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अफसरों की नाफरमानी पर HC सख्त:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- कानून की जड़ों को कमजोर कर रही अधिकारियों की लापरवाही

प्रयागराज7 महीने पहले
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कोर्ट ने मौजूदा मामले में याची - Dainik Bhaskar
कोर्ट ने मौजूदा मामले में याची

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रदेश की अफसरशाही पर सख्त टिप्पणी की है। बार-बार निर्देशों के बाद भी जमानत प्रार्थना पत्रों पर पुलिस अफसर सरकारी वकीलों को समय से जानकारी नहीं दे रहे थे। सरकारी अधिवक्ताओं को समय से जानकारी मुहैया न कराने पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही कानून की जड़ों को चोट पहुंचा रही है।

कोर्ट ने आगे कहा कि समय रहते सरकारी वकील को जानकारी उपलब्ध न कराने से आरोपी को अनावश्यक रूप से लंबे वक्त तक जेल में बंद रहना पड़ता है। जमानत प्रार्थना पत्र समय पर निस्तारित नहीं हो पाते। औरैया निवासी संजय के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय भनोट ने यह तल्ख टिप्पणी की।

सरकारी वकीलों को समय से नहीं मिलती जानकारी
याचिकाकर्ता के पक्षकार अधिवक्ता संतोष कुमार शुक्ल का कहना था कि याची के विरुद्ध डकैती का मुकदमा दर्ज किया गया था। बड़ी बात यह है कि प्राथमिकी घटना के सात दिन बाद दर्ज कराई गई। उसके पास से फर्जी बरामदगी दिखाई गई है।

सरकारी वकील कोर्ट को कुछ नहीं बता पाए केस में
कोर्ट ने सरकारी वकील से इस केस में जानकारी मांगी तो वह कुछ भी बता पाने में असमर्थ थे। संबंधित जिले के पुलिस अधिकारियों की तरफ से इस बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। कोर्ट के बार बार के निर्देश के बावजूद पुलिस अफसर सरकारी वकील को जमानत प्रार्थना पत्रों से संबंधित जानकारियां उपलब्ध नहीं करा पाते हैं, जिससे सरकारी वकील सरकार का पक्ष नहीं रख पाते हैं।

सरकार ने आश्वस्त किया जमानत मामले में समय से मिलेगी जानकारी
हाईकोर्ट ने इससे पूर्व अजित चौधरी मामले की सुनवाई करते हुए मुकदमों में समय रहते जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर व्यापक निर्देश दिए थे। इसपर अपर महाधिवक्ता विनोद कांत ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि सरकार इस मामले में प्रतिबद्ध है। जल्द ही ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि जमानत प्रार्थना पत्रों पर समय से जवाब उपलब्ध करा दिया जाए। कोर्ट ने मौजूदा मामले में याची की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

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