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रिटायरमेंट के पहले हो विभागीय जांच:हाईकोर्ट ने कहा- सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच राज्यपाल की अनुमति के बगैर नहीं हो सकती है

प्रयागराज6 महीने पहले
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यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अनिल कुमार शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। - Dainik Bhaskar
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अनिल कुमार शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद बना राज्यपाल की अनुमित के विभागीय जांच नहीं कराई जा सकती है। सिविल सर्विस रेग्यूलेशन 351 (ए) के अंतर्गत फाइनेंशियल लॉस की भरपाई के लिए कर्मचारी के रिटायर होने से पहले विभागीय कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि रिटायर होने के बाद राज्यपाल से अनुमोदन लिए बगैर विभागीय कार्यवाही करना संविधान के अनुच्छेद 300(ए) के विपरीत है। कानूनी कार्यवाही बगैर किसी को संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। पेंशन खैरात नहीं है, यह कर्मचारी की सेवा का अधिकार है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया के रोका नहीं जा सकता।

9 फीसद ब्‍याज सहित पूरा भुगतान करने का आदेश

कोर्ट ने बिजली विभाग में कनिष्ठ अभियंता पद से सेवानिवृत्त याची को पेंशन सहित सभी परिलाभ पाने का हकदार माना है। इसी के साथ विभाग को नौ फीसद ब्याज सहित सेवानिवृत्ति परिलाभोंं का दो माह में भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो छह फीसदी अतिरिक्त ब्याज सहित कुल 15 फीसद ब्याज का भुगतान करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अनिल कुमार शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची को 25 हजार हर्जाना देने का भी निर्देश

इलाहाबाद कोर्ट ने यह भी कहा कि रेग्यूलेशन 351(ए) के अंतर्गत विभागीय नुकसान की वसूली के लिए कर्मचारी के रिटायर होने से पहले आरोपपत्र दे देना जरूरी है। इसके बाद शुरू की गई कार्यवाही मनमानी मानी जाएगी। कोर्ट ने पेंशन का भुगतान न कर तीन साल परेशान करने पर दो माह में याची को 25 हजार रुपये हर्जाना भी देने का निर्देश दिया है। याची के खिलाफ सेवानिवृत्त होने के बाद यह कहते हुए विभागीय जांच कार्यवाही शुरू की गई कि उसने व उसके भाई ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति प्राप्त की थी। उसके खिलाफ बिजली चोरी की भी शिकायत की गई है।

रिटायर होने से एक माह पूर्व किया निलंबित

याची चार जून 1974 को बिजली विभाग में पैट्रोल मैन पद पर नियुक्त हुआ था। इसके बाद उसे कनिष्ठ अभियंता पद पर पदोन्नति दी गई। वह 31 दिसंबर 2018 को अमरोहा में बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हुआ। इससे पहले 14 नवंबर 2018 को याची के खिलाफ शिकायत की गई। उसे 22 नवंबर 2018 को निलंबित कर दिया गया। सेवानिवृत्त होने से पहले 28 दिसंबर 2018 को निलंबन वापस ले लिया गया।

बिजली विभाग का कहना था कि मृतक आश्रित कोटे में परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी मिल सकती है। याची व इसके भाई दोनोंं ने नियुक्ति पा ली है। विभाग को आर्थिक नुकसान की वसूली का अधिकार है। प्रबंध निदेशक के अनुमोदन पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी।

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