राहत:22 वर्ष से लापता शख्स गाजियाबाद में परिजनों को जिंदा मिला

रानीगंज2 महीने पहले
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शनिवार को संपिण्डन कार्यक्रम में अपने भाई के साथ देवेन्द्र चौधरी। - Dainik Bhaskar
शनिवार को संपिण्डन कार्यक्रम में अपने भाई के साथ देवेन्द्र चौधरी।
  • वर्ष 2000 के फरवरी में 65 वर्षीय देवेंद्र चौधरी घर से कटिहार जाने के दौरान हो गए थे गुम, परिजनों ने कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट, एक पादरी ने दी थी याददाश्त जाने की जानकारी

रानीगंज थाना क्षेत्र के गितवास बाजार निवासी जिस देवेंद्र चौधरी को घरवाले मृत मानकर चल रहे थे 22 साल बाद वह जिंदा मिला है। इस संबंध में चिट्ठी मिलने से घर में खुशी फैल गई है। हालांकि यह खुशखबरी पहुंचने के तीन दिन पहले उनके पिता का देहांत हो गया। दरअसल रानीगंज थाना क्षेत्र के गितवास बाजार स्थित 85 वर्षीय डॉ बैद्यनाथ चौधरी का निधन हो गया। उनके निधन के तीन दिन बाद उनके बड़े पुत्र 65 वर्षीय देवेन्द्र चौधरी के जिंदा होने की चिठ्ठी आई। जिसे परिवार के सभी सदस्य 22 वर्षों से मृत मान लिया था। उनको जिंदा देख घर के सभी लोग भगवान को शुक्रिया कर रहे है।

22 वर्षाें के बाद मिली परिजनों को खुशी
जिस समय देवेन्द्र चौधरी घर से गायब हुए उस समय उनके पत्नी मीणा देवी पर अपने तीन छोटे छोटे बच्चे जिसमे दो पुत्र विक्की, विकास व बेटी शालनी उर्फ नीरज का दायित्व था। जिसे परिवार के सभी सदस्यों दादा दादी, चाचा चाची, फुआ फूफा सभी लोगों ने अपने साथ हर खुशी देने की भरसक कोशिश की। तीनों बच्चों को पिता का प्यार नहीं मिला। आज पूरे परिवार घर मे संपिण्डन कार्यक्रम में गम के समय 22 वर्षों के बाद मिली इस खुशी के मौके पर उनके बच्चों ने कहा कि दादा जी ने यह खुशी फिर से हमें दिलाई है। वहीं देवेन्द्र चौधरी के बूढ़ी मां शांति देवी पति की जुदाई व बेटे की वापसी दोनों में वह रोते जा रही है।

घर पहुंचने पर सुनाई आपबीती, पूर्णिया से हुए थे लापता, सभी मान रहे थे मृत

दरअसल रानीगंज थाना क्षेत्र के गितवास के देवेन्द्र चौधरी दवा व अन्य कारोबार करते थे। कारोबार के सिलसिले मे वह नेपाल जाया करते थे। इस बीच वह वर्ष 2000 के फरवरी महीने में घर से किसी काम से कटिहार जाने के लिए निकले और वापस नहीं लौटे। इस बीच फारबिसगंज व जोगबनी के रिश्तेदारों ने नेपाल के विराटनगर के एक होटल में एक व्यक्ति का शव मिला था। जिसे देवेन्द्र चौधरी का शव होने का शक जताया।आनन फानन में परिजनों ने परिजनों ने पुलिस की मदद से शव की शिनाख्त करने की कोशिश की। लेकिन तब तक नेपाल पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि नेपाल एसपी से मिलकर उस समय शव का शिनाख्त करवाने की कोशिश की गई थी, पर शव गल जाने से शिनाख्त नहीं हो पाई। बावजूद परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया। इस बीच करीब 14 वर्षों तक परिजनों काफी खोजने का प्रयास किया। लेकिन उनका कुछ भी पता नहीं चला। हालांकि परिजनों ने उस समय रानीगंज थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। देवेन्द्र चौधरी के छोटे भाई ललित चौधरी ने बताया कि बीते 13 जून को पिताजी की देहांत हो गया। सभी क्रिया कर्म में लगे थे। इस बीच घर पर एक चिट्ठी आई। लेकिन कामकाज होने के कारण चिट्ठी को नहीं पढ़ा गया। तब दो दिन बाद फिर एक चिट्ठी आई, जब दूसरी चिट्ठी को पढ़ा गया तो वे गाजियाबाद के एक चर्च के पादरी की चिट्ठी थी जिसमे उनके भाई देवेन्द्र चौधरी के बारे में बताया गया था। शनिवार को देवेन्द्र चौधरी के पिता के संपिण्डन कार्यक्रम में सम्मलित हए। देवेन्द्र चौधरी के भाई ललित चौधरी ने बताया कि बातचीत में पादरी ने बताया कि आपके भाई को पेरालिसिस है। इसे अपना नाम पता कुछ भी याद नहीं था। कुछ दिन पहले वह धीरे धीरे ठीक होने लगा। इस दौरान उन्होंने अपना नाम पता बताया। फोन पर ही भाई देवेन्द्र से बात करने पर घटना के सम्बंध में बताया कि उस समय 2000 में पूर्णिया के जीरो माइल के समीप देवेन्द्र चौधरी से अज्ञात व्यक्ति ने मारपीट की। मारपीट के दौरान उन्हें चाकू मारकर घायल कर दिया था। जिसके बाद वह सड़क किनारे गिरा पड़े। इस दौरान रास्ते से गुजर रहे एक ट्रक चालक की नजर घायल हालात में उन पर पड़ी। ट्रक चालक ने घायल देवेन्द्र चौधरी को पास के एक जगह पर उपचार कराया। मारपीट के कारण देवेन्द्र चौधरी की याददाश्त चली गया। इस दौरान ट्रक चालक देवेन्द्र चौधरी को अपने साथ गाजियाबाद लेकर चला गया। वहां बस स्टैंड के समीप एक लाइन होटल में रखवा कर ट्रक चालक चला गया। इस बीच उस ट्रक चालक ने कुछ ट्रक चालक के मदद से इलाज में भी मदद की। चर्च के पादरी ने भी इलाज में बहुत मदद की। लगभग 22 साल के बाद अचानक उनकी याददाश्त वापस आई। तब पादरी की मदद से अपने परिवार से मिल सके।

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