संविदाकर्मी को भी मिले सुनवाई का मौका:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- संविदाकर्मियों का पक्ष सुने बिना, उन्हें हटाया जाना गलत

प्रयागराज6 महीने पहले
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हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनकर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनकर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संविदा पर कार्यरत कर्मचारी को भी बिना सुनवाई का अवसर दिए पद से हटाना या उसकी संविदा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने यह टिप्पणी कस्तूरबा विद्यालय में 10 साल से कार्यरत वार्डन को एकपक्षीय आदेश जारी कर संविदा से हटाने के निर्णय को गलत करार देते हुए की है। साथ ही साथ हाईकोर्ट ने इस मामले में विभाग को नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश दिया है।

10 साल से संविदा पर काम कर रही कर्मी को हटाया

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने बलिया की मुन्नी पूनम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अधिवक्ता दिनेश राय का कहना था कि याची 2011 से कस्तूरबा बालिका विद्यालय बेलहरी बलिया में वार्डन के पद पर कार्यरत है। उसे एक वर्ष की संविदा पर रखा गया था पर अब तक इस संविदा को लगातार बढ़ाया जाता रहा है। सत्र 2020-21 के लिए उसका कार्य संतोषजनक न होने का अरोप लगाकर उसकी संविदा समाप्त कर दी गई। मगर ऐसा करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया। 2 जनवरी 21 को आदेश निकालकर उसकी संविदा समाप्त कर दी गई। इस मामले में बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता संजय चतुर्वेदी का कहना था कि याची का कार्य संतोषजनक नहीं था, इसलिए उसकी संविदा समाप्त कर दी गई।

सुनवाई का नहीं दिया था अवसर

कोर्ट ने जब पूछा कि क्या याची को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया तो उन्होंने माना कि याची को सुनवाई का अवसर नहीं मिला है। हाईकोर्ट का कहना था कि यहां यह मुद्दा नहीं है कि याची पिछले दस साल से संविदा पर कार्यरत है, बल्कि उसकी संविदा समाप्त करने से पूर्व उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया है। इसलिए संविदा समाप्त करने का आदेश जारी नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने याची को दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सक्षम प्राधिकारी को उस पर कमेटी की रिपोर्ट लेकर याची का पक्ष सुनकर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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