महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत:शिष्य आनंद गिरि को UP पुलिस ने हरिद्वार से गिरफ्तार किया, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी और उनके बेटे प्रयागराज से हिरासत में लिए गए

प्रयागराज2 महीने पहले
महंत नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। देर शाम UP से सहारनपुर पुलिस और SOG की टीम हरिद्वार के आश्रम में पहुंची थी और करीब डेढ़ घंटे की पूछताछ के बाद आनंद गिरि को गिरफ्तार कर साथ ले गई।

महंत नरेंद्र गिरि की प्रयागराज में सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। UP पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी को मौत की वजह बताया था।

UP पुलिस की सूचना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने देर रात को ही हरिद्वार के आश्रम में आनंद गिरि को हिरासत में ले लिया था। आनंद के बाद आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी UP पुलिस ने पूछताछ के लिए प्रयागराज से हिरासत में ले लिया।

सोमवार शाम से ही उत्तराखंड पुलिस आनंद गिरि के कांगड़ी गाजीवाली स्थित आश्रम पहुंच गई थी और उन्हें हाउस अरेस्ट कर रखा था। रात करीब साढ़े 10 बजे UP पुलिस की सहारनपुर SOG की टीम पहुंची और बंद कमरे में करीब एक घंटे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर साथ ले गई। हरिद्वार SP सिटी कमलेश उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस आनंद गिरि को राज्य में लेकर चली गई है, क्योंकि यह मामला उत्तर प्रदेश का है।

महंत नरेंद्र गिरि का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। गले में नायलोन की रस्सी का फंदा भी था।
महंत नरेंद्र गिरि का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। गले में नायलोन की रस्सी का फंदा भी था।

देर शाम का पूरा घटनाक्रम पढ़ें...

  • पुलिस के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि का शव अल्लापुर में बाघंबरी गद्दी मठ के कमरे में फंदे से लटका मिला था। जांच-पड़ताल की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद ही घटना का कारण साफ हो पाएगा। IG रेंज केपी सिंह ने बताया कि वे मौके पर पहुंच गए हैं। फिलहाल यह फांसी लगाकर आत्महत्या का मामला लग रहा है। फॉरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया है।
  • ADG कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि मौके पर पहुंचे अधिकारियों के अनुसार नरेंद्र गिरि ने जिस कमरे में सुसाइड किया है, वह दरवाजा बंद था। अनुयायियों की सूचना पर दरवाजा तोड़कर नरेंद्र गिरि का शव निकाला गया। मौके से सुसाइड नोट मिला है। सल्फास खाने की जो बात सामने आ रही है, वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
  • पुलिस के मुताबिक नरेंद्र गिरि का कमरा अंदर से बंद था। उसे तोड़ा गया। उनका शव जमीन पर पड़ा हुआ था। उनके गले में नायलोन की रस्सी का फंदा भी था।

शक की सुई इन 7 चेहरों के इर्दगिर्द
नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में शुरुआती तौर पर शिष्य आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम सामने आ रहा है। इन तीन चेहरों के अलावा 4 अन्य लोगों का नाम भी इस हत्याकांड से जुड़ रहा है। आनंद गिरि के मुताबिक मठ की संपत्ति को बेचकर कई लोगों ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनवाई हैं। इनमें नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मी अजय सिंह, मनीष शुक्ला, अभिषेक मिश्रा, शिवेक मिश्रा का नाम शामिल है। इन लोगों की नजर मठ की संपत्ति पर थी।

गुरुजी ने मनीष शुक्ला की शादी करवाई थी। उसे करोड़ों का घर भी दिया था। अभिषेक मिश्रा को भी गुरुजी ने करोड़ों का घर दिया था। इसके साथ ही शिवेक मिश्रा ने करोड़ों खर्च कर घर बनवाया था। गुरुजी ने इसे भी सहयोग किया था। आनंद गिरि ने आगे बताया कि गुरुजी ने डॉक्टर समेत कई उद्योगपति से कर्ज ले रखा था। मई के बाद मेरी गुरुजी से मुलाकात नहीं हुई। हमारी आखिरी मुलाकात लखनऊ में हुई थी।

आनंद गिरि ने कहा- ये बहुत बड़ा षड्यंत्र है
उत्तराखंड के DGP अशोक कुमार ने बताया कि UP पुलिस के फोन आने के बाद आनंद गिरि को हरिद्वार आश्रम में पुलिस निगरानी में रखा था। इससे पहले आनंद गिरि ने खुद को बेगुनाह बताते हुए इसे बहुत बड़ा षड्यंत्र बताया है।

पुलिस हिरासत में लिए गए आनंद गिरि के मुताबिक गुरुजी की हत्या कर मुझे फंसाने की साजिश की जा रही है। मठ की जमीन हड़पने और वर्चस्व को लेकर महंत जी की हत्या की गई। पैसे वसूलने वालों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया है। सुसाइड नोट की भी जांच होनी चाहिए। ये गुरुजी नहीं लिख सकते। मेरा नाम एक षड्यंत्र के तहत लिखा गया है। मैंने अपना पूरा जीवन गुरुजी के साथ बिताया है और कभी भी उनसे कोई पैसा नहीं लिया। मेरे और गुरु जी के बीच सब कुछ अच्छा था। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस मामले की पूरी जांच करें।

सुसाइड नोट को वसीयतनामा की तरह लिखा है
IG रेंज केपी सिंह ने बताया कि मौके से 7 पेज का सुसाइड नोट मिला है। इसमें महंत नरेंद्र गिरि ने वसीयतनामा की तरह लिखा है, इसमें शिष्य आनंद गिरि का भी जिक्र है। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में यह जिक्र भी किया है कि किस शिष्य को क्या देना है? कितना देना है? सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह अपने कुछ शिष्यों के व्यवहार से बहुत ही आहत और दुखी हैं और इसीलिए वह सुसाइड कर रहे हैं। पहली नजर में यह सुसाइड का ही मामला समझ में आ रहा है।

