कॉन्स्टेबल भर्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश:कहा- एक ही भर्ती में दो बार लंबाई और सीने की चौड़ाई नापने की जरूरत नहीं, सरकार की विशेष अपील भी कोर्ट ने ठुकराई

प्रयागराज5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
शारीरिक दक्षता और मेडिकल जांच दोनों में लंबाई नापने का औचित्य नहीं है। - Dainik Bhaskar
शारीरिक दक्षता और मेडिकल जांच दोनों में लंबाई नापने का औचित्य नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को उत्तर प्रदेश नागरिक पुलिस और पीएसी कॉन्स्टेबल भर्ती को लेकर बनाए गए नियम में बदलाव पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक ही भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की लंबाई दो बार नापे जाने का औचित्य नहीं है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की विशेष अपील कोर्ट ने खारिज कर दी। यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस एमएन भंडारी व जस्टिस एससी शर्मा ने दिया है।

विशेष बोर्ड की नाप में लंबाई मानक के अनुरूप मिली
याची अमन कुमार के अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि कॉन्स्टेबल भर्ती में याची की लंबाई निर्धारित मानक 168 सेमी से कम पाई गई। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने जांच की तो लंबाई 168 सेमी से अधिक पाई गई। इसके बाद कोर्ट ने उसकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है, जिसे प्रदेश सरकार ने विशेष अपील में चुनौती दी।

लंबाई मानक के अनुरूप होने पर ही मेडिकल कराने का प्रावधान
सरकारी वकील की दलील थी कि भर्ती नियमावली के अनुसार शारीरिक दक्षता परीक्षा में लंबाई मानक के अनुरूप पाए जाने के बाद ही अभ्यर्थी का मेडिकल कराने का प्रावधान है। मेडिकल में दोबारा लंबाई की जांच होती है। वकील ने कहा कि एकल पीठ द्वारा शारीरिक परीक्षा में अनफिट अभ्यर्थी की मेडिकल जांच कराने का आदेश देते समय इस तथ्य की अनदेखी की गई है।

कोर्ट के आदेश से हुई मेडिकल जांच को नजरअंदाज नहीं कर सकते
खंडपीठ का कहना था कि जब कोर्ट के आदेश से मेडिकल जांच कराई गई है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। शारीरिक दक्षता और मेडिकल जांच दोनों में लंबाई नापने का औचित्य नहीं है। क्योंकि यदि दोनों के परिणाम में अंतर आएगा तो भर्ती बोर्ड का टेस्ट स्वयं में विरोधाभासी हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों में लंबाई और सीने की नाप एक बार ही की जाती है। पीठ का यह भी कहना था कि अदालतों को भी ऐसे मामलों में रूटीन मेडिकल जांच करने का आदेश देने से बचना चाहिए।

खबरें और भी हैं...