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हाईकोर्ट में 5 जुलाई से नई व्यवस्था:सिस्को वेबेक्स सिस्टम लागू, अब ओपन कोर्ट की तरह ही होगी वर्चुअल सुनवाई, लिंक न मिलने का झंझट भी खत्म

प्रयागराज4 महीने पहले
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मुकदमों की काज लिस्ट के साथ ही वर्चुअल सुनवाई का लिंक भी शेयर होगा। - Dainik Bhaskar
मुकदमों की काज लिस्ट के साथ ही वर्चुअल सुनवाई का लिंक भी शेयर होगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्चुअल मोड में हो रही सुनवाई की व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। 5 जुलाई से वर्चुअल सुनवाई के लिए सिस्को वेबेक्स सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस सिस्टम का फायदा यह है कि इसमें खुली अदालत की तरह ही वर्चुअल मोड में सुनवाई होगी। मुकदमों की काज लिस्ट के साथ ही वर्चुअल सुनवाई का लिंक भी शेयर होगा। इससे कोई भी मुकदमा सुनना चाहता है तो उस लिंक पर जाकर सुन सकेगा।

वर्चुअल हियरिंग की व्यवस्था को और मजबूत किया
हालांकि फिजिकल सुनवाई की वकालत कर रहे अधिवक्ताओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने फिजिकल हियरिंग की बजाय वर्चुअल हियरिंग की व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। लिंक काज लिस्ट में छपकर और वेबसाइट पर आ जाएगी। जिससे वकीलों, याचिकाकर्ताओं और पत्रकारों को काफी सहूलियत होगी। इस लिंक में विधि छात्र भी जुड़ सकेंगे। अभी तक जिसका मुकदमा होता था केवल वही वकील ही सुनवाई को सुन सकता था।

लाइव रिपोर्टिंग के लिए दो विधि पत्रकारों ने एडवोकेट शाश्वत आनंद के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में मई 2021 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों का हवाला देकर यह कहा था कि लाइव रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का मौलिक अधिकार है। उनको मुकदमों की लाइव रिपोर्टिंग का अधिकार देना चाहिए।

इसके जवाब में जस्टिस पंकज नकवी व जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने यह कहा था कि पत्रकारों के अधिकारों पर कोई विवाद नहीं है। आपको रोक कौन रहा है? साथ ही साथ हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने याचिकाकर्ताओं को यह आश्वासन दिया था कि बहुत जल्द हाईकोर्ट जित्सी मीट(एप) को बदलकर किसी अन्य प्लेटफार्म पर स्विच करने जा रहे हैं, जिससे पत्रकारों की लाइव रिपोर्टिंग को लेकर सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

मुख्य-मुख्य 8 बिंदु

  1. हाईकोर्ट में सोमवार, 5 जुलाई से वर्चुअल सुनवाई की नई व्यवस्था लागू।
  2. हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए सिस्को वेब एक्स इवेन्ट प्लेट फ़ार्म को अपनाने का लिया निर्णय।
  3. वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही को अधिक प्रभावशाली और यूज़र फ्रेंडली बनाया गया।
  4. 5 जुलाई से न्यायालय संख्या 2, 3, 34, 35 तथा 45 में सभी मामलों की सुनवाई सिस्को वेब एक्स के माध्यम से होगी।
  5. इसके बाद अन्य न्यायालयों में भी अलग-अलग बैच में सिस्को वेब एक्स के माध्यम से सुनवाई होगी।
  6. नए प्लेटफार्म में वर्चुअल कोर्ट प्रोसीडिंग में बहुत सरल तरीके से भाग लिया जा सकता है।
  7. इसके लिए हर अधिवक्ता को अलग से लिंक भेजने की जरुरत नहीं रहेगी।
  8. रजिस्ट्रार प्रोटोकाल आशीष कुमार श्रीवास्तव ने दी है जानकारी।

ये थी जित्सी मीट एप की खामियां

  • वकीलों को लिंक मिलने में दिक्कत होती थी।
  • एसएमएस के माध्यम जिनका मुकदमा होता था उन्हीं अधिवक्ताओं को लिंग शेयर होता था।
  • कई बार लिंक एसएमएस से काफी देर से आते थे, जिससे वकीलों को काफी परेशानी होती थी।
  • इसका साइड इफेक्ट यह था कि वकील के पास अचानक से आए लिंक से तैयारी करने का समय नहीं मिलता था।
  • किसी दूसरे के मुकदमें की वकील सुनवाई नहीं देख सकता था भले ही उसकी उस मुकदमें में रुचि हो।
  • इस एप से वर्चुअल सुनवाई सुचारू रूप से नहीं हो पाती थी, यूजर फ्रेंडली नहीं था एप।
  • ज्यादा संख्या में लोग एक साथ नहीं जुड़ सकते थे।
  • यह वर्चुअल ओपन कोर्ट सिस्टम के लिहाज से सही नहीं था।

सिस्को वेबेक्स सिस्टम के फायदे

  • पूरी मुकदमों की सूची का लिंक एक समान व सार्वजनिक होगा।
  • लिंक काज लिस्ट या वेबसाइट पर पब्लिश हो जाएगा।
  • इससे लिंक मिलने की कठिनाई नहीं होगी।
  • किसी भी मुकदमे को कोई भी व्यक्ति लाइव कहीं भी बैठे देख-सुन सकेगा।
  • इसमें पब्लिक चैट का सिस्टम भी शामिल होगा, ताकि किसी प्वाइंट को जज के सामने मुकदमे के दौरान रखा जा सके।
  • खुली अदालत की तरह ही एक साथ ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग मुकदमों को सुन सकते हैं।
  • इसमें ओपन कोर्ट की तरह ही वर्चुअल सुनवाई हो सकेगी।
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