संगम में 3 लाख लोगों ने लगाई डुबकी:माघ मेले का पहला स्नान आज, श्रद्धालुओं की भीड़ कम, लेकिन फिर भी प्रशासन कोविड नियम फॉलो नहीं करा पा रहा

प्रयागराज4 महीने पहले
मकर संक्रांति पर प्रयागराज में संगम तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की जुटी भीड़।

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए प्रयागराज में सुबह से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है। करीब 3 लाख लोग आस्था की डुबकी लगाने के लिए आ चुके हैं। ऐसे में सवाल ये है कि सरकार ने मेले से पहले जो तैयारियों के दावों किए थे। वो आज फेल होते नजर आ रहे हैं। कहा गया था कि हर श्रद्धालु की RTPCR जांच होगी। मगर, ऐसा होता दिख नहीं आ रहा। प्रशासन की ओर से जो इंतजाम किए हैं वो ऊंट के मुंह जीरे के समान लग रहे हैं।

ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर को खुलेआम दावत मिल रही है। प्रशासन दावे हवाई होते दिख रहे हैं। बिना मास्क के लोग मेला क्षेत्र में घूम रहे हैं। डर है कि कहीं 'माघ मेला' कोरोना का सुपर स्प्रेडर न बन जाए। संगम के 6 किमी लंबे घाटों पर स्नान सुबह 4 बजे से ही शुरू है। वहीं, वाराणसी के दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालु गंगा स्नान कर दान पुण्य कर रहे हैं।

इसके बावजूद प्रशासन खुद लापरवाह बना है। बिना RT-PCR रिपोर्ट के श्रद्धालु, साधु-संत और अन्य लोगों का प्रवेश धड़ल्ले से हो रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में 80 फीसदी से ज्यादा लोग बिना मास्क के नजर आ रहे हैं।

मेला क्षेत्र में तैनात पुलिस कर्मी भी बिना मास्क के नजर आए।
मेला क्षेत्र में तैनात पुलिस कर्मी भी बिना मास्क के नजर आए।

दुकानदारों को RTPCR के बारे में नहीं जानकारी
सेक्टर-5 में चाय की दुकान चलाने वाले प्रशान्त उपाध्याय को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि मेले में आने के लिए RT-PCR रिपोर्ट जरूरी है। सेक्टर 4 में स्नैक्स की दुकान चलाने वाले रमेश ने कहा कि अभी तक उनके पास कोई भी RT-PCR रिपोर्ट चेक करने नहीं आया है। रोड पर सामान बेच रहे सुनील ने कहा कि मास्क तो नहीं लगाया पर लगाना चाहिए।

संगमनगरी प्रयागराज में भोर से ही हजारों श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं।
संगमनगरी प्रयागराज में भोर से ही हजारों श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं।

कोविड को लेकर क्या है दिशा-निर्देश
मेला क्षेत्र में कल्पवास के लिए उन्हीं व्यक्तियों को अनुमति दी जाएगी, जिनके पास 72 घंटे के अंदर RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव होगी तथा कोरोना टीके की दोनों डोज का प्रमाण पत्र होगा। 16 प्रवेशद्वारों एवं पार्किंग स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड-19 स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा प्रत्येक सेक्टर में 12 टीमें तैनात की गई हैं, जो प्रत्येक शिविर में नियमित कोविड-19 एवं कल्पवासियों के स्वास्थ्य का मेला अवधि तक परीक्षण करते रहेंगे। सप्ताह में दो बार कल्पवासियों की आरटीपीसीआर जांच भी करेंगे। इसके अलावा प्रत्येक सेक्टर में 12 सर्विलांस टीमें तैनात की गई हैं। मेला क्षेत्र में 6 केंद्र बनाए गए हैं, जिनके द्वारा नियमित टीकाकरण का कार्य किया जा रहा है।

संगम नगरी से सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी।
संगम नगरी से सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी।

एक नजर में संगम नगरी का मेला क्षेत्र

  • 5 सेक्टरों में विभाजित हैं मेला क्षेत्र
  • शिविरों में कल्पवासी, साधु-संत एक माह से अधिक समय तक संगम की रेती पर करेंगे वास।
  • श्रद्धालुओं के लिए बनाये गए हैं 12 स्नानाघाट।
  • एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर को जोड़ने के लिए बनाए गए हैं 5 पांटून पुल।
  • 20 मुख्य मार्ग व 92 गाटा मार्ग बनाए गया है।
  • स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए 190 किमी पाइप लाइन बिछायी गयी है।
  • मेला क्षेत्र में 24 घंटे बिजली सप्लाई के लिए 23 विद्युत उपकेंद्र स्थापित किये गए हैं।
  • श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 8 पार्किंग बनायी गई है।
  • मेला क्षेत्र में साफ-सफाई बनाये रखने के लिए 1800 सफाईकर्मी लगाए गए हैं।
  • 18500 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगायी गई है।
  • पूरे मेला क्षेत्र में 1390 सामुदायिक शौचालय व 3364 कनात शौचालय बनाए गए हैं।
  • 50 बेड का 2 अस्पताल, 12 स्वास्थ्य शिविर एवं 10 प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए गए हैं।
तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच शुक्रवार से माघ मेले का आगाज हो गया है
तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच शुक्रवार से माघ मेले का आगाज हो गया है

क्या है मकर संक्रांति की मान्यता
महाभारत के अनुसार, ''रवे मकर संक्रांतौ प्रयागे स्नानदानयो:/फलमानम न शक्नोति कर्तुम ब्रह्माअपि तत्वत:'' अर्थात मकर के सूर्य राशि में आने पर प्रयागराज में स्नानदान का जो फल प्राप्त होता है, उसे स्वयं ब्रह्मा भी बता पाने में असमर्थ हैं। महर्षि भारद्वाज ने उल्लेख किया है कि अयने कोटि पुण्यं च लक्षं विष्णुपदी फलं अर्थात अयन संक्रांति (सूर्य के उत्तरायण की संक्रांति) पर किए गए दान करोड़ों गुना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी, तिल, सोना, वस्त्र आदि का दान किए जाने का विधान है।

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