। धीरे-धीरे मेरी खेती बढ़ती गई। आज सात से आठ बीघा में खेती है। उसी से जो आता है उससे घर चलता है।

मेरे बेटे ने 2014 में नेवी ज्वाइन किया था। उसके नौकरी में आने के बाद से मैं थोड़ा निश्चिंत हो गया। वह भी अब घर चलाने में मेरी मदद करता है। साथ ही बेटी श्वेता भी पढ़ने में काफी तेज थी। कई बार उसने हमें अपनी प्रतिभा से चौंकाया। इसके बाद ही हमने उसे यूपीएससी की तैयारी करने दी। शुभचिंतक कहते थे कि इस एग्जाम का कोई भरोसा नहीं है कि कब तक तैयारी करनी पड़े। लेकिन मुझे मेरी बेटी पर पूरा भरोसा था। आज मैं बहुत खुश हूं।"

अपने परिवार के साथ पिता सुशील मिश्रा।
अपने परिवार के साथ पिता सुशील मिश्रा।

अब श्वेता की मेहनत की बात करते हैं
फूल मालाओं से लदी श्वेता बड़ी मुश्किल से बात करने का समय निकाल पाती हैं। बताती हैं, "मैंने जब यूपीएससी की तैयारी शुरू करने की सोची तो पॉजिटिव सुझाव से ज्यादा नेगेटिव सुझाव आए। हर कोई यही कहता था कि इस एग्जाम में इतना जल्दी सेलेक्शन नहीं होता है। इसलिए मैंने इसका बैकअप प्लान निकाला।"

"मैंने ग्रेजुएशन के बाद डीएलएड किया। टीईटी की परीक्षा भी पास की। हालांकि, कोई जॉब नहीं आई तो मैं अपने सपने पूरे करने बढ़ गई। मैंने 2018 में यूपीएससी की तैयारी करने की बात परिवार को बताई तो सभी खुशी-खुशी तैयार हो गए। पिता ने इलाहाबाद जाकर कोचिंग वगैरह में एडमिशन कराया। रहने खाने का बंदोबस्त कर लौट आए। इसके बाद से मैं तैयारियों में जुट गई।"

श्वेता अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देती हैं।
श्वेता अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देती हैं।

दो अटेम्प्ट में जब नहीं हुआ तो थोड़ा निराशा हुई लेकिन हताश नहीं
वह कहती हैं, "यूपीपीसीएस में दो अटेम्प्ट में जब नहीं हुआ तो थोड़ा निराशा हुई लेकिन हताश नहीं हुई। मैंने अपनी प्लानिंग में चेंज किया। सिर्फ सिलेबस पर फोकस करना शुरू कर दिया। 2020 में कोविड के कारण अचानक से लॉकडाउन लग गया। उसमें मैं सबसे ज्यादा परेशान हुई।"

"आनन- फानन में घर आना हुआ तो कई जरूरी किताबें प्रयागराज में ही छूट गई। कुछ दिनों तक मैं बहुत परेशान रही। फिर ऑनलाइन क्लासेस शुरू हुई तो कुछ रिलीफ मिली। उसके बाद किताबों से ज्यादा मैं नेट पर अपनी जरूरत का मैटेरियल ढूंढ़ कर उसे पढ़ने लगी। लॉकडाउन खुला ताे फिर प्रयागराज पहुंच गई। जिसके बाद मेरी पढ़ाई रेगुलर शुरू हो गई। जिसका नतीजा आज सामने आ गया।"

सीडीएस में भी कर चुकी हैं ट्राई
श्वेता बताती हैं, "भैया जब नेवी में सिलेक्ट हुए तो उससे फौज के किस्से सुनकर बहुत रोमांचित होती थी। इसी रोमांच का अनुभव करने के लिए मैंने अपनी पढ़ाई कंप्लीट होने के बाद सीडीएस का भी एग्जाम दिया था। चूंकि प्री क्लियर हो गया था। मेंस देने जाना था। उसी समय यूपीपीसीएस का एग्जाम होना था। जिसके लिए उसे ड्राप करना पड़ा था।" वह आगे कहती हैं, "अभी नायब तहसीलदार की पोस्ट पर मैं ज्वाइन करूंगी लेकिन आगे मैं आईएएस की तैयारी करूंगी। क्योंकि मुझे अपना और अपने परिवार का सपना पूरा करना है।"

ग्रेजुएशन तक पट्‌टी से ही पढ़ी, पहली बार तैयारी करने इलाहाबाद गई
श्वेता बताती हैं कि मैंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पट्‌टी से ही की है। मैं जब हाईस्कूल कर रही थी तो वह स्कूल मेरे घर से लगभग तीन से चार किमी दूर हुआ करता था। मैं जब भी किसी अच्छे मुकाम पर पहुंची तो अपने क्षेत्र के लिए कुछ बेहतर करना चाहूंगी ताकि यहां के लड़के-लड़कियां भी आगे जाकर अपने सपनों को पूरा कर सकें।

