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68,500 सहायक अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का दिया निर्देश

प्रयागराज12 दिन पहले
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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का दिया निर्देश

प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती में एमआरसी अभ्यर्थियों के मामले में एकल पीठ के निर्णय पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद से दो माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।

दो माह में पसंद का जिला आवंटित कर नियुक्ति देने का आदेश

कोर्ट ने कहा है कि मेरिट में ऊपर होने के कारण सामान्य वर्ग में चयनित आरक्षित श्रेणी के मेधावी अभ्यर्थियों (एमआरसी) को दो माह में उनकी प्राथमिकता का जिला आवंटित किया जाए। सामान्य श्रेणी के उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थियों को भी उनकी पसंद के तीन प्राथमिकता वाले जिलों में किसी एक में पद रिक्त होने पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।

यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस एमएन भंडारी व जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने अमित शेखर भारद्वाज सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया है। हालांकि, खंडपीठ ने यह भी कहा है कि निर्णय को नजीर नहीं माना जाएगा।

कम मेरिट वालों को दे दिया प्राथमिकता का जिला

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा व अशोक खरे सहित कई वकीलों ने बहस की। इसमें एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया था कि बोर्ड ने रिक्तियों की संख्या 68,500 से घटाकर 41,556 कर दी। चयनित अभ्यर्थियों की दो चरणों में काउंसलिंग कराई गई। पहले चरण में 35,420 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग हुई, जबकि दूसरे चरण में 6,136 की। आरोप है कि दूसरी काउंसिलिंग की मेरिट में नीचे रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले आवंटित कर दिए गए। विडंबना यह है कि पहली काउंसलिंग में शामिल अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाला जिला नहीं दिया गया। कोर्ट ने इस रवैये को भेदभावपूर्ण माना है।

विज्ञापित पदों को घटा नहीं सकता बोर्ड

अधिवक्ताओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया एक ही होने पर बोर्ड विज्ञापित पदों को घटा नहीं सकता। चयन प्रक्रिया को दो हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता। बोर्ड ने मनमाने तरीके से शासनादेश के विपरीत जिलावार रिक्तियों की संख्या घटा दी। एस्पिरेशन वाले जिलों फतेहपुर, चंदौली, सोनभद्र, सिद्धार्थनगर, चित्रकूट धाम, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती में रिक्तियों की संख्या बढ़ा दी। हालांकि पद खाली रह गए। दूसरी काउंसलिंग में शामिल अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले आवंटित कर दिए गए।

एकल पीठ ने मेरिट में ऊपर होने के कारण सामान्य वर्ग में चयनित ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का मानकर प्राथमिकता वाले जिले आवंटित करने का निर्देश दिया था। इसके विरुद्ध अपील करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना था कि यह भेदभावपूर्ण है। यदि आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में चयनित कर लिया गया है और उन्हें प्राथमिकता वाला जिला आवंटित किया जा रहा है तो सामान्य वर्ग में उनसे मेरिट में ऊपर अभ्यर्थियों को भी प्राथमिकता वाला जिला पाने का अधिकार है।

बोर्ड को देना होगा प्रत्यावेदन

सुनवाई के बाद खंडपीठ ने पक्षकारों की आपसी सहमति के आधार पर निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि चयनित अभ्यर्थी पहले से नियुक्ति पा चुके हैं चाहे वह किसी भी वर्ग के हैं और काम कर रहे हैं, उन्हें उन्हीं स्थानों पर काम करने दिया जाए। कोर्ट ने एमआरसी अभ्यर्थियों के संबंध में एकल पीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिका करने वाले जिन एमआरसी अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले नहीं आवंटित किए गए हैं, वह दो माह में बोर्ड को प्रत्यावेदन देंगे और बोर्ड एकल पीठ के फैसले के अनुसार उन्हें उनकी पसंद के जिले में दो माह में नियुक्ति देगा।

आदेश अपील में शामिल लोगों पर ही होगा लागू

खंडपीठ ने यह भी कहा कि आदेश सिर्फ अपील में शामिल उन अभ्यर्थियों पर ही लागू होगा, जिनकी याचिकाएं एकल पीठ द्वारा स्वीकार की गईं। इसी प्रकार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी अपनी पसंद के तीन जिलों का विकल्प बोर्ड को देंगे। बोर्ड उन्हें किसी एक जिले में पद रिक्त होने की दशा में नियुक्ति देगा।

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