कोरोना का भय, ऑनलाइन इलाज पर फोकस:सामान्य बीमारियों के लिए मोबाइल के जरिए डॉक्टर से लें परामर्श, अस्पताल जाने से बचें

प्रयागराज5 महीने पहले
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कोराेना से बचाव के लिए कई डॉक्टर शुरू कर दिए हैं टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज। - Dainik Bhaskar
कोराेना से बचाव के लिए कई डॉक्टर शुरू कर दिए हैं टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज।

लगातार संक्रमण बढ़ रहा और सक्रिय रोगियों की संख्या भी बढ़ रही हैं जिससे बचाव के लिए सावधानी आवश्यक हैं । कोरोना की तीसरी लहर शुरू हो चुकी है संक्रमण अपने पैर तेजी से पसार रहा है। ऐसे में ज्यादातर चिकित्सक टेली-कंसल्टेशन यानी ऑनलाइन इलाज को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके बावजूद यदि आपको अस्पताल जाना पड़े तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें। ताकि आप व आपका परिवार कोरोना की इस तीसरी लहर में संक्रमण से सुरक्षित रहे। बता दें कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी शहर के ज्यादातर डॉक्टरों ने टेली मेडिसिन के इलाज शुरू किया था।

अपॉइंटमेंट लेकर जाएं

जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. एके तिवारी ने बताया कि मौसम के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए पहले घर पर ही मरीज के स्वास्थ्य का आंकलन करें। बीमारी के हल्के लक्षण दिखने पर टेली-कंसल्टेशन का माध्यम चुनें व चिकित्सक से मरीज की स्थिति साझा करें। अतिआवश्यक पड़ने पर ही अस्पताल जाएं व मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले चिकित्सक से अपॉइंटमेंट लें व निर्धारित समय पर पहुंचे। इससे समय पर चिकित्सा सेवा मिलेगी व आपके समय की बचत भी होगी।

मेडिकल हिस्ट्री से जुड़ी रिपोर्ट साथ रखें

तेज बहादुर सप्रू अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.किरन मलिक कहती हैं, अस्पताल जाते समय मरीज के इलाज से जुड़े सभी रिपोर्ट व प्रयोग की जा रही दवाएं अपने साथ लेकर जाएं। अपनी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को बताने में मरीज सक्षम नहीं है तो ऐसी स्थिति में उसके साथ एक परिजन चिकित्सक से मिले। मरीज के स्वास्थ्य संबंधित कोई भी बात चिकित्सक से न छुपाएं व धैर्यपूर्वक सारी समस्या साझा करें। चिकित्सक से अनावश्यक सवाल न पूछें। कम से कम समय में अपनी बात रखें व सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करें। ताकि आपका व चिकित्सक का समय बर्बाद न हो।

अपने साथ जरूर ले जाएं ये चीज़ें

मरीज को अस्पताल ले जाते समय अपने साथ सैनिटाइजर, मास्क, ग्लव्स, वेट-वाइप्स, ब्वायलर, पानी की बोतल, तौलिया, फेस शील्ड, ग्लास जरूर रखें। अहतियात का पालन करते हुए इन सभी वस्तुओं का प्रयोग करें। अस्पताल में कोरोना व अन्य संक्रमण से यह सभी वस्तुएं आपको सुरक्षित रखेंगी। अपने हाथों को नियमित अंतराल पर धोते रहें।

खाली पेट न जाएं व बाहर का कुछ न खाएं

अस्पताल जाते समय घर से खाली पेट न निकलें। घर का पौष्टिक भोजन करके ही निकलें। हल्का गुनगुना शुद्ध पानी साथ लेकर जाएं। भूख लगने पर खाने के लिए अपने पास कुछ ताजा फल रखें। फल को खाने के बाद कचरा कूड़ेदान में डालें। अस्पताल परिसर में लगे सार्वजनिक नल व हैंडपंप का प्रयोग न करें। टिशू पेपर का प्रयोग करें।

सार्वजनिक वस्तुओं को हाथ न लगाएं

एसआरएन अस्पताल के कोविड के नोडल डॉ. सुजीत वर्मा कहते हैं कि कोविड 19 का संक्रमण कहीं भी हो सकता है इसलिए मास्क व ग्लब्स पहनकर अस्पताल के लिए निकलें, एंबुलेंस या अपने पर्सनल वाहन से जा रहे हैं तो ड्राइवर को मास्क लगाने को कहें। अस्पताल परिसर में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है इसलिए वहां मौजूद सार्वजनिक कुर्सी, नल, हैंडपंप का प्रयोग न करें व कैंटीन में न जाएं। दीवारों से न चिपकें और न ही किसी वस्तु को हाथ लगाएं। मुंह में लगे मास्क को हाथ से न छूएं। मास्क बदलने के बाद सैनिटाइज करके कूड़ेदान में डालें व हांथ को सैनिटाइज करते रहें।

घर वापस आने पर रखें विशेष ध्यान

अस्पताल से आने का मतलब संक्रमण क्षेत्र से होकर आना है इसलिए घर पहुंचने पर बाहर ही जूते उतार दें। मरीज के साथ अस्पताल गए परिजन व मरीज कम से कम 10 दिन खुद को बचाकर रहें। इस बीच घर के सदस्यों में बच्चे, बुजुर्ग व गर्भवती से मुलाक़ात न करें। कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करें। कोरोना के लक्षण महसूस होने पर घबराएं न बल्कि अपनी जांच कराएं।

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