UPPSC की APS भर्ती परीक्षा 2010 में धांधली:फेल अभ्यर्थियों का कर दिया चयन, CBI ने दर्ज की FIR; तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक के लखनऊ स्थित घर पर छापा

प्रयागराज4 महीने पहले
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प्रभुनाथ के खिलाफ CBI पर्याप्त सबूत मिलने के बाद FIR दर्ज की है। - Dainik Bhaskar
प्रभुनाथ के खिलाफ CBI पर्याप्त सबूत मिलने के बाद FIR दर्ज की है।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ व अन्य अज्ञात अफसरों के खिलाफ सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (CBI) ने 4 अगस्त 2021 को दिल्ली में FIR दर्ज की है। पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ वर्तमान में PWD (पब्लिक वर्कस डिपार्टमेंट) में विशेष सचिव के पद पर तैनात हैं। उनपर एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी (APS) भर्ती 2010 में धांधली के आरोप हैं। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सीबीआई ने प्रभुनाथ के लखनऊ स्थित घर पर शुक्रवार को छापा मारा। छापे के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

पूछताछ के लिए रिमांड पर ले सकती है CBI
CBI ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ प्रतियोगियों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद यह रिपोर्ट दर्ज की है। इसकी जांच अब शुरू कर दी गई है। जल्द ही प्रभुनाथ को पूछताछ के लिए CBI रिमांड पर ले सकती है। CBI ने लोक सेवा आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रण प्रभुनाथ समेत अन्य आयोग के कर्मचारियों, निजी व्यक्तियों के खिलाफ यह रिपोर्ट दर्ज की है।

इन धाराओं में दर्ज किया गया मामला
यह मामला PC Act 1988 की धारा 13 (2) 13 ( 1 ) ( d) व IPC की धारा 120B, 420, 468, 471 IPC के तहत दर्ज किया गया है।

फेल अभ्यर्थियों का कर दिया चयन
CBI जांच में प्रमाणित हुआ कि आयोग ने हिंदी शार्टहैंड की परीक्षा में फेल अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ देकर चयनित कर लिया था। इसमें कई ऐसे भी अभ्यर्थी ऐसे भी थे, जिन्होंने फर्जी कम्प्यूटर प्रमाण लगाया था। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि बीतने के बाद ऐसे अभ्यर्थियों से कम्प्यूटर प्रमाण पत्र स्वीकार किए गए। इसके कारण कई योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए और अयोग्य अभ्यर्थी चयनित हो गए।

लोक सेवा आयोग की शुचिता पर सवाल उठते रहे हैं।
लोक सेवा आयोग की शुचिता पर सवाल उठते रहे हैं।

2010 में APS के 250 पदों पर मांगे गए थे आवेदन
2010 में उत्तर प्रदेश सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। सामान्य अध्ययन और सामान्य हिंदी की परीक्षाएं 2013 में हुईं। हिंदी शार्टहैंड और हिंदी टाइपिंग का टेस्ट 2014 में हुआ। इसके बाद कम्प्यूटर ज्ञान की परीक्षा 2016 में ली गई। परीक्षा का अंतिम परिणाम 2017 में जारी हुआ था। अंतिम परिणाम के बाद से ही इस भर्ती परीक्षा की शुचिका पर सवाल उठने लगे थे। अभ्यर्थियों ने सरकार से भी शिकायत की थी पर कुछ नहीं हुआ। इसके बाद अभ्यर्थियों ने सीबीबाई जांच की मांग की थी।

CBI की प्रारंभिक जांच में सही पाए गए आरोप
CBI की प्रारंभिक जांच में लोक सेवा अयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ भ्रष्टाचार के पर्याप्त सबूत पाए गए हैं। इसमें UPPSC के कुछ अन्य अफसरों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत सामने आई है। इस आपराधिक षड्यंत्र में परीक्षा नियंत्रक ने अपने पद का दुरुपयोग कर कुछ अयोग्य उम्मीदवारों का चयन किया। इसके कारण कई योग्य उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए।

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