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कौन हैं जस्टिस प्रदीप कुमार, जो लखीमपुर हिंसा जांचेंगे:35 साल पहले बने थे जज; बिकरू कांड पर कहा था- राजनीति का अपराधीकरण नहीं रुका तो गैंगस्टर भस्मासुर हो जाएंगे

प्रयागराज10 दिन पहले
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लखीमपुर हिंसा की जांच के लिए यूपी सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को इसकी कमान सौंपी है। उन्होंने दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच आयोग का मुख्यालय लखीमपुर में ही बनाया जाएगा। तीन अक्टूबर यानी रविवार को हुई हिंसा के बाद से किसान संगठन और विपक्षी दल न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे। प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कानपुर के बिकरू कांड और लव जिहाद जैसे बड़े मामलों में अहम भूमिका निभाई थी।

कौन हैं प्रदीप कुमार श्रीवास्तव
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव का जन्म 30 अक्टूबर 1959 में हुआ था। 22 नवंबर 2018 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बतौर जज ज्वॉइन किया था। उन्होंने 1980 में कानून से ग्रेजुएशन और 1986 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पोस्ट ग्रेजुएशन करने दौरान ही 1986 में उन्होंने पीसीएस-जे क्वालीफाई किया था।

2002 में जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने हायर ज्यूडिशरी सर्विस के लिए क्वालीफाई किया था। 2015 में उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में प्रमोशन मिला। 22 नवंबर 2018 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज के रूप में नियुक्ति मिली। इसके बाद 20 नवंबर 2020 में जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने स्थायी जज के रूप में शपथ ग्रहण की। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट से इसी साल 29 सितंबर 2021 को सेवानिवृत्त हुए हैं।

कुछ चर्चित फैसले

गैंगस्टर विकास दुबे ने 2 जुलाई 2020 को सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।
गैंगस्टर विकास दुबे ने 2 जुलाई 2020 को सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

अल्प सेवाकाल में बिकरू कांड, पूर्व बीएसपी विधायक हाजी अलीम मर्डर केस व लव जिहाद उनके चर्चित फैसले माने जाते हैं। बिकरू कांड में फैसला सुनाते हुए जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने गैंगस्टर और अपराधियों को टिकट देने पर गहरी चिंता जाहिर की थी।

उन्होंने कहा था कि अगर राजनीति का अपराधीकरण ऐसे ही होता रहा और राजनीतिक दलों ने यह ट्रेंड बंद नहीं किया तो ऐसे गैंगस्टर और अपराधी भस्मासुर बन जाएंगे। इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

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