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नकली प्लेटलेट्स के कारोबार में अस्पतालकर्मी भी शामिल:प्रयागराज में नकली प्लेटलेट्स चढ़ाने से एक मरीज की मौत के बाद हुआ खुलासा, अस्पताल सील

प्रयागराजएक महीने पहले
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प्रदीप पांडेय को प्लेटलेट्स के बजाय मौसमी का जूस चढ़ा दिया गया जिससे मौत हो गई। - Dainik Bhaskar
प्रदीप पांडेय को प्लेटलेट्स के बजाय मौसमी का जूस चढ़ा दिया गया जिससे मौत हो गई।

इन दिनों प्लेटलेट्स के नाम पर बड़ा कारोबार हो रहा है। खास बात यह है कि इस अवैध कारोबार में सिर्फ ब्लड बैंकों के बाहर टहलने वाले दलाल ही नहीं बल्कि अस्पताल के कुछ स्टाफ भी शामिल हैं। 3 हजार रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक का प्लेटलेट्स खुलेआम बेचा जा रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब पीपलगांव स्थित ग्लोबल अस्पताल में प्रदीप पांडेय नाम के डेंगू मरीज की मौत हो जाती है। तीमारदारों के मुताबिक, अस्पताल संचालक ने खुद 5 यूनिट प्लेट लेट्स के लिए 25 हजार रुपए लिए थे और कहीं से नकली प्लेटलेट्स मंगाकर मरीज के शरीर में चढ़ा दिया। हाथ की नसें फट गई और मरीज की मौत हो गई। सीएमओ डॉ. नानक सरन ने अस्पताल को सील करते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है।

टीबी सप्रू ब्लड बैंक के नाम से दलालों ने छपवाया है फर्जी रैपर।
टीबी सप्रू ब्लड बैंक के नाम से दलालों ने छपवाया है फर्जी रैपर।

प्लेटलेट्स चाहिए तो सीधे ब्लड बैंक जाइए

इन दिनों डेंगू मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। सरकारी से ज्यादा मरीज प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम में भर्ती हैं। पहले अस्पताल से बताया जाता है कि मरीज का प्लेटलेट्स बहुत कम हो गया है तत्काल प्लेटलेट्स चढ़ाना होगा। कुछ अस्पताल संचालक और अस्पतालकर्मी ऐसे हैं जो दूसरा ऑप्शन भी देते हैं कि परेशान न हो पैसा जमा कर दें प्लेटलेट्स हम यहीं मंगा देंगे। प्लेटलेट्स की किल्लत देखते हुए तीमारदार डाक्टर और अस्पतालकर्मी पर विश्वास करके प्लेटलेट्स के लिए हजारों रुपए जमा कर देता है।

पीपलगांव में है ग्लोबल अस्पताल। अस्पताल संचालक बिना डिग्री के ही करता है इलाज।
पीपलगांव में है ग्लोबल अस्पताल। अस्पताल संचालक बिना डिग्री के ही करता है इलाज।

अस्पताल संचालक ने जो मंगाया वह नकली था : तीमारदार

हकीकत यह है कि अस्पतालकर्मी ब्लड बैंक के बजाय प्लेटलेट्स दलाल के माध्यम से मंगा लेते हैं। ग्लोबल अस्पताल संचालक ने भी यही काम किया। मृतक के साले सौरभ त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर को बताया कि 8 यूनिट में तीन यूनिट ब्लड उसने SRN ब्लड बैंक से लिया था वह सही था। लेकिन 5 यूनिट प्लेटलेट्स जो अस्पताल संचालक ने मंगाया वह नकली था। सीएमओ डॉ. नानक सरन कहते हैं कि यदि प्लेटलेट्स चाहिए तो वह किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने के बजाय सीधे ब्लड बैंक जाए और वहां से प्लेटलेट्स ले।

ब्लड बैंक का रैपर छपवा बेच रहे नकली प्लेटलेट्स

नकली प्लेटलेट्स और ब्लड का कारोबार करने वाले गिरोह ने बेली और एसआरएन ब्लड बैंक का ब्लड बैग प्रिंट कराकर उसमें नकली प्लेटलेट्स भरकर बेच रहे हैं। मौसमी के जूस और प्लेटलेट्स का कलर एक ही तरह का होता है इसलिए लोग समझ नहीं पाते कि वह प्लेटलेट्स असली है या नकली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा, कि दलाल नकली प्लेटलेट्स बेच रहे हैं इसलिए जिसे भी प्लेटलेट्स चाहिए वह सीधे ब्लड बैंक में संपर्क करें किसी के बहकावे में न आएं।

मृतक ने फोन-पे से दिया 25 हजार रुपए

मृतक ने पांच यूनिट प्लेटलेट्स के लिए अस्पताल संचालक सौरभ मिश्रा को 25 हजार रुपए को भुगतान किया था। मृतक के मोबाइल में इसका साक्ष्य भी है। मृतक के साले सौरभ त्रिपाठी बताते हैं कि उनके जीजा ने पांच यूनिट प्लेटलेट्स के लिए 25 हजार रुपए का भुगतान किया था। उनके मोबाइल में यह साक्ष्य भी है।