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  • 10 Lakhs Were Withdrawn On The Pretext Of Updating KYC, The Accused Company Had Demanded Cancellation Of FIR, The Court Said Right Of Discussion Is An Out of court Subject

फ्रॉड मामले में कंपनी को इलाबाद हाईकोर्ट से झटका:KYC अपडेट करने के बहाने निकाल लिए गए थे 10 लाख रुपये, आरोपी कंपनी ने की थी FIR रद्द करने की मांग, कोर्ट ने कहा- विवेचना का अधिकार कोर्ट के बाहर का विषय

प्रयागराज22 दिन पहले
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फाइल फोटो- इलाहाबाद हाईकोर्ट - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को केवाईसी अपडेट करने के बहाने किए गए बैंक फ्रॉड में भागीदार कंपनी इसरव्यू टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कानपुर नगर के खिलाफ किदवई नगर थाने में दर्ज FIR को रद्द करने से मना कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि उसका क्षेत्राधिकार FIR रद्द करने तक ही सीमित है। तथ्यों पर निष्कर्ष निकालने का क्षेत्राधिकार विवेचना अधिकारी का है। कंपनी पर जो भी आरोप लगाए गए हैं और बेहद संगीन है। इसलिए इस पर बिना विवेचना के कोर्ट किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

डबल बेंच ने कानपुर की कम्पनी की याचिका खारिज की
न्यायमूर्ति बच्चू लाल और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की डबल बेंच ने एफआईआर की वैधता की चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि केवाईसी अपडेट करने के बहाने जो भी फ्रॉड किया गया है, उसमें कंपनी का कोई रोल नहीं है। उसका बैंक खाता सीज न किया जाए और प्रबंधन व कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी जाए।

पेटीएम अपडेट करने के लिए KYC के बहाने लगाई गई लाखों की चपत
4 जनवरी 2020 को शिकायतकर्ता को फोन आया और पेटीएम अपडेट के लिए केवाईसी मांगा तथा क्यूएसएफ को टीम वे -ईवेरैप पर अपलोड करने को कहा। इसके बाद पेटीएम में एक रुपया आया। फिर ओटीपी आया और 10लाख4 रुपये 90पैसे डेविट हो गया। फिर कई किश्तों में शिकायतकर्ता,उसकी पत्नी,बेटों के खाते से पैसे निकाल लिए गए।

यह पैसे सद्दाम हुसैन के खाते में जमा हुए। उसने मेसर्स सिस्टेमेटिक सर्विसेज प्रा लि कंपनी को ट्रांसफर कर दिया। फिर याची के खाते में जमा कर दिया। याची का कहना था कि उसने कोई अपराध किया ही नहीं। सरकारी वकील का कहना था कि इसमें याची कंपनी की मुख्य भूमिका है। लिहाजा याची कंपनी पर किसी भी प्रकार की नरमी ठीक नहीं है। जब तक की विवेचना पूर्ण न हो जाए।

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