धर्मांतरण का आरोपी मौलाना मीडिया से डरा:इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा मौलाना उमर गौतम, बोला- मेरा मीडिया ट्रायल हो रहा; जज बोले- मीडिया को रिपोर्टिंग का अधिकार

प्रयागराजएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इस याचिका में मीडिया पर धर्म परिवर्तन मामले में गलत रिपोर्टिंग करने और समय से पहले बयान देने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। - Dainik Bhaskar
इस याचिका में मीडिया पर धर्म परिवर्तन मामले में गलत रिपोर्टिंग करने और समय से पहले बयान देने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

धर्मांतरण मामले का मुख्य आरोपी मौलाना उमर गौतम मीडिया से खौफ में है। मीडिया रिपोर्टिंग को बंद कराने के लिए उमर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उमर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसका मीडिया ट्रायल हो रहा है। मीडिया पर गलत रिपोर्टिंग का भी आरोप लगाया। इस पर जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विकास श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मौलाना के वकील से पूछा-क्या आपने जस्टिस चंद्रचूड़ का फैसला पढ़ा है? इसके बाद एडवोकेट चुप हो गए। फिर कोर्ट ने कहा कि मीडिया को रिपोर्टिंग का अधिकार है।

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
हाईकोर्ट ने उमर गौतम की दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में मीडिया पर धर्म परिवर्तन मामले में गलत रिपोर्टिंग करने और समय से पहले बयान देने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
उमर गौतम, जिन्होंने खुद हिंदू धर्म से इस्लाम धर्म अपना लिया है पर यूपी में 1,000 लोगों का धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया गया है। यही नहीं कथित तौर पर उनमें से कई की शादी मुसलमानों से करा दी गई है। उन्हें पिछले महीने यूपी पुलिस के आतंकवाद-रोधी दस्ते (ATS) ने शादी, नौकरी और पैसे और मानसिक दबाव देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

मीडिया ट्रायल रोकने की मांग खारिज
इसके बाद धर्मांतरण से संबंधित मीडिया ट्रायल के खिलाफ उमर गौतम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण ली थी। धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामले पर मीडिया हाउसेज द्वारा गलत और विवादास्पद रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया था और इस पर रोक की मांग की गई थी।

समाचार कार्यक्रमों के प्रसारण पर रोक की मांग
उमर गौतम पर विभिन्न धाराओं में उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 के तहत लगभग 1000 व्यक्तियों के बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन का आरोप है। धर्म परिवर्तन के लिए मूक-बधिर छात्र, महिलाएं, बच्चे और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया गया था। उमर गौतम ने कोर्ट के सामने खुद को एक इस्लामिक विद्वान और एक धार्मिक उपदेशक बताते हुए उन्हें फर्जी मामले में फंसाने का आरोप लगाया है। उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविजन कार्यक्रमों के प्रसारण पर रोक की मांग की है। उनका तर्क है कि उसके खिलाफ चल रही आपराधिक जांच के संबंध में मीडिया संवेदनशील और गोपनीय जानकारी लीक कर रहा है। इससे जांच प्रभावित हो रही है।

उमर ने कहा- मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया
उनका कहना है कि कई मीडिया हाउस ने उनके बयान को गलत तरीके से प्रकाशित किया है। इसके पीछे गहरी साजिश है। इसका उद्देश्य मेरे ऊपर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच को प्रभावित करना है। मीडिया का यह आचरण पूर्वाग्रह से ग्रसित है। उमर गौतम का कहना है कि यूपी पुलिस ने भी प्रेस ब्रीफिंग में कई ऐसे गोपनीय तथ्यों को मीडिया के सामने रखे जिनके उजागर होने से जांच प्रभावित हो सकती है। ऐसे में याची को अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने और बेगुनाही साबित करने के प्रयासों को झटका लगा है।

मैग्जीन ने की मनगढ़ंत रिपोर्टिंग
उन्होंने कहा कि एक मैग्जीन ने उनके बयानों के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया, जो तथ्य से परे है। यह अपने मन से की गई मनगढ़ंत रिपोर्टिंग है। इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है। इस लेख के माध्यम से याचिकाकर्ता के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित जांच और परीक्षण के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। ये रिपोर्ट्स पुलिस के बयान के आधार पर उस समय प्रकाशित की गईं, जबकि याची पुलिस कस्टडी में है।

सरकार के इशारे पर साजिश के तहत मीडिया ट्रायल
इससे साफ होता है कि याची के खिलाफ सरकार के इशारे पर जांच एजेंसियों ने साजिश के तहत मीडिया ट्रायल करवाए हैं। इस तरह से किया गया मीडिया ट्रायल गैर कानूनी है। इसपर रोक लगनी चाहिए।
उमर गौतम ने कोर्ट से यह मांग की कि सरकार और पुलिस को यह निर्देश दिया जाए कि जांच पूरी होने तक मीडिया ट्रायल पर रोक लगाई जाए। जांच से जुड़े तथ्यों को उजागर न किया जाए। इसके अलावा 20 जून 2021 की प्रेस रिलीज के आधार पर रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को वापस लिया जाए।
इसके अलावा उमर ने मीडिया संस्थानों द्वारा लीक की गई संवेदनशील व गोपनीय जानकारी को अपने माध्यमों से हटाने की भी मांग की।

खबरें और भी हैं...