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  • High Court Said It Is Not The Responsibility Of The State Government To Cremate The Bodies Buried On The Banks Of The Ganges, It Is Not A Public Interest Litigation, It Is A Publicity Interest Litigation.

योगी सरकार को कोर्ट से राहत:इलाहबाद हाईकोर्ट ने कहा- गंगा किनारे दफन शवों का अंतिम संस्कार कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं, ये जनहित याचिका नहीं, प्रचार याचिका ज्यादा है

प्रयागराजएक महीने पहले
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ही सवाल पूछा कि यदि किसी की मौत होती है तो क्या दाह संस्कार करना राज्य की जिम्मेदारी है? - Dainik Bhaskar
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ही सवाल पूछा कि यदि किसी की मौत होती है तो क्या दाह संस्कार करना राज्य की जिम्मेदारी है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रयागराज में गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर दफन शवों के अंतिम संस्कार की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ही सवाल पूछा कि यदि किसी की मौत होती है तो क्या दाह संस्कार करना राज्य की जिम्मेदारी है? आपने अभी तक क्या योगदान किया? यह जनहित याचिका नहीं, बल्कि प्रचार याचिका है। कोर्ट ने ये भी पूछा कि आप अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के समक्ष कैसे आ सकते हैं? इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजय यादव और न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया की खंडपीठ ने की।

याचिका में गंगा किनारे दफन शवों के अंतिम संस्कार की मांग की गई थी
दरअसल, वकील प्रणवेश​​​​​​ ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें गंगा किनारे दफन शवों का दाह संस्कार कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा गंगा के किनारे शवों को दफनाए जाने से रोकने की मांग की गई थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश संजय यादव ने अधिवक्ता प्रणवेश से कई सवाल पूछ डाले। न्यायधीश ने कहा कि यदि आप एक लोकहितैषी व्यक्ति हैं, तो हमें बताएं कि आपने खुद कितने शवों की पहचान की है? और क्या एक भी शव का सम्मानजनक तरीके से दाह संस्कार किया है?

कोर्ट ने एडवोकेट के सारे तर्कों को खारिज किया
एडवोकेट प्रणवेश ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का हवाला दिया। एडवोकेट प्रणवेश ने इसके अलावा तर्क दिया कि धार्मिक संस्कारों के अनुसार दाह संस्कार करना और गंगा नदी के किनारे दफन किए गए शवों का अंतिम संस्कार करना राज्य की जिम्मेदारी है।

कुछ व्यक्तिगत योगदान करें नहीं तो भारी जुर्माना लगाएंगे
मुख्य न्यायाधीश ने वकील के इस तर्क पर कहा कि राज्य सरकार ऐसा क्यों करे? हम इस याचिका को अनुमति नहीं देंगे। इसके लिए आपको कुछ व्यक्तिगत योगदान दिखाना होगा। अगर आप ऐसा नहीं कर पाए तो हम भारी जुर्माना लगा सकते हैं।

पहले आप इस पर और शोध करिए फिर याचिका दाखिल कीजिए
कोर्ट ने वकील से कहा कि आपने इस मामले में कोई होम वर्क नहीं किया। जो हम समझते हैं, उसके मुताबिक विभिन्न समुदायों द्वारा गंगा के किनारे शवों को दफनाए जाने की परंपरा रही है। इस पर अभी आपको बहुत अधिक शोध की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता ने गंगा के किनारे रहने वाले विभिन्न समुदायों के बीच प्रचलित संस्कारों और रीति-रिवाजों के बारे में कोई शोध नहीं किया है। इसलिए याचिका खारिज की जा रही है। वकील शोध के बाद दोबारा याचिका दायर कर सकते हैं।

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