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  • High Court's Important Comment On Advocate Behavior: If The Record Is Correct And There Is No Special Reason, Then After The Verdict, Do Not Advise The Lawyer To Pursue The Matter Again.

अधिवक्ता के व्यवहार पर HC की टिप्पणी:कहा- रिकॉर्ड में गलती न हो तो फैसले के बाद मामले को दोबारा आगे बढ़ाने की सलाह वकील न दें

प्रयागराज2 महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गलती न हो तो मामले को दोबारा आगे क्यों बढ़ाया जाए। एक वकील को अपने मुवक्किल के मामले को आगे बढ़ाने की सलाह नहीं देनी चाहिए। यह टिप्पणी जस्टिस डॉक्टर केजे ठाकर और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर के मल्हान और 17 अन्य की ओर से दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

6 साल बाद पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की सलाह
मामले में वकील ने अपने मुवक्किल को 6 साल की अवधि के बाद मौजूदा पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की सलाह दी थी। मामले में सीमा अधिनियम 1963 की धारा 5 के तहत एक आवेदन के साथ पुनर्विचार याचिका दायर की गई। इसमें आवेदन दाखिल करने में देरी के लिए माफी मांगी गई थी। पुनर्विचार याचिका 6 साल की देरी से दाखिल की गई थी। आवेदकों ने कहा कि दिशा-निर्देशों और सार्वजनिक परिवहन पर रोक होने के कारण समय के भीतर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं कर सके।

याचियों पर 10 हजार का जुर्माना ठोका, याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में अपीलों का निस्तारण कर दिया था, जबकि महामारी 2020- 21 में थी। इसलिए कोर्ट ने कहा कि यह जानकर दुख हो रहा है कि एक वकील को ऐसी कोई सलाह नहीं देनी चाहिए, जब रिकॉर्ड में कोई त्रुटि ना हो और ना ही अन्य कारण हों तो मामले को अंतिम रूप से तय किए जाने के बाद फिर से आगे बढ़ाया जाना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याचियों की ओर से छह साल की देरी के लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। याचियों का रवैया लापरवाही भरा है। कोर्ट ने इसके लिए याचियों पर 10 हजार का जुर्माना ठोका और याचिकाओं को खारिज कर दी।

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