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  • On The Day Of Janmashtami, Maa Ganga Bathes Hanumanji.: At 11:45 Pm On Thursday Night, Hanuman Ji Lying At The Sangam Drowned, The Water Level Rising Rapidly.

जन्माष्टमी के दिन मां गंगा ने हनुमानजी को नहलाया:गुरुवार रात 11:45 बजे संगम स्थित लेटे हनुमान जी डूबे, तेजी से बढ़ रहा जलस्तर

प्रयागराज3 महीने पहले

संगम किनारे स्थित लेटे हनुमानजी का महास्नान कराने मां गंगा गुरुवार की रात 11:45 पर मंदिर पहुंचीं। वैदक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा ने अपने पुत्र हनुमानजी के पैर पखारे। इस दौरान श्री बाघंबरी गद्दी के महंत बलवीर पुरी ने विशेष पूजा-अर्चना की।

शुक्रवार भोर से ही लेटे हनुमान जी के दर्शन को उमड़ी भीड़ को मायूस होकर लौटना पड़ा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद हनुमान मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। अब गंगा जी के पीछे हटने और बाढ़ का पानी कम होने के बाद ही मंदिर खुलेगा।

बंधवा स्थित हनुमान मंदिर में मां गंगा के प्रवेश के बाद विशेष पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
बंधवा स्थित हनुमान मंदिर में मां गंगा के प्रवेश के बाद विशेष पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

पिछले वर्ष 5 अगस्त को ही पखारे थे हनुमान जी के पैर
पिछले साल पांच अगस्त 2021 को बंधवा स्थित लेटे हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर पूरी तरह से गंगा के पानी में डूब गया था। मंदिर में गंगा के पानी के प्रवेश के साथ-साथ हनुमान जी की विधिवत पूजा अर्चना की गई थी। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे।

मां गंगा के मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद पूजा-अर्चना करते महंत बलवीर पुरी जी महाराज।
मां गंगा के मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद पूजा-अर्चना करते महंत बलवीर पुरी जी महाराज।

विश्व में लेटी हुए हनुमान जी का प्रयाग में है इकलौता मंदिर
संगम से 800 मीटर दूर बंधवा स्थित लेटे हनुमान जी से मिलने मां गंगा पांच अगस्त को दोपहर 2 बजे पहुंचीं थीं। मंदिर में मां गंगा के प्रवेश के साथ ही साथ घंटा-घड़ियाल और शंखनाद की ध्वनि के बीच जयकारे लगने लगे थे। हनुमान जी के पांव पखारने का दृश्य अपनी आंखों में कैद करने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु संगम पहुंचे। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे।

हनुमान जी को स्नान कराने के लिए मंदिर की सीढ़ियों से उतरतीं मां गंगा।
हनुमान जी को स्नान कराने के लिए मंदिर की सीढ़ियों से उतरतीं मां गंगा।

वैसे तो हनुमान जी का मंदिर विश्व के कई देशों में हैं, पर यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें हनुमान जी की मूर्ति लेटी हुई है। यह मंदिर एक बांध पर स्थित है इसीलिए इसे बंधवा हनुमान जी का मंदिर भी कहा जाता है। कुछ लोग इस मंदिर को बड़े हनुमान जी के नाम से जानते हैं।

महंत बलवीर गिरि ने जन्माष्टमी के दिन मां गंगा के हनुमान जी का स्नान कराने को विशेष फलदायी बताया है।
महंत बलवीर गिरि ने जन्माष्टमी के दिन मां गंगा के हनुमान जी का स्नान कराने को विशेष फलदायी बताया है।

जन्माष्टमी के दिन मां गंगा का हनुमान जी को नहलाना विशेष शुभकारी
श्री बाघंबरी गद्दी मठ के पीठाधीश्वर महंत बलवीर पुरी ने बताया, “जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। आज पूरा देश उत्सव और श्रद्धा में डूबा है। ऐसे में मां गंगा का लेटे हनुमान जी का आज के दिन स्नान कराना विशेष शुभकारी है। यह वर्ष देश और प्रदेश के लिए भी शुभकारी होगा और नागरिकों का भी कल्याण होगा।”

उन्होंने कहा, “मां गंगा की हमने मंदिर परिसर में प्रवेश पर पहले आरती उतारी है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद से उनका अभिषेक किया। मां भगवती गंगा अपने पुत्र हनुमान जी को शयन कराने आई हैं। उन्हें नगर कोतवाल भी माना जाता है।”

बलवीर पुरी ने बताया, "मां गंगा का भाव यही है कि तुम हमेशा मुस्तैद रहते हो, अब थोड़ा विश्राम कर लो। ऐसी मान्यता है कि जिस साल हनुमान जी के पैर गंगा मइया पखार लेती हैं, उस वर्ष आम जन का कल्याण होता है। महामारी और प्राकृतिक आपदाएं लागों से दूर रहती हैं। विश्व का कल्याण होता है।

हनुमान जी को स्नान कराने को पहुंचीं मां गंगा।
हनुमान जी को स्नान कराने को पहुंचीं मां गंगा।
मां गंगा के मंदिर में प्रवेश के बाद विशेष आराधना करते महंत बलवीर गिरि जी महाराज।
मां गंगा के मंदिर में प्रवेश के बाद विशेष आराधना करते महंत बलवीर गिरि जी महाराज।
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