अब बात करते हैं औरैया में 12 साल से टीचर आरएस चौहान की...
परिवार की जिम्मेदारी, सरकारी नौकरी और दो बच्चों का पिता होने के बाद यूपीपीसीएस क्लियर करना बड़ी चुनौती होता है। इस चुनौती को पार किया है जौनपुर के रहने वाले आरएस चौहान ने। वह औरैया में टीचर की नौकरी बीते 12 साल से कर रहे हैं।

आरएस चौहान कहते हैं कि मेरी यूपीपीसीएस में 131वीं रैंक आई है। मैं हमेशा सिविल सर्विस क्रैक करना चाहता था। आज यह सपना पूरा हुआ है। आरएस चौहान इस वक्त औरैया के सहार में जगदीश चन्द्र अग्निहोत्री इण्टर कॉलेज में सामाजिक विज्ञान के टीचर हैं।

अपनी पत्नी के साथ आरएस चौहान। रिजल्ट आने के बाद साथी और परिजन खुशियां मनाते हुए।
अपनी पत्नी के साथ आरएस चौहान। रिजल्ट आने के बाद साथी और परिजन खुशियां मनाते हुए।

अब आगे पढ़ते हैं...कैसे पिता को दिए वचन को अपना जूनून बना लिया आरएस चौहान ने
फूल मालाओं से लदे आरएस चौहान बताते हैं, "मैं घर में सबसे बड़ा हूं। इसलिए पिता घरेलू मुद्दों पर मुझसे राय लिया करते थे। ग्रेजुएशन के बाद मैंने सिविल सेवाओं में जाने का फैसला लिया। इसके लिए 2008 से लगातार 2010 तक तैयारी की। एक बार इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन वह क्लियर नहीं हो पाया।"

"इसके बाद 2010 में मेरी नौकरी लग गई। मैं उसमें व्यस्त हो गया। मेरी मां के साथ हादसा हुआ तो उनका एक पैर ऐसा खराब हुआ कि वह आज भी सहारे के बिना नहीं चल पाती हैं। 2012 में मेरी शादी भी हो गई। 2015 में मेरा एक बेटा भी हो गया। जिसके बाद मैं अपनी जिंदगी में काफी व्यस्त हो गया।"

"इस दौरान मैं टीचिंग करता, बीच-बीच में घर जाकर खेती किसानी भी करता। परिवार की समस्याओं का निदान भी करना होता था। इन्हीं सब के बीच जब मैं अपनी पत्नी को औरैया ले आया तो मेरे दिमाग में 2016 में एक बार फिर आया कि मैं तैयारी शुरू करूं। क्योंकि, मैंने पिता जी को वचन दिया था कि मैं सिविल सेवाओं में जाऊंगा जरूर। इसके बाद मैंने अपनी तैयारी शुरू कर दी।"

तस्वीर में आर एस चौहान अपनी परिवार और साथियों के साथ हैं।
तस्वीर में आर एस चौहान अपनी परिवार और साथियों के साथ हैं।

"सुबह मैं 8 बजे तक स्कूल पहुंच जाता था। इसके बाद सीधे डेढ़ बजे घर पहुंचता। वहां मैं नाश्ता कर दोपहर 2 बजे से पढ़ाई शुरू करता तो सीधे 6 बजे उठता। उसके बाद थोड़ा बहुत परिवार और दोस्तों को समय देता। एक से डेढ़ घंटे बाद मैं फिर पढ़ाई करने बैठता तो सीधे रात 11 बजे उठता। जितनी भी पढ़ाई करता फोकस होकर करता। जिसका फायदा अब मिला।"

बच्चों का बचपन मिस किया, कोरोना से फायदा मिला
आरएस चौहान बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान मैंने अपने बच्चों का बचपन मिस कर दिया। वह पढ़ाई के दौरान आते तो मैं डिस्टर्ब होता। मेरी पत्नी हमेशा अलर्ट रहती कि बच्चे मेरे पास न आ पाएं। इसी बीच चार साल पहले मेरे पिता की भी मौत हो गई। लेकिन उसके बाद मेरा फोकस और बढ़ गया। कोरोना के समय का मुझे बहुत फायदा मिला। स्कूल बंद थे। कहीं आना जाना भी नहीं था। ऑनलाइन पढ़ाई थी। इस समय में मेरा पूरा सिलेबस पूरा हो गया। जिसका फायदा अब मुझे मिला।

खबरें और भी हैं...