इलाहाबाद हाईकोर्ट की 6 बड़ी खबरें:इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने 8 नवनियुक्त जजों को शपथ दिलाई, दो साल के लिए पद पर नियुक्त

प्रयागराज3 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिन्दल ने बुधवार को नवनियुक्त सभी 8 अपर न्यायमूर्तियों को चीफ जस्टिस कोर्ट में पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह मुख्य न्यायाधीश के न्याय कक्ष में साढ़े चार बजे संपन्न हुआ। समारोह में सभी हाईकोर्ट न्यायमूर्ति, न्यायिक अधिकारी, परिवारीजन ,अपर सालिसिटर जनरल व एल्डर कमेटी के अध्यक्ष शशि प्रकाश सिंह, महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह, अध्यक्ष व सचिव एडवोकेट एसोसिएशन व अवध बार एसोसिएशन तथा वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हुए।

शपथ लेने वाले नव नियुक्त न्यायमूर्तियों में न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय, न्यायमूर्ति कृष्ण पहल, न्यायमूर्ति समीर जैन, न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी, न्यायमूर्ति बृज राज सिंह न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह व न्यायमूर्ति विकास बुधवार है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 21 को 13 अधिवक्ताओं व 4 जिला जजों के नाम की केन्द्र सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की संस्तुति भेजी थी। केन्द्र सरकार ने 13 नामों में से 8 अधिवक्ताओं को दो साल के लिए अपर न्यायाधीश नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत महानिबंधक आशीष गर्ग ने की।

पढ़ें कोर्ट की 5 बड़ी खबरें

1-अवैध कब्जा व धमकाने के मामले में हस्तक्षेप से इंकार, याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ए सी जे एम कोर्ट प्रयागराज की अदालत में चल रहे अनिल कुमार द्विवेदी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने से इंकार कर दिया है और वैधता की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि धारा 482की अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। याची के खिलाफ प्रथमदृष्टया आपराधिक केस बनता है। इसलिए हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने जार्जटाउन निवासी अनिल कुमार द्विवेदी की याचिका पर दिया है।

मालूम हो कि जार्जटाउन सी वाई चिंतामणि मार्ग पर विपक्षी की जमीन के कुछ हिस्से पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद है। धमकाने, अवैध निर्माण कराने के आरोप में एफ आई आर दर्ज कराई गई है। पुलिस चार्जशीट पर कोर्ट के संज्ञान लेने की वैधता को चुनौती दी गई थी।याची का कहना है कि वह अपनी जमीन पर नक्शा पास कराने के बाद निर्माण करा रहा है। झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है।

2-सात साल बीते नामांतरण नहीं, कोर्ट ने सरकारी वकील से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तहसीलदार सदर प्रयागराज के यहाँ 7 साल का समय बीत जाने के बावजूद नामांतरण न करने के मामले में राज्य सरकार के अधिवक्ता से जानकारी मांगी है। तहसीलदार ने सात साल पहले ही 15 नवंबर 14 को नामांतरण का निर्देश जारी किया था। जिसका पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका की सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने सबीह उर्रहमान खान की याचिका पर दिया है। याची ने 158 मिन्हाजपुर में प्लाट खरीदा । नामांतरण अर्जी दाखिल किया गया। कोई आपत्ति नहीं आयी। इसके बावजूद नामांतरण नहीं किया गया तो तहसीलदार ने आदेश दिया। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

3- बाहुबली उमाकान्त के बेटे रविकांत की दो आपराधिक मामलों में जमानत मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाहुबली उमाकांत यादव के बेटे रविकांत यादव की दो आपराधिक केस में सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने दिया है। याची के खिलाफ आजमगढ़ के फूलपुर व दीदारगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज है। फूलपुर केस में पूराहादी अंबारी स्थित विश्व बैंक की मदद से बने गांधी आश्रम का ताला तोड कर अवैध कब्जा कर लेने का आरोप है। दूसरे केस में दो आपराधिक केस के आधार पर बनी हिस्ट्री सीट के आधार पर गिरोहबंद कानून के तहत एफ आई आर दर्ज कराई गई है। याची 12 फरवरी 21से जेल में बंद हैं।

कोर्ट ने अभियोग की प्रकृति,साक्ष्य पर दंड की संभावना व सुधारात्मक पहलू सहित दाताराम केस में अनुच्छेद 21के जीवन की स्वतंत्रता पर विचार करने के बाद सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, विचारण में सहयोग देने व अपराध में शामिल न होने की शर्त लगाई है।

