बकस्वाहा जंगल खातिर 800 किमी. की साइकिल यात्रा:2.80 लाख पेड़ों की शहादत रोकने की मुहिम लेकर निकले बिहार के दो छोरे पहुंचे प्रयागराज

प्रयागराज6 महीने पहले
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प्रयागराज के संगम पहुंचा बिहार से साइकिल से छतरपुर जाने के लिए निकला बीएचयू छात्र सिद्धार्थ झां - Dainik Bhaskar
प्रयागराज के संगम पहुंचा बिहार से साइकिल से छतरपुर जाने के लिए निकला बीएचयू छात्र सिद्धार्थ झां

मध्य प्रदेश के छतरपुर जनपद के बकस्वाहा जंगल में हीरे की खोज के लिए 2.80 लाख पेड़ों की शहादत को बचाने के लिए बनारस हिंदु विश्वविद्यालय के एग्रोफारेस्ट्री से एमए फाइनल ईयर के एक स्टूडेंट ने अनोखा अभियान छेड़ा है। यह युवा अपने एक साथी के साथ बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सात दिन पहले साईकिल यात्रा शुरू की है। जो बिहार के विभिन्न जनपदों से होते हुए शनिवार को दोपहर में प्रयागराज पहुंची। यहां संगम पर तीर्थपुरोहितों ने दोनों पपर्यावरण प्रेमियाें का स्वागत किया और मांग गंगा के आशीर्वाद के साथ आगे की यात्रा शुरू कराई।

एक बीएचयू से एमए फाइनल ईयर का है छात्र, दूसरे की कंप्लीट हो चुकी है बीएससी

बिहार प्रांत के मुजफ्फरपुर जिले के ढोली बाजार निवासी सिद्धार्थ झां के पिता वहीं पर कृषि विभाग में कार्यरत हैं। सिद्धार्थ झां बनारस हिंदु विश्वविद्यालय वाराणसी से एमए सेकेंड ईयर के छात्र हैं। सिद्धार्थ झां ने 24 जुलाई से अपने कस्बे ढोली बाजार से अपने साथी राजीव कुमार के साथ साइकिल यात्रा पर निकल पड़े हैं। वह बिहार के आरा, बक्सर, पटना, वाराणसी, मिर्जापुर से होते हुए 31 जुलाई को प्रयागराज पहुंचे।

माला पहनाते तीर्थ पुरोहित
माला पहनाते तीर्थ पुरोहित

संगम में तीर्थ पुरोहितों ने किया भव्य स्वागत, आगे के लिए किया विदा

यहां संगम तट पर उनका स्वागत तीर्थ पुरोहित पं. राजेंद्र पालीवाल ने माला पहनाकर व तिलक लगाकर किया। उनके साथ प्रदीप पांडेय, हरिशंकर तिवारी, चंकी तिवारी, विपिन, उत्सव पाठक, प्रवीण केशरवानी, आनंद निषाद, राजेश तिवारी, दिनेश तिवारी आदि ने भी दोनों पर्यावरण प्रेमियों का स्वागत किया और उनकी इस नेक मुहिम की बधाई दी। साथ में मां गंगा से उनके अभियान को सफल बनाने की प्रार्थना की। प्रयागराज से दोनों युवा चित्रकूट के लिए रवाना हो गए। वहां से बादां और फिर छतरपुर जाकर धरना प्रदर्शन करेंगे ।

कोविड 19 काल में आक्सीजन की कमी को देखकर परेशान हैं दोनों युवा

दोनों युवाओं सिद्धार्थ झा व राजीव कुमार ने बताया कि जब इस काेविड 19 काल में बडे़-बड़े लोग आक्सीजन के अभाव में जिंदगी की जंग हार जा रहे हैं, ऐसे में 2.80 लाख पेड़ों को सिर्फ हीरे के लिए काटना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। इसे रोका जाना चाहिए। क्योकि इस जंगल में चार सौ प्रकार की चिडि़या, पांच प्रकार के सांप व अन्य जीव जंतु रहते हैं। इसीलिए ये साइकिल यात्रा शुरू की है। सिद्धार्थ झां का दावा है कि अब तक उनके साथ पांच हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। वह पूरे रास्ते लोगों को जागरुक करते आ रहे हैं। साथ ही साइकिल चलाकर फिट रहने की भी प्रेरणा दे रहे हैं। सिद्धार्थ ने बताया कि वह अपने पिता की चोरी में घर से निकला है। उसकी एडवोकेट बहन ज्योति झां को उसकी इस यात्रा के बारे में पता है।

संगम तट पर बिहार के दोनों लड़कों का किया गया स्वागत
संगम तट पर बिहार के दोनों लड़कों का किया गया स्वागत

364 एकड़ के जंगल काे साफ करने की है सरकार की योजना

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का बकस्वाहा जंगल में करोड़ों के हीरे दबे होने की जानकारी मिली है। जिसके खनन के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक कंपनी को परमीशन दे दी है। करीब ढाई हजार करोड़ रुपए की इस परियोजना की जद में 364 एकड़ जमीन पर लगी हरियाली काटी जानी है। जिसमें महुआ, तेंदू और सागौन समेत अन्य करीब 2.80 लाख पेड़ काटे जाने हैं। इस स्थान पर 3.4 करोड़ कैरेट का हीरा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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