जटायु मंदिर बनवाने में सहयोग करेगा बाघम्बरी गद्दी मठ:नरेंद्र गिरी से प्रयागराज में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने की मुलाकात, 51 सीढ़ियों के निर्माण कराने का मिला आश्वासन

प्रयागराज8 महीने पहले
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पूर्व राज्यपाल राजशेखरन ने बताया कि भगवान के पावन चरणों की ओर 501 सीढ़ियों की श्रृंखला बनाने का एक दिव्य प्रयास शुरू किया गया है। - Dainik Bhaskar
पूर्व राज्यपाल राजशेखरन ने बताया कि भगवान के पावन चरणों की ओर 501 सीढ़ियों की श्रृंखला बनाने का एक दिव्य प्रयास शुरू किया गया है।
  • प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्दार्थनाथ सिंह ने भी दिया आश्वासन बोले, अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह केरल में भी बनेगा भव्य जटायु मंदिर

अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर जैसा जटायु जी का भव्य मंदिर केरल में बने, इसको लेकर मिजोरम के पूर्व राज्यपाल व केरल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजशेखरन ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व बाघम्बरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरी से प्रयागराज में मुलाकात की।

मंदिर के निर्माण के लिए सहयोग मांगा। इस पर महंत नरेंद्र गिरी ने 51 सीढ़ियों का निर्माण मठ व बड़े हनुमान मंदिर(5 लाख 61 हजार रुपए) की ओर से कराने का आश्वासन दिया।

जटायु मंदिर तक पहुंचने के लिए बननी हैं 501 सीढ़ियां

पूर्व राज्यपाल राजशेखरन ने बताया कि भगवान के पावन चरणों की ओर 501 सीढ़ियों की श्रृंखला बनाने का एक दिव्य प्रयास शुरू किया गया है। जहां जटायु जी के विशाल मंदिर की दिव्यता का स्वरूप देने की योजना है। जटायु मंदिर की तीर्थ यात्रा से हर भक्त को श्रीराम मंदिर अयोध्या की दिव्यता के जैसा ही आत्म साक्षात्कार का अनुभव प्राप्त हो सकेगा। 501 सीढ़ियां बनाने में करीब 55 लाख 11 हजार रुपए से अधिक का खर्च आने का अनुमान है।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने भी दिया आश्वासन

कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह केरल कोल्लम में जटायु मंदिर बनेगा। अयोध्या से कोल्लम तक सीधा जुड़ने से आध्यात्मिक भावना बढ़ने से जागृति आएगी। उत्तर में अयोध्या का श्री राम मंदिर और दक्षिण में जटायु मंदिर के निर्माण से देश में रामराज्य की परिकल्पना मूर्त रूप लेगी।

उक्त बातें उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह नेे मिजोरम के पूर्व राज्यपाल कुम्मनमन राजशेखरन के मध्य चर्चा में कही।

क्यों बनेगा केरल में जटायु मंदिर

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जहां जटायु ने माता सीता के सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। जटायु ने अपने बलिदान के माध्यम से भारतीय नैतिक मूल्यों को बरकरार रखा, साथ ही महिलाओं के गौरव और सम्मान की रक्षा की है। जटायु के वीरता साहस और शौर्य के साथ रावण से युद्ध किया। वास्तव में यह एक योद्धा की निस्वार्थ लड़ाई थी।

रावण से युद्ध के बाद जटायु शक्तिहीन हो गए थे। अपनी प्यास बुझाने के लिए जटायु ने अपनी चोंच से चट्टान को रगड़ कर एक जलकुंड बनाया जिसे श्कोक्कोरणीश् के नाम से जाना जा रहा है। जलकुंड आज भी विद्यमान है। उनकी मृत्यु के पश्चात भगवान श्री राम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था।

भगवान श्रीराम ने जटायु चट्टान के शीर्ष पर एक पैर पर खड़े होकर जटायु को मोक्ष प्रदान किया था और आज भी इस स्थान पर प्रभु श्रीराम के एक पैर का पदचिन्ह है। जिसका भक्तगण आज भी दर्शन पूजन करते हैं।

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