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एयू में फीस वृद्धि का विरोध शुरू:SFI ने विवि प्रशासन को फीस वृद्धि पर चेताया, कहा-यह छात्रों के जले पर नमक छिड़कने जैसा, प्रदर्शन की चेतावनी

प्रयागराज3 महीने पहले
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि का विरोध शुरू कर दिया गया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) की इलाहाबाद जिला कमेटी की ओर से फीस वृद्धि के फैसले की आलोचना की गई है। छात्र संगठन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि दो साल कोविड काल के बाद फीस वृद्धि का फैसला छात्रों के जले पर नमक छिड़कने जैसा है। फीस वृद्धि वापस न हुई तो तीखा विरोध होगा।

2 से 3 हजार रुपये प्रति कोर्स बढ़ गई है फीस

एसएफआई की जिला कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि शनिवार 25 जून को कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बीए, बीएससी, एमए, एम्एससी, एलएलबी, बीटेक, आदि पाठ्यक्रमों की फीस 2 से 3 हजार तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यही नहीं छात्रावासों की भी फीस बढ़ा दी गई है। यह निर्णय बेहद असंवेदनशील और छात्र विरोधी है। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का एक बहुत बड़ा तबका ग्रामीण, मध्यम एवं निम्नवर्गीय छात्र-छात्राओं का है। ये छात्र-छात्राएं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे बीमारू राज्यों से आते हैं। फीस वृद्धि से इन छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय को "आत्मनिर्भर" बनाने और बेहतर सुविधाएं देने का हवाला देकर गरीब छात्र-छात्राओं से पैसे की वसूली कर रहा है। यह उचित नहीं है।

पहले ही दो गुनी हो चुकी है छात्रावास की फीस

आगे कहा गया है कि छात्रावासों की फीस पिछले सात-आठ सालों में पहले से ही दोगुनी हो चुकी है। उस के ऊपर मेस के नाम पर अतिरिक्त खर्च बढ़ाकर इसे आम छात्रों से लगभग-लगभग छीन लिया गया है। फिर से की गई फीस वृद्धि ने इस स्थिति को और खराब कर जले पर नमक छिड़कने का ही काम किया है।

एसएफआई की जिला कमेटी इसे शिक्षा और छात्र विरोधी नई शिक्षा नीति के दुष्परिणामों के रूप में देखती है। विश्वविद्यालय की बढ़ी हुई यह फीस केन्द्र सरकार की शिक्षा विरोधी और जन विरोधी नीतियों में विश्वविद्यालय प्रशासन की मिली भगत का ही परिणाम है।

इसके साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक और फरमान ज़ारी किया है कि मीडिया तथा सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले विद्यार्थियों और छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कदम उसकी तानाशाही का प्रतीक है।

अतः एसएफआई की जिला कमेटी इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए इस कदम को बेहद असंवेदनशील तथा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला मानती है। यदि विश्वविद्यालय फीस वृद्धि वापस नहीं लेती है तो बड़ा आंदोलन को छात्र मजबूर होंगे।

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