इलाहाबाद हाईकोर्ट की 5 बड़ी खबरें:रेरा के वसूली आदेशों का पालन न करने पर गौतमबुद्ध नगर के डीएम सुहास एल. वाई तलब

प्रयागराज22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) द्वारा जारी रिकवरी प्रमाण पत्र पर कार्रवाई न करने पर डीएम गौतमबुद्ध नगर सुहास एल. वाई को 4 अक्टूबर को तलब किया है।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि डीएम की निष्क्रियता से हाईकोर्ट में अनावश्यक मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। जिलाधिकारी रेरा द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गौतम बुध नगर की प्रिया कपाटी की याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है।

याची ने इको विलेज प्रोजेक्ट 4 ग्रेटर नोएडा में फ्लैट आवंटन के लिए एडवांस रकम जमा की थी। प्रोजेक्ट असफल हो गया और प्रमोटर समय पर कब्जा नहीं दे सके। जिसके चलते याची ने रेरा में परिवाद दाखिल किया। रेरा ने अग्रिम भुगतान की गई रकम वापसी के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। रिकवरी जिला प्रशासन के माध्यम से होनी है। मगर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसे लेकर याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट का कहना था कि मामला 2 साल से अधिक पुराना है। रेरा ने रिकवरी का आदेश दिया, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने डीएम को रिकवरी के सभी लंबित मामलों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ 4 अक्टूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है।

पढ़ें इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी खबरें

# सीएमओ कार्यालय बलिया में घोटाले के दोषी अधिकारियों पर डीएम से रिपोर्ट तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) बलिया कार्यालय में ठेके के आवंटन में अनियमितता के दोषी अधिकारियों पर DM बलिया से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो कोर्ट गंभीर रुख अपनाने को बाध्य होगी। याचिका की सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने हरेंद्र नाथ त्रिपाठी की अवमानना याचिका पर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्रवाई करने से पहले सरकार को जानकारी लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसलिए याची अधिवक्ता याचिका की प्रति सरकारी वकील को दे और वह आदेश के पालन पर जानकारी उपलब्ध कराए।

हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को सीएमओ कार्यालय में अनियमितता की जांच रिपोर्ट में घपले के दोषी अधिकारियों पर 6 माह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इससे पहले याची ने जिलाधिकारी बलिया से शिकायत की थी कि बिना टेंडर काम कराकर धन‌ की बंदरबांट कर ली गई। जिसकी जांच कमेटी द्वारा की गई। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की। इसके बावजूद अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो हाईकोर्ट की शरण ली थी।

कोर्ट के आदेश का जिलाधिकारी अदिति सिंह ने पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ यह अवमानना याचिका दायर की गई है।

# जमानत की सुनवाई पीड़ित पक्ष को नोटिस बगैर नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय कानून के तहत जमानत अर्जी की सुनवाई से पहले पीड़ित/शिकायत कर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है। कहा कि कोर्ट में दाखिल पुनरीक्षण अर्जी में जमानत पर रिहा करने की सुनवाई बिना शिकायत कर्ता को नोटिस जारी किए नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता विपक्षी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव ने हत्या के आरोपी नाबालिग योगेश की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद किशोर आरोपी को लॉकअप या जेल नहीं भेजा जाएगा। उसे बाल कल्याण पुलिस को सौंपा जाएगा और 24 घंटे में बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। जहां से उसे प्रोवेशन अधिकारी के संरक्षण में सुरक्षा के साथ आश्रय स्थल में रखा जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि किशोर अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने से इंकार किया जा सकता है। ऐसा करते समय देखा जाएगा कि छूटने के बाद वह कहीं अपराधियों से मिल तो नहीं जाएगा। उसे नैतिक, शारीरिक व मानसिक खतरा तो नहीं होगा। रिहाई न्याय हित के विरुद्ध तो नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि किशोर को गैर जमानती अपराध में जमानत पाने का विधिक अधिकार नहीं है। यह न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है।

मालूम हो कि मथुरा के वृंदावन थाना क्षेत्र में पीट-पीट कर मार डालने के आरोप में 22 सितंबर 2020 को एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपी मृतक को तब तक पीटते रहे, जब तक मौत नहीं हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि सिर में गंभीर चोटें के कारण मौत हुई। पुलिस ने याची सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। किशोर न्याय बोर्ड ने याची की आयु 16 वर्ष 6 माह 16 दिन बताया।

जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बोर्ड को रिपोर्ट दी कि याची पर परिवार का नियंत्रण नहीं है। उसके अपराधियों के साथ जाने की संभावना है। इस पर कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। अपील भी खारिज हो गई। हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। सवाल उठा कि क्या बिना पीड़ित पक्ष को नोटिस जारी किए जमानत अर्जी की सुनवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा जमानत अर्जी पर पीड़ित पक्ष को सुना जाना जरूरी है।

# गोवध निरोधक कानून में जब्त वाहन को मुक्त न करने के आदेश पर हस्तक्षेप से इंकार

हाईकोर्ट ने गोवध निरोधक कानून के तहत जब्त वाहन को मुक्त करने की अर्जी खारिज करने के अधीनस्थ अदालतों के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कानून के तहत कोर्ट को वाहन को जब्त करने का अधिकार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव ने यास मोहम्मद की याचिका पर दिया है।

गोवध निरोधक कानून के तहत बलिया के बैरिया थाने में 21 सितंबर 2020 को एफआईआरदर्ज कराई गई है। याची ने जब्त वाहन को मुक्त कराने की अर्जी दाखिल की। जिसे एसीजेएम बलिया ने खारिज कर दी। पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज कर दी गई। दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत गोवंश को वध के लिए वाहन से ले जाना अपराध है। जो दंडनीय है। ऐसे में वाहन जब्त किया जा सकता है।

# पुलिस भर्ती बोर्ड पर लगा 10 हजार हर्जाना, अधिकारियों से वसूल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार-बार समय देने के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर पुलिस भर्ती बोर्ड पर 10 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। साथ ही 3 फरवरी 2020 को जारी आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो कोर्ट डीआईजी स्थापना पुलिस मुख्यालय प्रयागराज को तलब करेगी। कोर्ट ने कहा है कि हर्जाना राशि लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल कर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा किया जाए। याचिका की सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अजय कुमार की याचिका पर दिया है।

याची के अधिवक्ता का कहना है कि याची 2013 की पुलिस भर्ती में पिछड़ा वर्ग कोटे में सफल घोषित किया गया है। उसे दस्तावेज सत्यापन व मेडिकल जांच के लिए बुलाया जाना है। उसने प्रत्यावेदन भी दिया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिस पर यह याचिका दायर की गई। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए तीन बार समय दिया। लेकिन कोई जवाब नहीं आया तो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

खबरें और भी हैं...