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जेवर पहनकर निकलने वाली महिलाओं में खौफ बैठा:स्नैचिंग के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी, कहा- महिलाएं अब घर से बाहर निकलने से भी डरती हैं; इसे रोकने के लिए सख्ती जरूरी

प्रयागराज3 महीने पहले
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याची के वकील का कहना था कि ज्यादातर मुकदमों में उसकी जमानत मंजूर हो गई है। पुलिस ने फर्जी बरामदगी दिखाकर याची को फंसाया है। - Dainik Bhaskar
याची के वकील का कहना था कि ज्यादातर मुकदमों में उसकी जमानत मंजूर हो गई है। पुलिस ने फर्जी बरामदगी दिखाकर याची को फंसाया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक चेन स्नैचर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, 'चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं से महिलाओं के अंदर इतना डर भर गया है कि वह जेवरात पहनकर घर से बाहर निकलने में डरती हैं, जो बेहद चिंता का विषय है।

बार-बार ऐसी घटनाओं के कारण ही महिलाओं में भय व्याप्त है। इसे गंभीरता से लेने और चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की जरूरत है, ताकि महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें'। कानपुर में चैन स्नेचिंग के आरोपी अमित कुमार की जमानत अर्जी खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यह टिप्पणी की।

10 माह पहले कानपुर की महिला ने दर्ज कराई थी FIR
कानपुर जनपद के पनकी थाना क्षेत्र की रहने वाली पुष्पा देवी ने पनकी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि 4 अक्टूबर 2020 को वह अपनी बेटी और बहू के साथ बाजार गई थीं। ऑटो रिक्शा पर बैठकर जब वह तीनों बाजार की ओर जा रही थी, तभी बाइक से आए दो अज्ञात बदमाशों ने उनकी बहू के गले से सोने की चेन खींच ली थी। 21 अक्टूबर 2020 को पनकी पुलिस ने अमित और कुंदन नाम के दो बदमाशों को चेन स्नैचिंग के मामले में गिरफ्तार किया था।

दोनों के पास से दो-दो सोने की चेन, तमंचा और कारतूस बरामद हुए थे। इसके अलावा चोरी की बाइक एवं नकदी रुपए भी मिले थे। आरोपी अमित कुमार ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

चेन स्नैचर पर 17 मामले दर्ज, दाखिल की थी जमानत याचिका
याची के खिलाफ लूट और चुनौती के 17 मुकदमों का आपराधिक रिकॉर्ड है। याची के वकील का कहना था कि ज्यादातर मुकदमों में उसकी जमानत मंजूर हो गई है। पुलिस ने फर्जी बरामदगी दिखाकर याची को फंसाया है। सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए उसका आपराधिक रिकार्ड पेश किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त के अधिकार अपनी जगह हैं, मगर इस प्रकार के अपराधियों को जमानत पर छोड़ा नहीं जा सकता। स्पष्ट है कि उसने जमानत का दुरुपयोग करते हुए बार-बार अपराध किए हैं। इससे इस बात को बल मिलता है कि जमानत मिलने के बाद फिर से वह उसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त हो जाएगा।

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