फूलपुर के रहने वाले थे महंत नरेंद्र गिरि:प्रयागराज के एक गांव से साधु संतों की सर्वोच्च संस्था तक का सफर, आइए जानते हैं पूरी बात

प्रयागराज2 महीने पहले
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के निधन से हर कोई स्तब्ध है। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि इतने मजबूत इरादों वाला व्यक्ति आत्महत्या कैसे कर सकता है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के अल्लापुर में स्थित बाघंबरी गद्दी मठ के महंत और त्रिवेणी संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के प्रमुख व्यवस्थापक थे। सनातन धर्म से लगाव और राजनीतिक गलियारों से जुड़ाव के चलते नरेंद्र गिरि द्वारा समय-समय पर दिए गए बयान सुर्खियां बनते रहे हैं। महंत नरेंद्र गिरी प्रयागराज जिले के अंतर्गत पड़ने वाली फूलपुर तहसील के रहने वाले थे।

संतों से शुरू से था बड़ा लगाव

कहा जाता है कि शुरुआत से ही महंत नरेंद्र गिरि को संतों से बड़ा लगाव था। गांव में जब कोई संत आता तो नरेंद्र गिरि उनके पीछे लग जाते। उनके साथ काफी समय व्यतीत करते। धर्म-संस्कृति के बारे में जानकारी लेते। सनातन संस्कृति और धर्म से अपने गहरे लगाव के कारण ही नरेंद्र गिरि युवावस्था में गांव से निकलकर संतों की टोली में आ गए। इसके बाद राजस्थान पहुंच गए। वहां एक अखाड़े में रहकर संतों की सेवा में जुट गए। राजस्थान में काफी साल बिताने के बाद वह वापस प्रयागराज आ गए और यहां पर निरंजनी अखाड़े से जुड़ गए। इसके बाद नरेन्द्र गिरी ने प्रयागराज में मठों के उद्धार के लिए प्रयास शुरू कर दिए।

दो दशक पहले मिली थी बाघंबरी गद्दी की जिम्मेदारी

बंधवा वाले लेटे हनुमान मंदिर और बाघंबरी मठ के पूर्व संचालक के स्वर्गवास के बाद बाघंबरी मठ की जिम्मेदारी नरेंद्र गिरी को मिल गई। दो दशक पहले यह जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने असम द्वारा संचालित संस्कृति स्कूलों में वैदिक शिक्षा, गोशालाओं का निर्माण शुरू कराया। नरेंद्र गिरि ने सनातन धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य शुरू किया। नरेंद्र गिरि का धर्म के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों से भी नाता रहा है। महंत गिरि की एक दशक पूर्व प्रयागराज के हंडिया से सपा विधायक स्व. महेश नारायण सिंह के काफी नजदीकी हुआ करते थे। नरेंद्र गिरि मुलायम सिंह यादव के भी करीबी रहे।

2015 में बने थे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष

महंत नरेंद्र गिरि साधु-संतों की समस्याओं को लेकर सदैव से मुखर रहे। सनातन धर्म की रक्षा के लिए बने सभी अखाड़ों ने मार्च 2015 में इन्हें अपना अगुआ मानते हुए सर्वसम्मति से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित कर दिया था। उस समय जूना अखाड़े के महंत हरि गिरी को परिषद का महामंत्री चुना गया था। प्रयागराज कुंभ में वसंत पंचमी पर तीसरे शाही स्नानपर्व में डुबकी लगाने के बाद काशी में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के चुनाव में मठ बाघम्बरी गद्दी के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को दूसरी बार अखाड़े का सचिव नियुक्त किया गया।

कोने कोने में जलाई सनातन संस्कृति की अलख

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनने के बाद नरेन्द्र गिरी ने देश के कोने-कोने में रहने वाले साधु-संतों को एकत्र कर सनातन संस्कृति का प्रचार शुरू किया। उन्होंने प्रयागराज में हर वर्ष आयोजित होने वाले माघ मेले, अर्धकुंभ और कुंभ मेले में देश-विदेश से आए हुए साधु-संतों का कुशल नेतृत्व किया। कभी कोई विवाद की स्थिति आई भी तो उसे आपसी बातचीत से सुलझा लिया। नरेंद्र गिरि ने ऐसे संतों के प्रति कड़े फैसले लिए जो सनातन धर्म और संस्कृति के पीछे अपने अपनुचित कार्यों को अंजाम दे रहे थे। कुंभ मेले के आयोजन से पूर्व अखाड़ा परिषद के सदस्यों के साथ बैठकर इन्होंने दागी संतों को कुंभ मेले में प्रवेश न देने और उन्हें संत समाज से बाहर का रास्ता दिखाने का कार्य किया। यह काफी चर्चा में रहा।

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