प्रयागराज में टीबी मरीजों के लिए बनेंगे चार नए सेंटर:बनाए जाएंगे लैब, टीबी मरीजों की होगी जांच, उपलब्ध होंगी निश्शुल्क दवाईयां

प्रयागराज8 महीने पहले
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प्रयागराज के सिविल लाइंस एक होटल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एके तिवारी - Dainik Bhaskar
प्रयागराज के सिविल लाइंस एक होटल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एके तिवारी

प्रयागराज में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब चार नए ट्रीटमेंट सेंटर खोले जाने की तैयारी है। इसके लिए स्थान भी चिह्नित कर लिए गए हैं। चिह्नित स्थान शहर के कमला नगर, नारीबारी, असरावल कला व करेली हैं। जल्द ही यह सेंटर टीबी मरीजों की जांच व इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे। अभी तक जनपद में टीबी मरीजों के लिए कुल 31 ट्रीटमेंट सेंटर संचालित हो रहे हैं। चार नए सेंटरों के खुलने से आस पास के मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी।

10 माह में 11 हजार से ज्यादा मरीज मिले

बुधवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में सीफार (सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एके तिवारी ने बताया कि वर्ष 2020 में क्षय रोग से संक्रमित कुल 13652 लोगों को चिह्नित किया गया था। इस वर्ष अभी 11117 टीबी मरीज जनपद में मिले हैं। निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत टीबी के मरीजों को हर महीने 500 रुपए आर्थिक मदद की जाती है। बीते साल 9143 मरीजों को दो करोड़ 41 लाख की धनराशि इस योजना के तहत दी गई है। जिला कार्यक्रम समन्वयक एसके सैमसन ने बताया कि निजी स्वास्थ्य से जुड़े प्रेक्टिशनर, क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम, लैब और केमिस्ट आदि के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। सीफार की प्रयागराज मंडल की नोडल प्रीति सैनी ने बताया कि इस वर्कशाप के आयोजन का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग टीबी बीमारी से बचाव के प्रति सजग रहें।

एक टीबी मरीज 10-12 नए मरीज बनाता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन की डा. तृष्णा ने बताया कि टीबी रोग एक जानलेवा संचारी रोग है। यह बीमारी रोगी के खांसने, छींकने या थूकने पर हवा में निकलने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आने से होती है। सामान्यतः यह फेफड़ों को प्रभावित करता है। एक टीबी मरीज के संपर्क में आने से लगभग 10 नए मरीज बन जाते हैं। यह पूरी दुनिया में खराब स्वास्थ्य का यह एक मुख्य कारण है। इसके साथ ही क्षय रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। वर्ष 2020 तक कुल 26 लाख यानी 188 प्रति लाख क्षय रोगी भारत में पाए गए हैं। कार्यक्रम में डा. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, धीरेंद्र प्रताप सिंह, आशीष सिंह, समर बहादुर सिंह, अभय आदि रहे।

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