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प्रयागराज में मरीज को चढ़ा नकली खून:मौत के बाद बचा हुआ एक यूनिट ब्लड रिश्तेदार वापस करने ब्लड बैंक गया तो पता चला नकली है

प्रयागराज4 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
बेली अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमके अखौरी ने बताया कि ब्लड बैंक के नाम पर नकली ब्लड बैग बनवाकर उसमें ब्लड भरकर बेचा जा रहा है। पुलिस को जानकारी दी गई है।

प्रयागराज में नकली खून का कारोबारी का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शुक्रवार को यहां एक नर्सिंग होम में एक मरीज के परिजन ने दलाल से 2 यूनिट खून लिया। सिर्फ एक यूनिट चढ़ने के कुछ देर बाद ही मरीज की मौत हो गई। एक यूनिट खून बचने पर मृतक का रिश्तेदार उसे सरकारी TB (तेजबहादुर सप्रू) यानी, बेली ब्लड बैंक वापस करने गया। वहां पर कर्मी ने जांच की। पता चला कि ये खून उनके ब्लड बैंक का नहीं है। यानी खून के पैकेट पर जिस ब्लड बैंक का स्टीकर लगा था वह वहां का नहीं था।

दरअसल, इरशाद अली नाम के एक मरीज का इलाज निजी नर्सिंग होम में चल रहा था। वह सांस का मरीज था, उसे दमे की बीमारी थी। ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने कहा कि मरीज को तत्काल दो यूनिट ब्लड चढ़ाना होगा। नर्सिंग होम के माध्यम से तीमारदार किसी दलाल से संपर्क कर 8 हजार रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से दो यूनिट ब्लड लाकर डॉक्टर को दिए। एक यूनिट ब्लड मरीज को चढ़ाया भी गया। इसी बीच मरीज की मौत हो गई।

एक यूनिट ब्लड जो बचा उस पर बेली ब्लड बैंक का रैपर लगा था। ऐसे में मृतक का रिश्तेदार उसे लेकर बेली ब्लड बैंक पहुंचा। ब्लड देखने से ही काला दिख रहा था, आशंका होने पर रजिस्टर में मिलान किया गया तो ब्लड बैग नंबर गलत मिला। रजिस्टर में भी मरीज का नाम नहीं मिला।

नकली ब्लड बैग बनवाकर दलाल बेच रहे ब्लड।
नकली ब्लड बैग बनवाकर दलाल बेच रहे ब्लड।

चिकित्सा अधीक्षक बोले-जांच होगी
बेली अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमके अखौरी ने बताया कि कुछ गिरोह नकली खून का कारोबार कर रहे हैं। जो तीमारदारों को अपने झांसे में ले लेते हैं। ब्लड बैंक के नाम पर नकली ब्लड बैग बनवाकर उसमें नकली ब्लड भरकर बेचा जा रहा है। मामला संज्ञान में आया है। पुलिस को जानकारी दी गई।

बड़े पैमाने पर चल रहा खून का धंधा
जनपद में खून के नाम पर बड़े पैमाने पर कुछ गिरोह गोरखधंधा में शामिल हैं। इसके पहले भी इस ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने नकली ब्लड का खुलासा किया था। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. उत्तम बताते हैं कि इस तरह के कई मामले आ चुके हैं। यह गिरोह अपनी करतूत से बाज नहीं आ रहे हैं। यह शहर के सभी सरकारी ब्लड बैंकों के रैपर छपवाकर उसे ब्लड बैग पर चस्पा कर देते हैं और उसमें अवैध तरीके से बिना जांच किए हुए ब्लड भरकर ज्यादा कीमत में बेच रहे हैं।

रुपए देकर ब्लड बेचना व खरीदना अपराध है
बेली अस्पताल की CMS डॉ. किरन मलिक ने बताया कि रुपए देकर ब्लड बेचना व खरीदना दोनों अपराध है। यदि किसी भी जरूरतमंद को ब्लड की आवश्यकता है। तो वह सीधे ब्लड बैंक से संपर्क करे। दलाल के माध्यम से ब्लड लेने पर बिना जांच किया हुआ या मिलावटी नकली ब्लड दे दिया जाता है जो मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है।

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