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इलाहाबाद HC में 21 जून से फिजिकल फाइलिंग:मुकदमों की फिजिकल फाइलिंग से फरियादियों-वकीलों का काम होगा आसान; कोरोनाकाल में 3 लाख मुकदमों का बैकलॉग बना टेंशन

​​​​​​​प्रयागराजएक महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं और वादकारियों को शुक्रवार को बड़ी राहत दे दी है। अब सोमवार से हाईकोर्ट में मुकदमों की फिजिकल फाइिलंग की सुविधा दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने अभी तक फिजिकल सुनवाई का आदेश नहीं जारी किया है। अभी तक मुकदमों की ई-फाइलिंग हो रही थी। इसमें काफी परेशानी आ रही थी। लेकिन अब कोरोना महामारी में बंदी के बाद 70वें दिन कोर्ट सोमवार से फिर खुल जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल आशीष कुमार श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को जारी पत्र में कहा है कि मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर सोमवार से मुकदमों की फिजिकल फाइलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया है। अब अधिवक्ताओं को मुकदमों की ई-फाइलिंग नहीं करनी होगी।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस बारे में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फिजिकल हियरिंग और फाइलिंग की मांग की थी। कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी इस आशय की मांग की थी। सीनियर एडवोकेट विजय चंद्र श्रीवास्तव ने भी इस मामले को लेकर ई कमेटी के चेयरमैन डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा था और फिजिकल हियरिंग व मुकदमों की फिजिकल दाखिले की मांग की थी।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्रवण त्रिपाठी कहते हैं कि ऑनलाइन फाइलिंग और ऑनलाइन फिजिकल हियरिंग को लेकर बहुत समस्याएं आ रही थीं। पहली बात हर वकील के पास घर पर सारी सुविधाएं नहीं हैं। सबके पास कंप्यूटर, स्कैनर और वाईफाई नहीं है। ऐसे में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा था। कई बार ऑनलाइन सुनवाई के दौरान नेट स्लो हो जा रहा था। कम से कम फिजिकल फाइलिंग से पेपर वर्क करना आसान हो जाएगा। हाईकोर्ट में ही 3 लाख मुकदमों का बैकलॉग बन गया है।

खुली अदालत की मांग ने भी जोर पकड़ा, अभी केवल 16 न्यायपीठों में सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश के इस आदेश के बाद अब अधिवक्ता खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट में इस समय 56 में से केवल 16 न्यायपीठें केवल अतिआवश्यक मुकद्दमों की ही सुनवाई कर रही हैं। भारी संख्या में महीनों पहले दाखिल मुकदमें सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। इससे केसों की पेंडेंसी बढ़ रही है।

वकीलों का कहना है कि वर्चुअल सुनवाई बिल्कुल सफल नहीं है। कई बार कम्प्यूटर का लिंक ही नहीं मिल पाता है। इससे अधिवक्ता व वादकारियों का पूरा दिन बर्बाद हो रहा है। अब कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खुली अदालतों में सुनवाई शुरू की जाए।

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