• Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Prayagraj
  • Important Remarks Of The High Court Regarding The UP Government: Said UP Government Has Failed To Train Public Servants About Service Related Laws And Rules:

UP सरकार पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी:कहा- कमिश्नर अलीगढ़, DM हाथरस और SDM सासनी जांच करने में ट्रेंड नहीं

प्रयागराजएक महीने पहले

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवा संबंधी कानूनों और नियमों के मामले में अनट्रेंड लोकसेवकों को लेकर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, 'सरकार के अधिकारी विभागीय जांच करने में बिल्कुल भी ट्रेंड नहीं हैं।वह विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली जांच को सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। गलत आदेश पारित कर रहे हैं। यूपी सरकार अपने अधिकारियों को ट्रेंड करने में फेल है'।

यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने शिव कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।

प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेवेन्यू को ट्रेनिंग देने का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि इससे यूपी गवर्नमेंट सर्वेंट (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स 1999 की अवहेलना हो रही है। कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, रेवेन्यू उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया कि वह लोकसेवकों को सेवा संबंधी कानूनों और नियमों के बारे में प्रशिक्षित करें। कोर्ट ने कहा कि प्रशिक्षण जरूरी है, ताकि वे कर्मचारियों के जीवन के साथ खिलवाड़ न करें, उनका करियर बर्बाद न कर सकें।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को कहा कि वह अपने अधिकारियों को प्रशिक्षित करने में असफल है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को कहा कि वह अपने अधिकारियों को प्रशिक्षित करने में असफल है।

कमिश्नर अलीगढ़, DM हाथरस और SDM सासनी पर टिप्पणी
कोर्ट ने मामले में कमिश्नर अलीगढ़, DM हाथरस और SDM सासनी के बारे में भी गंभीर टिप्पणी की। कहा कि ये अधिकारी विभागीय जांच सही तरीके से करने में ट्रेंड नहीं हैं। कोर्ट ने इन तीनों अधिकारियों की ओर से याची के खिलाफ पारित आदेश को रद्द कर दिया।

याची के इंक्रीमेंट को बहाल करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि चार सप्ताह में छह प्रतिशत की दर से एरियर का भुगतान किया जाए। अगर समयबद्ध आदेश का पालन नहीं होता है तो याची के एरियर को 12% की दर की ब्याज से भुगतान करना होगा। कोर्ट ने आदेश की कॉपी प्रमुख सचिव रिवेन्यू को भेजने का भी आदेश दिया।

पीड़ित का दो इंक्रीमेंट रोकने का दिया था आदेश
याची शिव कुमार की ओर से तर्क दिया गया कि वह तहसील सासनी में बतौर सहायक क्लर्क के तौर पर तैनात था। याची पर दूसरे कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने और गाली देने का आरोप है। इसके अलावा वह तहसील परिसर में शराब पीता है और इधर-उधर लाइटर का प्रयोग करता है। इस आरोप पर उसका दो इंक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया।

याची के अधिवक्ता हिमांशु गौतम की ओर से तर्क दिया गया कि याची के खिलाफ सही तरीके से जांच नहीं की गई है। आरोप को साबित करने के लिए कोई गवाह नहीं पेश हुआ। जांच अधिकारी ने मौखिक बयानों के आधार पर याची के खिलाफ कार्रवाई कर दी, जो उत्तर प्रदेश सेवा नियम 1999 के नियम सात का उल्लंघन है।

जांच के पहले ही आरोप पत्र पकड़ाने का आरोप
हिमांशु गौतम के वकील ने तर्क दिया कि जांच अधिकारी ने याची को जांच के पहले ही आरोप पत्र पकड़ाते हुए इंक्रीमेंट को रोक दिया। SDM हरी शंकर यादव के इस आदेश पर DM हाथरस प्रवीण कुमार लक्षकार और कमिश्नर अलीगढ़ गौरव दयाल ने भी अपनी मोहर लगा दी। याची ने अधिकारियों द्वारा पारित आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसे यूपी गवर्नमेंट सर्वेंट्स (डिसीप्लिन एंड अपील) रूल 1999 के आदेश का उल्लंघन बताया।

खबरें और भी हैं...