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  • Petition Filed Seeking Compensation For Father's Death From Corona Dismissedकोरोना से पिता की मौत पर मुआवजा देने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज

सुनवाई के लायक नहीं याचिका:पिता की कोरोना से मौत के बाद बेटे ने मुआवजे को लेकर दाखिल की थी याचिका, HC ने किया खारिज

प्रयागराज6 महीने पहले
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  • अनुच्छेद 226 के तहत बेटे ने दायर की थी याचिका, अस्पताल प्रशासन पर लगाया था इलाज में लारवाही का आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना से पिता की मौत के मामले में मुआवजे की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जिन तथ्यों और आरोपों के तहत मुआवजे की मांग की गई है। उनमें कई आरोप ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ सबूतों द्वारा ही साबित किया जा सकता है। ऐसे में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका उपयुक्त नहीं है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।

कुलभूषण त्यागी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उस याचिका में कहा गया था कि उनके पिता को कोविड संक्रमण होने के बाद उन्हें गाजियाबाद के संयुक्त जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। भर्ती होने के बाद चिकित्सकों न उनकी ठीक से न तो इलाज किया और न ही देखभाल की। अस्पताल प्रशासन ने लापीरवाही, उदासीनता व निष्क्रियता दिखाई जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

याचिका में उन्होंने अपनी पिता की मौत के लिए सरकार और अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे व जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्त सूर्य प्रकाश केसरवानी व न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की युगल पीठ कर रही थी।

याचिका में ये लगाए थे आरोप
जिला संयुक्त अस्पताल, गाजियाबाद जोकि एक सरकारी अस्पताल है में अधिकारियों की निष्क्रियता, लापरवाही और उदासीनता के कारण मेरे पिता की मौत हुई है। लिहाजा मुझे मुआवजा मिलना चाहिए।
पदाधिकारियों की ओर से हुई चूक की उचित जांच का कोर्ट आदेश दे व जिम्मेदार लोगों को उचित रूप से दंडित किया जाए।

हाईकोर्ट का आब्जर्वेशन
इस याचिका में याची द्वारा कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसमें तथ्यों के संबंध में अत्यधिक विवादित प्रश्न शामिल हो सकते हैं। इसमें आरोप की सिद्धि सबूतों द्वारा होनी है। लिहाजा इस उद्देश्य के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका उपयुक्त उपाय नहीं है। पूर्वोक्त को देखते हुए और याचिकाकर्ता के मामले के गुण-दोष पर बिना कोई राय व्यक्त किए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची न्याय के लिए अन्य तरह के कानून का सहारा ले सकता है।

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