छात्रसंघ के अस्तित्व के लिए 450 दिन वाला अनशन:इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का अस्तित्व बचाने के लिए छात्रसंघ भवन पर क्रमिक अनशन लगातार जारी है।

प्रयागराज10 दिन पहले
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में 450 दिन से अनशन पर बैठे छात्र व छात्रनेता - Dainik Bhaskar
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में 450 दिन से अनशन पर बैठे छात्र व छात्रनेता

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ भवन पर छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर चल रहे संयुक्त संघर्ष समिति के अनशन को गुरुवार को 450 दिन पूरे हो चुके हैं। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन व जिला प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। यह छात्रनेता बारिश, गर्मी व ठंड के मौसम में भी अनशन पर जमे रहे। विभिन्न छात्रसंघ संगठन के लोग पदाधिकारी भी इसमें अपना समर्थन दे रहे हैं। अनशन की अगुवाई कर रहे छात्रनेता अजय यादव सम्राट ने कहा कि हम गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हैं कि हम भगत सिंह भी बन सकते हैं। सर्वसम्मति से पारित किया गया कि विश्वविद्यालय खुलते ही अनशन को आंदोलन में परिवर्तित कर दिया जायेगा।

भारतीय राष्ट्रीय संगठन यानी एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रसंघ सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास के लिए एक आवश्यक संस्था है। ऐसे में इसकी बहाली के लिए हम कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतेंद्र सिंह ने कहा कि यह समझ से परे है कि शिक्षकों का अपना संघ है, कर्मचारियों का अपना संघ है तो छात्रसंघ से परहेज क्यों है। इस मौके पर छात्र नेता ललित सिंह,नवनीत यादव,गोलू पासवान, मुबाशिर हारून ,राहुल पटेल, उपेंद्र भारती, मो सलमान, आनंद सांसद, मसूद अंसारी, जलज यादव, रवि कुमार,अमित यादव, मो. असफाक, अभिषेक यादव,आदि उपस्थित रहे।

आखिर क्या है पूरा मामला

दरअसल, 29 जून 2019 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू ने कार्य परिषद की बैठक में छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा दिया था। सर पीसी बनर्जी छात्रावास में एक छात्रनेता की हत्या हुई थी। इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को फटकार लगाई थी। इसके बाद लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हवाला देकर छात्रसंघ का स्वरूप बदलकर छात्र परिषद में किया गया। हालांकि, छात्रों ने इसे नकार दिया। यही वजह है कि पहली दफा यहां छात्रों की सरकार नहीं बन पाई।

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