इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई का फैसला वापस लिया:वकीलों को मिली गाउन पहनने से छूट, जिला कोर्ट में भी रूम में 10 से ज्यादा वकील नहीं होंगे

प्रयागराज6 महीने पहले
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वर्चुअल हियरिंग के आदेश को वापस ले लिया है। - फाइल

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वर्चुअल हियरिंग के आदेश को वापस ले लिया है। 4 जनवरी से वर्चुअल के साथ ही साथ मुकदमों की फिजिकल हियरिंग भी होगी। वर्चुअल हियरिंग का आदेश रविवार को रजिस्ट्रार जनरल ने जारी किया था। इस आदेश का अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन ने विरोध किया था। साथ ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को ज्ञापन भी दिया था। इसके बाद सोमवार को यह आदेश बदल दिया गया। आदेश बदलने के बाद हजारों अधिवक्ताओं ने राहत की सांस ली है।

कोर्ट रूम में एक बार में 10 से ज्यादा वकील न हों
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी अधीनस्थ कोर्ट के लिए भी आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी पीठासीन अधिकारी सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करें। कोर्ट रूम में एक बार में वकीलों की संख्या 10 से ज्यादा न हो। कोर्ट रूम में उचित दूरी के साथ 6 कुर्सियों की व्यवस्था ही की जाएगी। इसके अलावा पीठासीन अधिकारी को कोर्ट में व्यक्तियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की शक्ति होगी।

वकीलों को मिली गाउन पहनने से छूट
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कामकाज के संबंध में पहले की गई व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया गया है। यह परिवर्तन चीफ जस्टिस की इजाजत से किया गया है। हाईकोर्ट में मामलों की सुनवाई के दौरान अब वकीलों को अगले आदेश तक गाउन पहनने से छूट दी गई है। उन्हें 4 जनवरी से केवल कोट और बैंड में अदालतों में आना होगा। यहां पढ़ें पूरी खबर...

अधिवक्ताओं ने की थी महापंचायत की घोषणा
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला ने इस आदेश का विरोध किया था। महापंचायत की घोषणा की थी। एडवोकेट अभिषेक शुक्ला का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 2 जनवरी को आदेश दिया था। जिसमें कहा गया था कि 3 जनवरी से हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था सिर्फ वर्चुअल हियरिंग से ही चलेगी।

अभिषेक का कहना है कि ऐसी व्यवस्था न्याय के लिए ठीक नहीं है। इसीलिए इसके विरोध का निर्णय लिया गया था। पिछले साल भी कोरोना की दूसरी लहर में केवल ऑनलाइन हियरिंग की व्यवस्था से ज्यादातर अधिवक्ता साथी वकालत छोड़कर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए थे।

चीफ जस्टिस का फैसला स्वागत योग्य
अब जबकि चीफ जस्टिस ने ऑनलाइन के साथ फिजिकल हियरिंग की भी व्यवस्था दे दी है, तो यह स्वागत योग्य है। अधिवक्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। एडवोकेट श्रवण त्रिपाठी ने कहा कि हाईकोर्ट में ऑनलाइन मोड के अलावा फिजिकल हियरिंग होने से सभी के लिए सहूलियत होगी।

खबरें और भी हैं...