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बाघंबरी गद्दी मठ में फिर गिरि-पुरी विवाद:महंत को लेकर बलवीर पुरी के नाम पर सहमत नहीं कुछ संन्यासी; 2004 में नरेंद्र गिरि के साथ भी हुआ था यही विवाद

प्रयागराज4 महीने पहले
बलवीर पुरी के नाम को लेकर श्री निरंजनी अखाड़े में कुछ संत उनको महंत बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भले ही अपनी वसीयत में बलबीर पुरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया हो, लेकिन निरंजनी अखाड़े के कुछ महंत उन्हें गद्दी सौंपने को लेकर सहमत नहीं हैं। बलबीर की टाइटल पुरी है या गिरि इस पर विवाद खड़ा हो गया है। श्री निरंजनी अखाड़े के 18 पंच परमेश्वरों में से 10 का कहना है कि गद्दी का महंत गिरि नागा संन्यासी ही हो सकता है।

निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्रपुरी कहते हैं कि कुछ संन्यासी बलवीर के नाम का विरोध कर रहे हैं। इस पर बातचीत चल रही है। जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो सरकारी दस्तावेजों में बलवीर पुरी का नाम बदलकर बलवीर गिरि कराया जाएगा।

श्री बाघंबरी गद्दी मठ।
श्री बाघंबरी गद्दी मठ।

ऐसे मिलता है 'गिरि' टाइटल
जानकारों के मुताबिक जब कोई शिष्य श्री निरंजनी अखाड़े के महंत से दीक्षा ले लेता है, तब उसके नाम के आगे भी अपने गुरु के नाम का टाइटल लग जाता है। बलवीर पुरी ने भी नरेंद्र गिरि से दीक्षा ली है, लिहाजा उनका टाइटल भी बलवीर गिरि हो गया है।

मठ के कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि महंत नरेंद्र गिरि तो खुद ही 'गिरि' नहीं थे, क्योंकि उन्होंने महात्मा श्री हरि गोविंद पुरी से दीक्षा ली थी, जिनके नाम के आगे 'पुरी' टाइटल लगा था। इन लोगों के मुताबिक जब बलवीर के गुरु नरेंद्र गिरि ही एक 'पुरी' महात्मा थे, तो बलवीर एक 'गिरि' महात्मा कैसे हो गए। इसलिए बलवीर मठ के महंत नहीं बन सकते। यहां बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि को गिरि टाइटल कानूनी दस्तावेजों में नाम बदलवाकर मिला था। असलियत में वे गिरि नहीं थे।

एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया
श्री बाघंबरी मठ में एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया है। 2004 में जब नरेंद्र गिरि इस मठ के महंत बनाए गए थे, तब भी इसी तरह का विवाद खड़ा हो गया था। श्री निरंजनी अखाड़े के कुछ महात्माओं ने नरेंद्र गिरि को अखाड़े का महंत बनाए जाने का विरोध किया था। निरंजनी अखाड़े के एक महात्मा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उस समय तत्कालीन सरकार ने भी नरेंद्र गिरि की मदद की थी। जिसके बाद नरेंद्र गिरि श्री बाघंबरी गद्दी मठ के नए महंत बने थे। इस बार भी वैसे ही हालात हैं।

नरेंद्र पुरी ऐसे बने थे नरेंद्र गिरि
श्री बाघंबरी गद्दी मठ की स्थापना 1982 में श्री निरंजनी अखाड़े के महात्मा बाबा बाल किशन गिरि ने की थी। यह गिरि नागा संन्यासी की गद्दी मानी जाती है। यानी जिस महात्मा के नाम के साथ गिरि जुड़ा होगा वही इस गद्दी पर महंत बन सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने श्री निरंजनी अखाड़े के महात्मा हरि गोविंदपुरी से दीक्षा ली थी और इसके बाद संन्यासी बने थे। इससे शुरुआत में उनका नाम नरेंद्र पुरी था।

2002 में बलदेव गिरि के मठ छोड़ने के बाद भगवान गिरि बाघंबरी गद्दी मठ के महंत बनाए गए। भगवान गिरि और हरगोविंद पुरी में घनिष्ठता थी। इसी कारण नरेंद्र पुरी भगवान गिरि के साथ रहकर उनकी सेवा करने लगे। बताया जाता है कि भगवान गिरि भी नरेंद्र पुरी को काफी मानते थे। नरेंद्र गिरि ने भगवान पुरी को भी अपना गुरु माना था। उनकी समाधि मठ में है। अपने गुरु के बगल में नरेंद्र गिरि ने अपनी समाधि लगाने की बात सुसाइड नोट में लिखी थी।

पुरी नाम पर 2004 में भी हुआ था विवाद
बताया जाता है कि गले में कैंसर होने के कारण 2004 में भगवान गिरि की मौत हो गई। इसके बाद नरेंद्र गिरि ने महंत का अपना दावा पेश किया। उनका नाम वसीयत में दर्ज था, लेकिन इसके बावजूद पुरी नाम पर विवाद शुरू हो गया। हरगोविंद के भाई ने इसका कड़ा विरोध किया। वो खुद महंत बनना चाहते थे। इसके बाद श्री निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वरों ने मिलकर सरकारी दस्तावेजों में नरेंद्र पुरी का नाम बदलकर नरेंद्र गिरि रखा।

बलवीर पुरी
बलवीर पुरी

अब बलवीर को भी गुरु के तरह ही 'गिरि' टाइटल दिया जाएगा
श्री बाघंबरी गद्दी मठ का जो धड़ा बलवीर पुरी को महंत बनाने पर सहमत है, उसमें आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि जी महराज व सचिव रवींद्र पुरी सहित 8 महंत शामिल हैं। कहा जा रहा है कि अब ये धड़ा कानूनी दस्तावेजों में बलवीर पुरी का नाम बदलवाकर उन्हें 'गिरि' टाइटल दिलवाएगा। यानी अब बलवीर को भी अपने गुरु की तरह ही 'गिरि' टाइटल मिलेगा।

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