• Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Prayagraj
  • Allahabad High Court's Advice To The Officers Of Income Tax Department, Instructions To Act In Future Keeping In View The Judicial Discipline And Propriety, Section 148 Has Been Treated As Out Of Notice.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी खबरें:आयकर विभाग के अफसरों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की नसीहत, भविष्य में न्यायिक अनुशासन व प्रोपराइटी को ध्यान में रखते हुए कार्य करने के निर्देश,

प्रयागराज9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के अधिकारियों को भविष्य में न्यायिक अनुशासन एवं प्रोपराइटी को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा कि आदेश के खिलाफ अपील दाखिल होने मात्र से आदेश की अवहेलना करने की छूट नहीं मिल जाती। अपील करने से आदेश न मानने का आधार नहीं मिल जाता, बशर्ते स्थगनादेश पारित न हुआ हो। कोर्ट ने कहा अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट के आदेश पूरे देश में बाध्यकारी होते हैं। उसी तरह अनुच्छेद 226 व 227 के आदेश प्रदेश में बाध्यकारी प्रभाव रखते हैं। कोर्ट ने आयकर विभाग के अपर आयुक्त द्वारा बिना शर्त माफी मांगने पर अवमानना कार्यवाही नहीं की और भविष्य में सावधानी बरतने की नसीहत दी है। कोर्ट ने मियाद बीत जाने के बाद धारा 148 की नोटिस व वसूली कार्रवाई आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया है।

आयकर विभाग ने जमा किए 5 हजार हर्जाना

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने मोहन लाल संतवानी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर भारत सरकार के अधिवक्ता अरविंद गोस्वामी व आयकर विभाग के अधिवक्ता गौरव महाजन ने पक्ष रखा। कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर जवाब न दाखिल करने पर पूर्व में लगाया गया पांच हजार रुपए हर्जाना आयकर विभाग द्वारा जमा किया गया और संक्षिप्त हलफनामा भी दाखिल किया गया। कोर्ट ने महानिबंधक को इस आदेश को आयकर विभाग में भेजने का निर्देश दिया है।

मथुरा के DM नवनीत चहल को राहत

जिलाधिकारी ने अर्जी देकर गलती सुधारी। याची को सभी परिलाभ दिये जाने का आदेश जारी कर हलफनामा दाखिल किया और कहा कोर्ट आदेश का उल्लघंन करने का कोई इरादा नहीं था। भ्रमवश आदेश दिया था, जिसे वापस लेकर नया आदेश जारी कर दिया गया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी को 12 मई को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि सारे भुगतान नहीं किये गए तो कोर्ट उनके खिलाफ अवमानना आरोप निर्मित कर कार्यवाही करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने बृजमोहन शर्मा की अवमानना याचिका पर दाखिल अर्जी को निस्तारित करते हुए दिया है। इससे पहले कोर्ट ने नवनीत चहल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर पुलिस अभिरक्षा में उन्हें 12 मई को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह आदेश जिलाधिकारी द्वारा कोर्ट आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने और कोर्ट आदेश के विपरीत अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर अपील सुनने जैसा आदेश पारित करने पर दिया था।

कोर्ट ने कहा, गलती मानने पर दी गई राहत

कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट की गरिमा एवं मर्यादा कायम रखने और न्याय व्यवस्था पर जन विश्वास बनाए रखने के लिए कोर्ट आंख बंद किए नहीं रह सकती। कोर्ट ने कहा जिलाधिकारी से उम्मीद की जाती है कि उसे इस कानून की बेसिक जानकारी होगी कि आदेश पर रोक नहीं है तो वह लागू रहेगा और प्राधिकारी को उसका पालन करना बाध्यकारी होगा। इसके बावजूद जिलाधिकारी ने कोर्ट की अवज्ञा की । जिलाधिकारी ने याची को नियमित किये जाने से पहले की सेवा को क्वालीफाइंग सेवा नहीं माना था और कहा था वह पेंशन पाने का हकदार नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया था और 1996 से याची को सेवा में मानते हुए पेंशन निर्धारित करने का आदेश दिया था। जिलाधिकारी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर कहा कि कोर्ट आदेश की पुनर्विचार अर्जी दी गई है। उसके तय होने तक याची पेंशन पाने का हकदार नहीं हैं। जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और कहा कि जिलाधिकारी ने कोर्ट आदेश के खिलाफ अपील अधिकारी बन आदेश देकर कोर्ट की अवज्ञा की है। कोर्ट ने आश्चर्य प्रकट किया था कि स्पष्ट आदेश के बावजूद जिलाधिकारी ऐसा आदेश दे रहा है। गिरफ्तारी वारंट जारी कर पेश करने का निर्देश दिया था। गलती मानने के कारण कोर्ट ने राहत दे दी है।याचिका की सुनवाई 12मई को होगी।

खबरें और भी हैं...