4-अदालतों में सुरक्षा, स्टाफ व जरूरी सुविधा मुहैया कराने को लेकर 27 को सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा और लोवर ज्यूडिशियरी में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं को लेकर स्वतः कायम जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के सात जजों की वृहदपीठ ने महाधिवक्ता के आश्वासन के बाद 27 अक्टूबर को पुनः इस मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट के आदेश के बावजूद समस्या का निदान करने में विफल सरकार व कोर्ट में उपस्थित हर विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में प्रदेश के महाधिवक्ता ने कोर्ट से कहा कि वह पहली बार इस केस की सुनवाई में आए हैं। इस कारण उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वह अधिकारियों से वार्ता कर सभी समस्याओं का हल निकाल सकें।

प्रदेश में कई जगह पर न्यायिक अधिकारियों को कोई सुविधा नहीं

कोर्ट ने महाधिवक्ता का अनुरोध स्वीकार कर इस केस की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तिथि तय की है। इसके पहले वृहदपीठ की अध्यक्षता कर एक्टिग चीफ जस्टिस एम एन भंडारी ने कहा कि प्रदेश में कई जगह पर न्यायिक अधिकारियों को कोई सुविधा नहीं है।

स्टेनोग्राफर की नियुक्ति नहीं की जा रही है

कोर्ट ने कहा कि कहीं -कहीं पर तो न्यायिक अधिकारी किराए के मकान में रह रहे हैं। कोर्ट भी किराए के स्थान पर चल रही है। न्यायिक अधिकारियों को आदेश खुद हाथ से लिखना पड़ रहा है। आदेश लिखने के लिए स्टेनोग्राफर की नियुक्ति नहीं की जा रही है। जजों ने कहा कि इस प्रकार हम अपने न्यायिक अधिकारियों को काम करने की अनुमति नहीं दे सकते।

वृहदपीठ में सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि जहां तक सुरक्षा का सवाल है, कोर्ट परिसरों में सुरक्षा नहीं है। हमारे न्यायिक अधिकारी दयनीय दशा में काम कर रहे हैं, जबकि उनसे अपेक्षाएं अधिक है। हाईकोर्ट ने अपने रिटायर हो चुके जजों की सुविधा को लेकर भी कहा कि कई राज्यों में निर्णय लिया जा चुका है और बेहतर सुविधा दी जा रही है। परन्तु हाईकोर्ट की कमेटी के कहने के बाद भी सरकार ने यहां कोई निर्णय नहीं लिया।

समस्याओं पर सम्बन्धित अधिकारियों से बातचीत की जाए

हाईकोर्ट ने लोवर ज्यूडिशियरी में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की तमाम समस्याओं को बताया और तल्ख लहजे में कहा कि हाईकोर्ट को आदेश पालन कैसे कराया जाता है, यह उसे बखूबी मालूम है।

कोर्ट में उपस्थित महाधिवक्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें सारी समस्याओं पर सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठकर बात करने का अवसर दिया जाए ताकि वह इसका उचित समाधान कर सकें और कोर्ट के आदेश पालन कराया जा सके।

चीफ जस्टिस ने जिला कचहरी का किया दौरा

आज हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिन्दल रजिस्ट्रार जनरल आशीष गर्ग को लेकर अचानक जिला कचहरी में बिना किसी को सूचना दिए सुबह 10 बजे के करीब पहुंच गए। उन्होंने कचहरी में पहले दौरा किया। जब जिला जज अमरजीत त्रिपाठी को जानकारी मिली तो वह भी पहुंच गए।

न्यायालय के कोर्ट रूम में कुछ न्यायिक अधिकारी अदालतों में बैठे थे। जो न्यायिक अधिकारी नहीं बैठे थे उनके बारे में जानकारी लिया एवं ड्रेस के संबंध में भी पूछताछ किया। चीफ जस्टिस के दौरे की चर्चा कचहरी में दिन भर रही। चर्चा का विषय रहा कि आखिर क्यों निरीक्षण करने आए थे। अब आगे की कार्रवाई क्या कार्यवाही होगी यह चर्चा का विषय बना है और लोग इसे लेकर सशंकित भी है।

सुबह 10 बजे का समय था। जिला कचहरी परिसर में न्यायाधीश , अधिवक्ता व अधिकारी अपने वाहनों को खड़ा कर अपने स्थान की ओर जा रहे थे। कुछ न्यायिक अधिकारी न्यायिक पीठ पर आसीन भी हो गए थे। न्यायिक कार्यवाही शुरू हो गई थी। कई अदालतों में न्यायिक अधिकारी नहीं बैठे थे।

मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल अपने स्टाफ के साथ जिला कचहरी की बहु मंजिला इमारत न्याय भवन में भ्रमण किया। जिला जज को इसकी सूचना मिली तो वह तत्काल मौके पर पहुंचे। जो न्यायिक अधिकारी अदालत में नहीं बैठे थे उनके बारे में चीफ जस्टिस ने जानकारी ली। कुछ अधिकारियों के ड्रेस कोड के संबंध में भी जानकारी ली।