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CBI करेगी वकीलों के खिलाफ झूठे केस की जांच:इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो माह में मांगी 51 आपराधिक मामलों में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट

प्रयागराज3 महीने पहले
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अधिवक्ताओं के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज 51 आपराधिक मामलों की जांच अब सीबीआई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों के खिलाफ दुराचार के झूठे केस की वापसी के नाम पर धन उगाही करने के मामले को गंभीरता से लिया है। प्रयागराज के मऊआइमा सहित विभिन्न थानों में दर्ज 46 केसों की सीबीआई जांच कराने का निर्देश दिया है।

जांच रिपोर्ट आने तक वकीलों की गिरफ्तारी पर रोक
कोर्ट ने सीबीआई को दो माह में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश‌ करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी। हाई कोर्ट ने प्रारंभिक रिपोर्ट आने तक दुराचार के आरोपी वकीलों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस गौतम चौधरी ने निक्की देवी की याचिका पर दिया है। इसमें सत्र अदालत में दुराचार के आरोप चल रहे आपराधिक केस की जल्द सुनवाई पूरी करने का समादेश‌ जारी करने की मांग की गई थी।

आरोपी अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय के खिलाफ दारागंज थाने में दुराचार का केस दर्ज है। इनका कहना था कि हाईकोर्ट के वकीलों का एक गैंग हाईकोर्ट में सक्रिय है, जो झूठे केस कर चार्जशीट दाखिल होने के बाद केस वापसी के नाम पर अभियुक्तों से धन की उगाही करता है। इसके बाद धन का आपस में बंटवारा कर लेता है। पीड़िता के अनुसूचित जाति का होने के कारण सरकार से भी धन मिलता है। इस मामले में आरोप निर्मित हो चुका है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता निक्की देवी को तलब भी किया था।

अकेले मऊआईमा थाने में दर्ज हैं 21 केस
आरोपी अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय ने कोर्ट को 51 आपराधिक केसों की सूची दी। इसमें से अकेले मऊआइमा थाने में 36 केस दर्ज हुए हैं। अधिवक्ता आशीष मिश्रा के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। अभियुक्त वकीलों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम वीपी श्रीवास्तव, गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी, राधाकांत ओझा, अमरेंद्र नाथ सिंह, बार के महासचिव एसडीएस जादौन ने बचाव किया।

कोर्ट ने कहा न्याय कि रक्षा के लिए अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग जरूरी है। वकीलों पर झूठे केस की सीबीआई को जांच सौंपा जाना जरूरी है। कोर्ट ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश और संजय कुमार सिंह को सील कवर लिफाफे में दो माह में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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