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बेटे-बहू से पीड़ित बुजुर्ग दंपती को बड़ी राहत:HC ने मां-बाप को कमरे में बंद करने वाले बेटे को बेसिक जरूरतें पूरी करने का आदेश दिया

प्रयागराज3 महीने पहले
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हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी को बुजुर्ग दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी को बुजुर्ग दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेटे-बहू से पीड़ित बुजुर्ग दंपती को बड़ी राहत दी है। मां-बाप को कमरे में बंद कर सताने वाले बेटे को उनकी देखभाल करने व थाना प्रभारी को सप्ताह में एक दिन जाकर दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

बुजुर्ग की जान-माल की सुरक्षा करेंगे थाना प्रभारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के शिवपुर इलाके में राजर्षि नगर गिलट बाजार स्थित भवन के निवासी सीनियर सिटिजन के मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने बुजुर्ग दंपती की की जान-माल की सुरक्षा के लिए शिवपुर थाना प्रभारी को हफ्ते में एक दिन विजिट करने का निर्देश दिया है। साथ ही साथ यह भी कहा है कि उनके जीवन को लेकर कोई खतरा नहीं होने पाए। मकान में भी बेटा-बहू ऐसा कोई निर्माण न कर पाएं, जिससे उनकी हवा और रोशनी बाधित हो। बेटा उनकी जरूरते समय-समय पर पूरी करता रहे। कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटिजन को जब भी मदद की जरूरत हो तो थाना प्रभारी से मांग सकते हैं।

कोर्ट ने शिव प्रकाश सिंह को नोटिस जारी किया और राज्य सरकार सहित विपक्षी से जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 20 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने दिया। युगल पीठ वंदना सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

डीएम ने बेटे को दिया था बेदखली का आदेश, बहु ने कोर्ट में किया है चैलेंज

जिलाधिकारी वाराणसी ने सीनियर सिटिजन एवं पैरेंट भरण-पोषण एवं कल्याण नियमावली के तहत मां-बाप की अर्जी पर बेटे की बेदखली सहित कई निर्देश जारी किए थे। इसे बहू ने हाईकोर्ट में चुनौती दिया है। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय का कहना था कि जिलाधिकारी को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार अधिकरण या सिविल कोर्ट को ही है। चाचा की वसीयत के आधार पर याची के पति मकान के आधे के हिस्सेदार हैं। घर में रहने का उसे अधिकार है। ऐसे में बेदखली पर रोक लगाई जाए। सीनियर सिटिजन की तरफ से अधिवक्ता सरोज कुमार यादव का कहना था कि डीएम को सीनियर सिटिजन एक्ट व नियम 21 के तहत उनके जीवन संपत्ति की सुरक्षा का अधिकार है, ताकि सीनियर सिटिजन सुरक्षा के साथ गरिमामय जीवन जी सकें।

मां-बाप को एक कमरे में बंद किया

विपक्षी बेटे ने मां-बाप को एक कमरे में बंदकर दिया है और बाहर से ताला लगा रखा है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संपत्ति पर वसीयत से दावा करने वाले बेटे ने जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती नहीं दी है। लिहाजा बेदखली पर रोक लगाते हुए जिलाधिकारी के आदेश पर हस्तक्षेप से कोर्ट ने इंकार कर दिया।

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