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UPPSC परीक्षा में बड़ी धांधली का खुलासा:एक रोल नंबर की दो कापियां जमा हुई, जांच में पर्यवेक्षक-कक्ष निरीक्षक और अभ्यर्थी की मिलीभगत मिली; परीक्षार्थी व सेंटर आजीवन डिबार

प्रयागराज2 महीने पहले
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परीक्षा केंद्र, पर्यवेक्षक, कक्ष में ड्यूटी करने वाले और संबंधित अभ्यर्थी सभी के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है। - Dainik Bhaskar
परीक्षा केंद्र, पर्यवेक्षक, कक्ष में ड्यूटी करने वाले और संबंधित अभ्यर्थी सभी के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सम्मिलित राज्य अवर अभियंतण सेवा की परीक्षा में बड़ी धांधली सामने आई है। 13 दिसंबर 2020 को हुई लिखित परीक्षा में एक अभ्यर्थी ने एक ही रोल नंबर की दो-दो कॉपियां जमा कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने परीक्षा केंद्र, पर्यवेक्षक, कक्ष में ड्यूटी करने वाले और संबंधित अभ्यर्थी को आयोग की सभी परीक्षाओं से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है। सभी के खिलाफ रिपोर्ट भी लिखाई गई है।

बाबू जेआरडी पाल इंटर कॉलेज में पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
लोक सेवा आयोग ने प्रयागराज के मनसैता में स्थित बाबू जेआरडी पाल इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया था। परीक्षा के बाद जब पर्यवेक्षक ने द्वितीय सत्र की कॉपियां जमा कराई तो सील्ड पैकेट में एक ही रोल नम्बर की दो कापियां पाई गई। यह देख आयोग के कर्मचारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आयोग ने खुद इस मामले में जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी ने इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में पाया गया कि इसमें सेंटर, पर्यवेक्षक, कक्ष निरीक्षक व अभ्यर्थी की मिलीभगत है और सभी प्रथमदृष्टया दोषी हैं। इसके बाद सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

परीक्षा की शुचिता को तार-तार किया
जांच रिपोर्ट में आयोग ने माना है कि केंद्र ने परीक्षा की शुचिता को भंग किया है और अभ्यर्थियों का विश्वास तोड़ा है। इसको देखते हुए आयोग ने निर्णय लिया है कि बाबू जेआरडी पाल इंटर कॉलेज को अब कभी भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। इस परीक्षा में ड्यूटी करने वाले केंद्र अधीक्षक, निरीक्षक, प्रबंधक को भी भविष्य में आयोग की सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यही नहीं सभी आयोग-भर्ती बोर्डों को भी इस केंद्र व निरीक्षकों को प्रतिबंधित करने के लिए पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है।

समाप्त होगी कालेज की मान्यता
लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि बाबू जेआरडी पाल इंटर कॉलेज की मान्यता खत्म करने व संबंधित पदाधिकारियों को अन्य किसी भी विद्यालय में कोई पद न दिए जाने के लिए शासन को जल्द लिखा जाएगा। इस कठोर निर्णय का उद्देश्य नजीर बनाना है ताकि समाज में एक संदेश जाए और परीक्षा की शुचिता बरकरार रहे।

सहायक अभियंता के 648 पदों पर होनी थी भर्ती
लोक सेवा आयोग की सम्मिलित राज्य अवर अभियंतण सेवा (सामान्य/विशेष चयन) परीक्षा-2019 की परीक्षा 13 दिसंबर 2020 को प्रदेश के पांच जनपदों के 292 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी। इसका अंतिम परिणाम 26 मार्च 2021 को घोषित किया गया था। इसके चयन की संस्तुति 25 जून 2021 को शासन को भेज दी गई थी। इस वैकेंसी में 580 पदों पर चयन हुआ, 68 पद उपयुक्त कैंडिडेट न मिल पाने के कारण खाली रह गए थे।

प्रतियोगी संघर्ष समिति ने की सीबीआई जांच की मांग
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने इसके पीछे किसी बड़े रैकेट की आशंका जताई है और मांग की है कि इस कृत्य में शामिल आयोग के अंदर बैठे सभी लोगों का नाम सार्वजनिक किया जाए और उनके ऊपर एफआईआर दर्ज की जाए। समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि इसमें आयोग के कर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। क्योंकि यह मात्र एक मामला पकड़ में आया है, ऐसे कई और भी सेंटर्स हैं, जहां मिलीभगत से अयोग्य अभ्यर्थियों का चयन कराया जाता है। अगर सीबीआई की जांच कराई जाए तो ऐसे अनेक मामले सामने आ सकते हैं। समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने पूछा है कि आखिर दो कॉपी की मंशा क्या थी? क्यों दो कापी लिखी गई?

सवालों के घेरे में लोक सेवा आयोग के कर्मचारी
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने कहा कि इस भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण लोकसेवा आयोग के वो कर्मचारी हैं, जिनके खिलाफ आयोग के अध्यक्ष द्वारा सीबीआई को नामजद अभियोग दर्ज करने की अनुमति नहीं दी गई। जब तक लोकसेवा आयोग की CBI जांच पारदर्शी तरीके से नहीं कराया जाएगा। तब तक लोकसेवा आयोग भ्रष्टाचार का अड्डा बना रहेगा। आज भी लोकसेवा आयोग में भ्रष्टाचार करने वाले अनेक कर्मचारी /अधिकारी जमे हुए हैं और उन्हीं की मिलीभगत से आयोग में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

सिविल जज की अंतिम सूची से अभ्यर्थी अतुल कुमार नायक बाहर
लोक सेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज जूडिशियल परीक्षा 2018 के आधार पर चयनित अभ्यर्थी अतुल कुमार को बाहर कर दिया है। उनकी जगह श्रेष्ठता सूची में से अनुसूचित जनजाति के कैंडिडेट चंदन सिंह को नियुक्ति दे दी गई है। आयोग के सचिव जगदीश द्वारा अपनी प्रेस विज्ञप्ति में इसका कारण नहीं बताया है कि ऐसा आयोग को क्यों करना पड़ा।