महंत आनंद गिरि और संदीप तिवारी।
महंत आनंद गिरि और संदीप तिवारी।

पुलिस ने मठ को कब्जे में लिया
फिलहाल मठ को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। मठ के रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। जिलाधिकारी संजय खत्री, IG केपी सिंह, DIG सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी पहुंच गए थे। मठ के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मठ पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे
मठ पर बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु भी पहुंच गए हैं। अनुयायी और श्रद्धालु इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि उन्होंने आत्महत्या क्यों की? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, CM योगी, डिप्टी CM केशव मौर्य आदि ने निधन पर गहरा शोक जताया है।

बाघंबरी गद्दी मठ के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई है।
बाघंबरी गद्दी मठ के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई है।

कल ही डिप्टी CM केशव मौर्य ने लिया था आशीर्वाद
एक दिन पहले रविवार को डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज में थे। तब उन्होंने मंदिर जाकर महंत नरेंद्र गिरि से आशीर्वाद लिया था। पिछले दिनों प्रयागराज आए DGP मुकुल गोयल भी लेटे हनुमान जी मंदिर में दर्शन पूजन करने गए थे।

महंत नरेंद्र गिरि पिछले करीब दो दशक से साधु-संतों के बीच अहम स्थान रखते थे। प्रयागराज आगमन पर बडे़ नेता हों या फिर आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, वे महंत से आशीर्वाद लेने और लेटे हनुमान जी का दर्शन करने जरूर जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बाघंबरी मठ पहुंचते रहे हैं।

एक दिन पहले जब डिप्टी CM केशव मौर्य उनसे मिलने पहुंचे थे।
एक दिन पहले जब डिप्टी CM केशव मौर्य उनसे मिलने पहुंचे थे।

एक दिन पहले का वीडियो

कुछ समय से चेले के साथ विवादों में थे नरेंद्र
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन बाद में इनके बीच समझौता हो गया था। तब हरिद्वार से प्रयागराज पहुंचे आनंद गिरि अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि के पैरों पर गिरकर माफी मांग ली।

आनंद बोले थे- मैं पंच परमेश्वर से भी अपने कृत्यों के लिए माफी मांग रहा हूं। मेरे द्वारा सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, टीवी चैनलों पर जो भी बयान जारी किए गए उसे मैं वापस लेता हूं। इसके बाद महंत नरेंद्र गिरि ने भी आनंद गिरि पर लगाए गए आरोपों को वापस लेते उन्हें माफ कर दिया।

आनंद गिरि अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि के पैरों पर गिरकर माफी मांग ली थी।
आनंद गिरि अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि के पैरों पर गिरकर माफी मांग ली थी।

अखाड़ा परिषद ने किया था हस्तक्षेप
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के हस्तक्षेप के बाद इस विवाद पर फिलहाल विराम लग गया था। इसके बाद गुरु पूर्णिमा के दिन आनंद गिरि अखाड़े में अपने गुरु की पूजा कर सके थे। अखाड़े और मठ में आनंद गिरि के प्रवेश पर लगाई गई रोक हटा दी थी। हालांकि, आनंद गिरि का अखाड़े से निष्कासन वापस हुआ या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है।

14 मई को अखाड़े से बाहर किए गए थे शिष्य आनंद गिरि
14 मई 2021 को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने आनंद गिरि को अखाड़े और बाघंबरी गद्दी से बाहर कर दिया था। उन पर अपने परिवार से संबंध रखने का आरोप लगा था। नरेंद्र गिरि ने कहा था कि बड़े हनुमान मंदिर पर आने वाले दान-चढ़ावे में से आनंद गिरि धन अपने परिवार पर खर्च कर रहे हैं। इसके बाद अखाड़े के पंच परमेश्वरों की सहमति के बाद आनंद गिरि पर यह कार्रवाई की गई थी।

आनंद गिरि ने करोड़ों रुपए की जमीन बेचने के आरोप लगाए थे
अखाड़े से बाहर होने के बाद आनंद गिरि ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था और अपने गुरु नरेंद्र गिरि पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें सबसे गंभीर आरोप मठ की करोड़ों रुपए की जमीनों को बेचने और उन रुपयों का दुरुपयोग करने का था।

आनंद ने कहा था कि उनके गुरु नरेंद्र के कई बड़े और महंगे शौक हैं। इन शौक को पूरा करने के लिए नरेंद्र गिरि मठ के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। मठ के कई सेवादारों के परिवारों पर भी करोड़ों रुपया खर्च करने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद गुरु और चेले के बीच विवाद गहरा गया था।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लिखी थी चिट्‌ठी
नरेंद्र गिरि ने भी आनंद गिरि पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी और अपनी जान का खतरा बताया था।

अब अरबों रुपए की बेची गई जमीनों का क्या?
लेटे हनुमान मंदिर और श्री निरंजनी अखाड़े से निकाले जाने के बाद स्वामी आनंद गिरि ने अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि पर मठ की अरबों रुपए की जमीनों को बेचने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में अखाड़े में हो रहे घोटाले की जांच कराए जाने की मांग की थी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आनंद गिरि ने जो अपने गुरु के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे, उनका क्या होगा। क्या भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे के पैसे के दुरुपयोग के आरोप केवल आरोप ही बनकर रह जाएंगे।

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